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पंजाबः पॉजिटिव मरीज ने लगाई घर जाने की रट, पटियाला में हंगामा, मुक्तसर में उड़ी नियमों की धज्जियां

Mon, 11 May 2020 09:20 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला/नंगल/मुक्तसर/जालंधर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला/नंगल/मुक्तसर/जालंधर(पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 11 May 2020 09:20 PM IST
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Ruckus in Patiala and Nangal by People and migrant workers

अमृतसर। श्री गुरु नानक देव अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल पॉजिटिव मरीजों ने सोमवार को घर जाने की जिद पर हंगामा खड़ा कर दिया। इनमें से कई मरीजों ने धमकी दी कि यदि उन्हें जल्दी घर नहीं भेजा गया तो वह आइसोलेशन केंद्र से छलांग लगाकर जीवन लीला खत्म कर लेंगे। इस धमकी के बाद अस्पताल के प्रबंधकों ने आइसोलेशन वार्ड के बाहर और भीतर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और इसकी जानकारी जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को दी।

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गुस्साए मरीजों ने डॉक्टरों की टीम को टेस्ट देने से इंकार कर दिया। मरीज इस बात पर अड़े हुए थे कि उन्हें घर भेजा जाए। इन मरीजों ने दोपहर का खाना खाने से भी इंकार कर दिया था। समाचार लिखने तक मरीज भूख हड़ताल करने की तैयारी में थे। गुरुनानक देव अस्पताल के कार्डियो थ्रेसिस में स्थापित आइसोलेशन वार्ड में हजूर साहिब से आए 23 कोरोना पीड़ित मरीजों को रखा हुआ है।
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प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
कोविड पॉजिटिव मरीजों की संख्या ज्यादा सामने आने के बाद कंटोनमेंट एरिया घोषित पटियाला के बुक मार्केट इलाके के लोगों ने सोमवार को घरों से बाहर निकल कर गली के बाहर पुलिस बैरिकेड के पास आकर जमकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इन लोगों ने कहा कि आज तक न तो प्रशासन और न ही पार्षद ने उनकी सुध ली है। सारे बुक मार्केट एरिया को सील करने की बजाय केवल कोरोना पॉजिटिव मरीजों के घरों के आगे बैरिकेड लगाए जाएं, ताकि बाकी लोग अपने घरों के बाहर निकल सकें। 
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इन लोगों ने कहा कि जिस समय प्रशासन ने उनके इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाकर सील किया था, उस समय वादा किया गया था कि सारा सामान उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन उन्हें अब सामान नहीं मिल रहा है, जिससे वह परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके के कुछ लोग, जो रसूख रखते हैं, वह किताबें व कापियां बेचने का बिजनेस पहले की तरह कर्फ्यू में भी आराम से चला रहे हैं। 

उन्हें न तो पुलिस और न ही प्रशासन कुछ कह रहा है। लेकिन हम जैसे आम लोग घरों में बैठे हैं, जिस कारण उन्हें रोटी के भी लाले पड़े हैं। उनके घरों में राशन नहीं है। वह अपना कामकाज दोबारा शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि जिनके घरों में पॉजिटिव मरीज हैं, उनके घरों के आगे बैरिकेड लगा दिए जाएं और बाकी इलाके को खोल दिया जाए।

जालंधर: पुलिस नहीं खुलने देती बुक मार्केट

Ruckus in Patiala and Nangal by People and migrant workers
मुक्तसर में बिना मास्क डाकघर में काम करते कर्मचारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

हाल ही में जालंधर जिला प्रशासन ने बच्चों को किताबें व स्टेशनरी मुहैया करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन बिक्री व होम डिलीवरी की इजाजत दी थी। इजाजत के बावजूद दुकानदार लोगों तक किताबें पहुंचा नहीं पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जालंधर में जो सबसे बड़ी किताबों की मार्केट है, वह माईं हीरा गेट में है।

माईं हीरा गेट के साथ लगते मिठ्ठा बाजार को जिला प्रशासन ने रेड जोन में रखा है। अब मिठ्ठा बाजार रेड जोन में होने व किताब मार्केट, मिठ्ठा बाजार के बेहद करीब होने के कारण पुलिस का इस रोड पर हर पल पहरा रहता है। अगर कोई दुकानदार दुकान खोलता है तो पुलिस दुकान बंद करवा देती है।अब अगर दुकानदार दुकानें ही खोल नहीं पाएंगे तो किताबों की होम डिलीवरी कैसे कर पाएंगे। 

