चंडीगढ: शिअद प्रतिनिधिमंडल ने स्पीकर को सौंपा ज्ञापन, विधानसभा सत्र बढ़ाने की मांग की
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के विधायक दल ने बुधवार को बिजली दरों में बढ़ोतरी, बिजली घोटालों और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग के पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा के बजट सत्र को 15 दिवसीय करने की मांग की है।
विधानसभा स्पीकर को मांगपत्र देने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विधायक दल के नेता शरनजीत सिंह ढिल्लों और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि पार्टी ने स्पीकर राणा केपी सिंह से बजट सत्र को बढ़ाकर 15 दिन का करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा एक दिन का सत्र राज्यपाल के संबोधन पर चर्चा करने की लिए रखा गया है, इसमें सार्वजनिक मुद्दों के बारे ही चर्चा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को बहस से नहीं भागना चाहिए और बजट सत्र में लोगों के मसले उठाने के लिए विरोधी पक्ष को उचित समय दिया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में एनके शर्मा, लखबीर सिंह लोधीनंगल, हरिंदरपाल सिंह, चंदूमाजरा और दिलराज सिंह भूंद भी शामिल थे। अकाली नेताओं ने कहा कि पंजाब के लोगों को सबसे मंहगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, जोकि 9-10 रुपये प्रति यूनिट हो चुकी है जबकि अकाली-भाजपा सरकार के दौरान 5.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली दी जाती थी।
ढिल्लों और मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली देने का वादा पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को 4300 करोड़ रुपये के बिजली घोटालों की भी स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए और भ्रष्टाचार के लिए तत्कालीन बिजली मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि प्रदूषण-रोधी उपकरण न लगाने वाले प्राइवेट थर्मल प्लांटों के खिलाफ पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने कार्रवाई क्यों नही की?
अकाली नेताओं ने कहा कि उन्होंने बहिबलकलां पुलिस फायरिंग कांड के गवाहों को बयानों से पलटवाने के लिए उन पर डाले जा रहे दबाव के बारे में चर्चा करने की मांग भी की है, क्योंकि मुख्य गवाह सुरजीत सिंह की विधवा इस बात का पर्दाफाश कर चुकी है कि किस तरह कांग्रेसी मंत्री गुरप्रीत कांगड़ और सलाहकार कुशलदीप ढिल्लों ने गवाह पर दबाव डाला था।
फायरिंग में मारे गए कृष्ण भगवान सिंह के भाई रेशम सिंह ने अब हाईकोर्ट के चीफ न्यायाधीश को शिकायत दी है कि डीएसपी हरिंदर गिल और एडीसी परमजीत सिंह पन्नू के नाम मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के इशारे पर एफआईआर से हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि रेशम सिंह ने चीफ जस्टिस को इस मामले की जांच अपनी निगरानी में करवाने का भी अनुरोध किया है। अकाली नेताओं ने कहा कि मामले से हो रही छेड़छाड़ का जवाब देना और गवाहों के परिवारों को सुरक्षा प्रदान करवाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।