बुलंद हाैसलों को सलाम: हिंसा में घर जला पर नहीं मानी हार... मणिपुर टीम के कप्तान बने मैक्स
मणिपुर की टीम में अधिकतर खिलाड़ी मैतेई समुदाय से है। मणिपुर में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है।
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मणिपुर में वर्ष 2023 में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हुई हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई, वहीं लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। इन सबके बावजूद यहां युवाओं में क्रिकेट के प्रति लगाव देखते ही बनता है।
मणिपुर की टीम इन दिनों चंडीगढ़ में बीसीसीआई की ओर से प्रतिष्ठित वीनू मांकड़ ट्रॉफी अंडर 19 में हिस्सा लेने पहुंची हुई है। अभी तक टीम ने अपने दो मुकाबले खेले है। यह तीन मैच सेक्टर 16 क्रिकेट स्टेडियम और जीएमएसएसएस 26 के क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए। इन मुकाबलों में वे खिलाड़ी भी मणिपुर की टीम से खेले जिनका घर हिंसा में पूरी तरह से जला दिया गया था। इस सबके बावजूद
खिलाड़ियों ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज कर बता दिया कि कोई भी घटना उनका मनोबल तोड़ नहीं सकती।
पूरी टीम में अधिकतर खिलाड़ी मैतेई समुदाय से है। मणिपुर में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। मैदानी इलाकों में मुख्य रूप से मैतेई बोलने वाली आबादी रहती है। वहीं पहाड़ियों में मुख्य रूप से नागा, कुकी जैसी जनजातियां निवास करती हैं।
पूरा घर जला दिया हिंसा में
वीनू मांकड़ ट्रॉफी में चंडीगढ़ पहुंची मणिपुर की टीम के कप्तान मैक्स ने टीम को मिली शुरुआती जीतों से काफी खुश है, लेकिन मणिपुर की हिंसा को याद करते हुए इनका दर्द छलक उठता है। घटना को याद करते हुए इन्होंने बताया कि इंफाल के लिकहोन में मेरे पिता का घर था। जिस दिन वहां पर हिंसा फैली उससे कुछ दिन पहले ही मैं और मेरा परिवार घर से 30 किलोमीटर दूर अपने मामा के घर पर थे। उस हिंसा में लिकोन स्थित हमारा पूरा घर जला दिया गया। उस समय मेरा पूरा परिवार काफी डर गया था। हमारी अपने घर वापस जाने की हिम्मत नहीं हुई।
तनाव नहीं होना चाहिए, खेल प्रभावित होता है
मणिपुर क्रिकेट टीम में बतौर बल्लेबाज के तौर पर खेलने वाले रॉबिंसन ने बताया कि हम लोग मैदानी एरिया में रहते हैं। हमें पहाड़ी एरिया पर जाने की अनुमति नहीं है। हाईवे की और भी जाना माना है। ऐसे में हम सीमित जगह तक ही क्रिकेट के मैदानों पर खेल सकते है। हिंसा में हमारे एरिया का काफी नुकसान हुआ है। उस समय वहां पर डर का माहौल भी था। रॉबिंसन ने कहा कि तनाव की स्थिति नहीं
होनी चाहिए, क्योंकि इससे खेल का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ बहुत ही शानदार शहर है। यहां सब मिलजुल कर रहते हैं। यह देखकर काफी खुशी हुई।
अभ्यास करने में दिक्कतें रहती है
मणिपुर टीम के सहायक कोच राजकुमार ने बताया कि हमारे यहां पर अभी क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रकचर, क्रिकेट ग्राउंड और भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि कई महीने वहां पर बारिश का मौसम रहता है। जून-जुलाई से लेकर अक्तूबर-नवंबर तक बारिश रहती है। वहीं खेल के लिए करीब छह क्रिकेट मैदान हैं। अभी वहां पर क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा है। क्रिकेट के अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते हम लोग क्रिकेट का अभ्यास करने के लिए इंदौर जाते हैं।