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नहीं चाहती थी बेटी पहलवान बने, साक्षी ने रचा इतिहास तो क्या बोली मां?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:10 AM IST
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Sakshi Malik mother
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जिस बेटी को मां कभी पहलवान बनते नहीं देखना चाहती थी, आज उसी बेटी ने पहलवानी में इतिहास रच दिया। बेटी की जीत पर क्या बोली भावुक मां?
हमारी बेटी के साथ हर किसी की दुआ थी, इसलिए वह बहुत अच्छा खेली। वह डटकर खेलती रही और दो मैच जीत लिए।
क्वार्टर फाइनल में हार गई, लेकिन उससे कोई शिकायत नहीं है। इस तरह ही साक्षी को पहली बार अखाड़े में लेकर जाने वाली उसकी मां सुदेश ने अपने मन की बात कही। बेटी के क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद थोड़ी मायूसी जरूर दिखी। लेकिन साक्षी के प्रदर्शन से वह काफी संतुष्ट भी दिखी।
साक्षी के पिता बोले, ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाउंगा
उधर, जीत के बाद साक्षी के पिता सुखबीर मलिक ने कहा, "कुछ साल पहले केवल ड्रेस के लिए कुश्ती लड़ने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता। कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीता।
उन्होंने कहा कि यह उसका पहला ओलिंपिक है और उसने देश के लिए मेडल जीतकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मैं अपनी मन्नत के अनुसार ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाऊंगा। बेटी का मोखरा गांव से लेकर रोहतक सेक्टर 3 तक जोरदार स्वागत किया जाएगा।
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हमारी बेटी के साथ हर किसी की दुआ थी, इसलिए वह बहुत अच्छा खेली। वह डटकर खेलती रही और दो मैच जीत लिए।
क्वार्टर फाइनल में हार गई, लेकिन उससे कोई शिकायत नहीं है। इस तरह ही साक्षी को पहली बार अखाड़े में लेकर जाने वाली उसकी मां सुदेश ने अपने मन की बात कही। बेटी के क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद थोड़ी मायूसी जरूर दिखी। लेकिन साक्षी के प्रदर्शन से वह काफी संतुष्ट भी दिखी।
साक्षी के पिता बोले, ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाउंगा
उधर, जीत के बाद साक्षी के पिता सुखबीर मलिक ने कहा, "कुछ साल पहले केवल ड्रेस के लिए कुश्ती लड़ने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता। कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीता।
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उन्होंने कहा कि यह उसका पहला ओलिंपिक है और उसने देश के लिए मेडल जीतकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मैं अपनी मन्नत के अनुसार ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाऊंगा। बेटी का मोखरा गांव से लेकर रोहतक सेक्टर 3 तक जोरदार स्वागत किया जाएगा।
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परिवार के लोग थोड़े मायूस
Sakshi Malik family
सेक्टर तीन में पहलवान साक्षी मलिक के घर का बुधवार शाम के समय का नजारा कुछ अलग था। साक्षी के मैच से पहले ही उसे देखने की पूरी तैयारी की जा रही थी और आंगन में एलसीडी लगा दी गई थी। क्योंकि साक्षी को ओलंपिक में भिडंती देखने के लिए रिश्तेदार भी आए हुए थे। पूरी व्यवस्था करने के बाद परिवार के लोगों मां सुदेश, भाभी मोनिका, भाई सचिन के अलावा आए हुए रिश्तेदार साक्षी की मौसी कविता, बुआ राज सभी मैच देखने लगते है।
साक्षी को शुरूआत में कई झटके मिले और प्रतिद्वंदी पहलवान ने अंक झटक लिए तो परिवार के लोग थोड़े मायूस दिखे। लेकिन आखिरी समय में साक्षी ने जीत दर्ज की तो परिवार वाले खुशी से उछल पड़े। इसके बावजूद इंतजार बाकी था, क्योंकि साक्षी का दूसरा मैच भी तुरंत ही होना था।
