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तैयार रहें लोग, अब भरनी पढ़ सकती हैं ये फीस
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 Nov 2015 01:08 PM IST
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कई तरह के टैक्स और भुगतान करने के बाद लोगों को अब एक और फीस भरनी पड़ सकती है। दरअसल, चंडीगढ़ के लोगों से सालाना दस करोड़ का सेनिटेशन सेस वसूला जा सकता है। डड्डूमाजरा स्थित गारबेज प्लांट नगर निगम से गारबेज प्रोसेसिंग फीस की मांग कर रहा है। इस मामले में नगर निगम को हाईकोर्ट में जवाब भी देना है।
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गारबेज प्लांट में रोज 250 टन से ज्यादा कूड़ा प्रोसेस होता है। इसके लिए प्लांट नगर निगम से 1000 रुपये प्रति टन के हिसाब से प्रोसेसिंग फीस मांग रहा है। इस हिसाब रोज ढाई लाख रुपये से ज्यादा की फीस बनेगी और साल में यह दस करोड़ रुपये के करीब होगी।
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इस फीस की वसूली के लिए प्लांट की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम से जवाब मांगा है। सोमवार को नगर निगम हाउस की बैठक में पार्षद ये तय करेंगे की इस संबंध में क्या नीति हो।
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सेग्रीगेशन सिस्टम पर होगी चर्चा
सोमवार को सदन की बैठक में गारबेज कलेक्शन के लिए सेग्रिगेशन सिस्टम लागू करने पर चर्चा होगी। इसके तहत लोगों को गीले और सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखना होगा। यह सिस्टम प्रयोग के तौर पर पहले सेक्टर-34 और 35 में लागू किया जाएगा।
यहां की वार्ड पार्षद हरजिंदर कौर के सुझाव पर ही यह प्रस्ताव चर्चा के लिए आ रहा है। चार साल पहले यह सिस्टम सेक्टर-22 में भी लागू किया गया था, लेकिन रेग पिकर और घर घर कूड़ा इकट्ठा करने वाले लोगों के विरोध के बाद नगर निगम इससे पीछे हट गया था।
हिमाचल से आया तीन हजार टन कूड़ा
हिमाचल प्रदेश के शिमला, सोलन और बद्दी से 6 अक्तूबर से अब तक तीन हजार टन कूड़ा प्रोसेसिंग के लिए आ चुका है। गारबेज प्लांट इसके लिए हिमाचल प्रदेश से भी प्रोसेसिंग फीस मांग सकता है।
गारबेज प्लांट को हर महीने 50 लाख का घाटा हो रहा है। हैदराबाद, मुंबई, फरीदाबाद में गारबेज प्लांट 600 से एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से प्रोसेसिंग फीस ले रहे हैं। समझौते में एक शर्त यह शामिल है कि अगर देश का कोई भी प्लांट प्रोसेसिंग फीस चार्ज कर रहा होगा तो चंडीगढ़ नगर निगम भी फीस अदा करेगा। इसी आधार पर हमने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है।
-आरडी शर्मा, प्रभारी, जेपी गारबेज प्लांट
जेपी प्लांट और नगर निगम के बीच जो समझौता हुआ है उसके अनुसार प्लांट को शहर का कूड़ा निशुल्क ही प्रोसेस करना है। समझौते के अनुसार प्लांट किसी दूसरे राज्य का भी कूड़ा प्रोसेस के लिए नहीं ले सकता, जो कि लिया जा रहा है। इस मामले को सोमवार को सदन की बैठक के समक्ष रखा गया है।
- राजीव गुप्ता, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम