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सांग उत्सवः दूसरे दिन चंद्रपाल सुमित्रा देवी धर्म की जीत का मंचन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Jun 2016 08:37 PM IST
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चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में हरियाणवी सांग उत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर 18 स्थित टैगोर थिएटर में सांग उत्सव में शुक्रवार को चन्द्रपाल सुमित्रा देवी धर्म की जीत सांग को पेश किया गया। आठ दिवसीय सांग उत्सव का आयोजन सूचना जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा की ओर से किया जा रहा है। चन्द्र लाल वेदी की रचना और सूबे सिंह के निर्देशन में चन्द्रपाल सुमित्रा देवी धर्म की जीत सांग को पेश किया गया।
कहानी में दिखाया गया कि मुंबई में एक सेठ मंगुमल रहते थे। उनका लड़का चन्द्रपाल इंग्लैंड से वकालत पास करके आता है। वह भारत की संस्कृति को भूला होता है। उसका विवाह सुमित्रा नाम की लड़की से हो जाता है। वह दुर्गा मां की भक्त होती है। उसकी भक्ति वाली बातें चन्द्रपाल को पंसद नही होती और वह उसे घर से निकाल देता है। इसकेबाद वह अपने घर प्रेमजान की तवाइफ को ले आता है। जिससे उसका सारा परिवार नराज हो जाता है।
चन्द्रपाल को कही जाना होता है। इस दौरान उसका एक दोस्त माणकचंद प्रेमजान के पास आता है और कहता है मुजरा दिखाओ। लेकिन प्रमजान कहती है इस समय में सेठाणी हूं और उसे धक्के देकर घर से बाहर निकाल देती है। माणकचंद को बुरा लगता है और वह प्रेमजान से बदला लेने की ठान लेता है। वहीं सुमित्रा घर से निकला देने के बाद बाबा बन जाती है। मौन घराण कर लेती है और अपना नाम मौनी बाबा रख लेती हैं।
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एक दिन माणकचंद वहां पुहंच जाता है और कागज पर लिखकर देता है कि में प्रेमजान का कत्ल करना चाहता है। आप बताएं कि मुझे फांसी होगी या बरी हो जाउंगा। सुमित्रा जब इसे पढ़ती हैतो उसे पता चलता है यह तो मेरी घर की बात हो रही है। वह माणक चंद को कहती है कि आप बरी होंगे। माणकचंद प्रेमजान का कत्ल कर देता है और इल्जाम चंन्द्रपाल पर लगा देता है। इसके बाद चंन्द्रपाल को फांसी हो जाती हैं।
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कहानी में दिखाया गया कि मुंबई में एक सेठ मंगुमल रहते थे। उनका लड़का चन्द्रपाल इंग्लैंड से वकालत पास करके आता है। वह भारत की संस्कृति को भूला होता है। उसका विवाह सुमित्रा नाम की लड़की से हो जाता है। वह दुर्गा मां की भक्त होती है। उसकी भक्ति वाली बातें चन्द्रपाल को पंसद नही होती और वह उसे घर से निकाल देता है। इसकेबाद वह अपने घर प्रेमजान की तवाइफ को ले आता है। जिससे उसका सारा परिवार नराज हो जाता है।
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चन्द्रपाल को कही जाना होता है। इस दौरान उसका एक दोस्त माणकचंद प्रेमजान के पास आता है और कहता है मुजरा दिखाओ। लेकिन प्रमजान कहती है इस समय में सेठाणी हूं और उसे धक्के देकर घर से बाहर निकाल देती है। माणकचंद को बुरा लगता है और वह प्रेमजान से बदला लेने की ठान लेता है। वहीं सुमित्रा घर से निकला देने के बाद बाबा बन जाती है। मौन घराण कर लेती है और अपना नाम मौनी बाबा रख लेती हैं।
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एक दिन माणकचंद वहां पुहंच जाता है और कागज पर लिखकर देता है कि में प्रेमजान का कत्ल करना चाहता है। आप बताएं कि मुझे फांसी होगी या बरी हो जाउंगा। सुमित्रा जब इसे पढ़ती हैतो उसे पता चलता है यह तो मेरी घर की बात हो रही है। वह माणक चंद को कहती है कि आप बरी होंगे। माणकचंद प्रेमजान का कत्ल कर देता है और इल्जाम चंन्द्रपाल पर लगा देता है। इसके बाद चंन्द्रपाल को फांसी हो जाती हैं।