ये भी पढ़ें: भगवान 'साक्षी' है, जब कोई न चले तो बेटियां हीं 'मालिक', देखिए 10 अनकहीं बातें
दूसरे मैच के शुरू होते ही फिर सभी परिवार वाले देखने लगे, लेकिन एक बार साक्षी हार की ओर जाने लगी और उसने चंद सेकेंड में मैच को पलट दिया। इस तरह साक्षी क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई और परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन जब रसिया की पहलवान के सामने वह क्वार्टर फाइनल में उतरी तो फिर पहले दो मैचों की तरह ही स्थिति होती दिखी। साक्षी ने आखिरी मिनटों में तीन अंक जुटाए, लेकिन इस बार आखिरी सेकेंड उसपर भारी पड़ गए।
साक्षी को शुरूआत में कई झटके मिले और प्रतिद्वंदी पहलवान ने अंक झटक लिए तो परिवार के लोग थोड़े मायूस दिखे। लेकिन आखिरी समय में साक्षी ने जीत दर्ज की तो परिवार वाले खुशी से उछल पड़े। इसके बावजूद इंतजार बाकी था, क्योंकि साक्षी का दूसरा मैच भी तुरंत ही होना था।
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दूसरे मैच के शुरू होते ही फिर सभी परिवार वाले देखने लगे, लेकिन एक बार साक्षी हार की ओर जाने लगी और उसने चंद सेकेंड में मैच को पलट दिया। इस तरह साक्षी क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई और परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन जब रसिया की पहलवान के सामने वह क्वार्टर फाइनल में उतरी तो फिर पहले दो मैचों की तरह ही स्थिति होती दिखी। साक्षी ने आखिरी मिनटों में तीन अंक जुटाए, लेकिन इस बार आखिरी सेकेंड उसपर भारी पड़ गए।
हर किसी की दुआ का असर
sakshi malik mother
क्वार्टर फाइनल में साक्षी की हार से थोड़ी मायूसी घर वालों को जरूर मिली, लेकिन उनको अपनी बेटी पर गर्व है कि वह हिम्मत के साथ डटकर खेली। साक्षी की मां सुदेश कहती है कि यह हर किसी की दुआ का असर है कि साक्षी ने किसी भी मैच में हिम्मत नहीं हारी और वह डटकर खेलती रही। अपने डटकर खेलने के कारण ही वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंची और वह आगे भी ऐसे ही डटकर खेलती रहेगी।
विनेश को चोट ना लगती तो मेडल जरूर जीत जाती
वहां केवल साक्षी का मैच ही नहीं देखा गया, बल्कि विनेश का मैच भी परिजन देखते रहे। क्योंकि साक्षी के बाद ही विनेश का मैच शुरू होता था। विनेश की जीत पर भी परिवार वाले काफी खुश होते थे। लेकिन उनको तब बड़ी मायूसी हुई, जबकि उसको चोट लग गई। परिवार वालों ने कहा कि विनेश को चोट नहीं लगती तो वह मेडल जरूर जीतकर लाती।
हर मुकाबले में दादा.दादी का नाम लेकर उतरती है साक्षी
जब भी पहलवान साक्षी मलिक का मुकाबला होता है तो वह अपने दादा.दादी चंद्रावली व बदलूराम का नाम लेकर मैदान में उतरती है। बुधवार को भी मुकाबला था तो मां ने खास हिदायत दी थी कि तेरे वही भगवान हैं। मां से फोन पर जब साक्षी ने बात की थी तो उसने दिली तमन्ना जाहिर करते हुए कहा कि मैं दादा.दादी को आज मिस कर रही हूंए लेकिन यह भी कहा कि मैं मैदान में उन्हीं का नाम लेकर उतरूंगी।
विनेश को चोट ना लगती तो मेडल जरूर जीत जाती
वहां केवल साक्षी का मैच ही नहीं देखा गया, बल्कि विनेश का मैच भी परिजन देखते रहे। क्योंकि साक्षी के बाद ही विनेश का मैच शुरू होता था। विनेश की जीत पर भी परिवार वाले काफी खुश होते थे। लेकिन उनको तब बड़ी मायूसी हुई, जबकि उसको चोट लग गई। परिवार वालों ने कहा कि विनेश को चोट नहीं लगती तो वह मेडल जरूर जीतकर लाती।
हर मुकाबले में दादा.दादी का नाम लेकर उतरती है साक्षी
जब भी पहलवान साक्षी मलिक का मुकाबला होता है तो वह अपने दादा.दादी चंद्रावली व बदलूराम का नाम लेकर मैदान में उतरती है। बुधवार को भी मुकाबला था तो मां ने खास हिदायत दी थी कि तेरे वही भगवान हैं। मां से फोन पर जब साक्षी ने बात की थी तो उसने दिली तमन्ना जाहिर करते हुए कहा कि मैं दादा.दादी को आज मिस कर रही हूंए लेकिन यह भी कहा कि मैं मैदान में उन्हीं का नाम लेकर उतरूंगी।