पुलिस प्रशासन दुकानदारों को मुहैया करवाएगा पास: दीपक जोशी
इस बारे में माईं हीरा गेट बुक मार्केट के प्रधान दीपक जोशी का कहना है उनकी पुलिस प्रशासन से बात हुई है। प्रशासन माईं हीरा गेट स्थित किताबों की दुकानें चलाने वाले दुकानदारों को कर्फ्यू पास मुहैया करवा रहा है। कुछ दुकानदारों के पास बन गए हैं व बाकी के भी जल्द ही बनकर आ जाएंगे। कर्फ्यू पास के बाद दुकानदार दुकान पर जाकर आर्डर के हिसाब से किताबें या स्टेशनरी लेकर सप्लाई कर सकते हैं। दुकान पर किताबें या अन्य सामान बेचने की इजाजत नहीं है। 

उधर माईं हीरा गेट में किरण बुक डिपों के मालिक किरण आनंद का कहना है कि अभी तक मुश्किल हो रही है। अगर कोई दुकानदार किताबें लेने दुकान पर आता है तो पुलिस दुकानें बंद करवा देती है। उसका दोपहिया वाहन कब्जे में ले लिया जाता है। पुलिस-प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से दुकानदारों के पास जारी करे ताकि दुकानदार बच्चों तक किताबें पहुंचा सकें। 

मुक्तसर डाकघर में उड़ रही नियमों की धज्जियां 

मुक्तसर के मुख्य डाकघर में कर्फ्यू और सामाजिक दूरी के नियमों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। डाकघर स्टाफ न तो सोशल डिस्टेंस का ध्यान रख रहा है और न ही पोस्ट मास्टर समेत अन्य मुलाजिमों ने मास्क लगाए हुए हैं। डाकघर में काम करवाने पहुंच रहे लोग भी परेशान हो रहे हैं। महिला व पुरुष रुपये जमा करवाने, निकलवाने, एफडी व अन्य कामों के संबंध सिर्फ एक ही लाइन लगे हैं। 

सोमवार को डाकघर के गेट पर सुबह से ही लंबी कतार लग गई। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा। यही नहीं वहां मौजूद पोस्टमास्टर बलबीर सिंह समेत कई मुलाजिमों ने मास्क तक नहीं लगाए हुए थे। सभी कामों के लिए एक ही लाइन लगी होने से लोग घंटों कतार में खड़े रहे। जब लोगों ने पोस्टमास्टर से कारण पूछा तो उनका जवाब था कि अभी बैंक से रुपये नहीं आए हैं। जब आएंगे तब दे सकेंगे। इस पर जब किसी उपभोक्ता ने कहा कि जो लोग रुपये जमा करवाने आएं हैं, उनके रुपये तो जमा कर सकते हो। 

इतने में पोस्टमास्टर भड़क गए और लोगों को डाकघर से बाहर निकालने की धमकियां देने लगे। इस पर हंगामा हो गया। अतिरिक्त चार्ज संभाले हुए पोस्टमास्टर बलबीर सिंह ने खुद मास्क न पहनने पर कहा कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ है, इसलिए वो मास्क नहीं पहन सकते। सरकार ने तीन लोगों के स्टाफ को काम करने के लिए कहा है लेकिन तीन लोग सारा काम कैसे संभाल सकते हैं।

नंगल: राशन ना मिलने से गुस्साए लोग, नारेबाजी की

हाईडल नहर के किनारे झुग्गियों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने नंगल नगर काउंसिल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने राशन न मिलने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पहले तो उन्हे एसडीएम कार्यालय में राशन देने के लिए बुलाया गया। बाद में बिना राशन दिए उन्हें वापस भेज दिया गया। गुस्साए लोगों ने मौके पर उपस्थित कुछ लोगों पर महिलाओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया। 

एसडीएम कार्यालय से वापस आकर इन गरीब प्रवासी मजदूरों ने अपनी बस्ती के समक्ष धरना देकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक थी। धरने की सूचना मिलते ही मौके पर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पवन चौधरी, सब इंसपेक्टर राहुल शर्मा के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने इन लोगों को समझा बुझाकर अपने-अपने घर भेजा।

वहीं नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी मनजिंदर सिंह का कहना है कि इन लोगों को राशन लेने के लिए बुलाया गया था। भीड़ ज्यादा होने के कारण उन्हें लौटा दिया गया। उन्होंने या किसी भी कर्मचारी ने महिलाओं से अभद्रता नहीं की। दूसरी तरफ थाना प्रभारी इंसपेक्टर पवन चौधरी का कहना है कि सूचना मिलते ही वह तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। चंद ही मिनटों में सभी गुस्साए लोगों को घर भेज दिया गया था। इन लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल की एसडीएम के साथ एक बैठक भी हुई। इसके बाद पूरा मामला शांत हो गया। 

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