सुखबीर बादल का आरोप- पंजाब में हुआ 4100 करोड़ का बिजली घोटाला, सीबीआई से कराई जाए जांच
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शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ज्ञापन सौंपा। उनसे 4100 करोड़ के बिजली घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने को पंजाब सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया। अकालियों ने अनुरोध किया कि राज्य सरकार को घोटाले वाली फाइलों से जुड़े सभी मंत्रियों और अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त करने का भी निर्देश दें। किसी किस्म की छेड़छाड़ की आशंका के मद्देनजर सभी फाइलों को तुरंत सील किया जाए।
सरकार को इन घोटालों के कारण बढ़ाई बिजली दरों का भुगतान सरकारी खजाने से करने को कहें। जांच के बाद दोषियों से वह रकम वसूली जाए। सुखबीर ने उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने निजी कंपनियों से बड़ी रकम लेने के बाद जानबूझ कर अदालतों और ट्रिब्यूनल में सरकार का पक्ष कमजोर कर केस हरवाया। अदालतों में अहम जानकारियों को छिपाया और तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि कोयला धुलाई के केस में सरकार को 1400 करोड़ और 1100 करोड़ देने को कहा गया है।
अकाली-भाजपा सरकार ने राजपुरा थर्मल प्लांट प्रबंधन को स्पष्ट कर दिया था कि कोयले की धुलाई सफल बोलीकार को ही देनी होगी। समझौता होते ही कंपनी ने धुलाई का खर्च मांगा, जिसे खारिज कर दिया गया। उस दौरान पीएसईआरसी और केंद्रीय अथॉरिटी एपीटीईएल ने भी कंपनी का दावा खारिज कर दिया था।
कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में झूठा बयान दिया कि प्रोजेक्ट वाली जगह पर कोयले की कैलोरिफिक वैल्यू मापने की कोई पद्धति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट है कि कोयले की कैलोरिफिक वैल्यू प्रोजेक्ट वाली जगह पर निकाली जानी चाहिए। हाईकोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि कोयला कंपनियों को 1602 करोड़ हर्जाना देने के ट्रिब्यूनल के फैसले को सरकार ने ढाई साल तक चुनौती नहीं दी। इससे साफ है कि कांग्रेस कंपनी के साथ फ्रेंडली मैच खेल रही थी।
सरकार द्वारा अंदरूनी तौर पर ऐसी सौदेबाजी के कारण ही उसे बिजली दरें बढ़ानी पड़ी हैं। कांग्रेस ने तीन साल में उपभोक्ताओं पर 2200 करोड़ का अतिरिक्त बोझ डाला है। अगर इस मामले में न्याय नहीं मिला तो पार्टी हाईकोर्ट जाएगी। इस मौके पर सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बिक्रम मजीठिया, डॉ. दलजीत चीमा समेत कई नेता मौजूद थे।
बिजली समझौते रद्द करने के लिए स्पीकर से मिली आप
आम आदमी पार्टी ने पिछली सरकार के दौरान निजी थर्मल प्लांटों के साथ हुए बिजली खरीद समझौते रद्द करने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा और विधायक अमन अरोड़ा की अगुवाई में पार्टी नेताओं ने स्पीकर राणा केपी सिंह से मिल कर इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग की।
आप नेताओं ने स्पीकर से द पंजाब टर्मिनेशन ऑफ पॉवर पर्चेज एग्रीमेंट विद 3 आईपीपीज बिल 2020 (प्राइवेट मेंबर बिल) को सदन में पेश करने की इजाजत मांगी। इसके अलावा इस बारे में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी सौंपा गया। बाद में मीडिया से बातचीत में चीमा और अरोड़ा ने अकालियों द्वारा महंगी बिजली को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने को मगरमच्छ के आंसू करार दिया। उन्होंने कहा कि सुखबीर ने ही सरकारी थर्मल प्लांट बंद कर निजी कंपनियों के साथ मिल कर पंजाब में बिजली माफिया पैदा किया।