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बजट सत्र : पंजाब विधानसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित, कैप्टन ने केंद्र से पूछे 10 सवाल

Sat, 06 Mar 2021 12:36 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 06 Mar 2021 12:36 AM IST
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Resolution passed against farm laws in Punjab Assembly during budget session
कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : @capt_amarinder

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को विधानसभा में कृषि कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव लाते हुए विधानसभा में एलान किया कि इनको मंजूर नहीं किया जा सकता और इन्हें किसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए ज्यों का त्यों नहीं रखा जा सकता। ये न सिर्फ सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के खिलाफ हैं बल्कि इनका उद्देश्य स्पष्ट तौर पर निरर्थक है। यह प्रस्ताव सदन में उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया।

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मुख्यमंत्री ने केंद्र से तीनों कृषि कानून बिना शर्त वापस लेने की मांग की। उन्होंने कृषि कानूनों के पीछे केंद्र की मंशा को बेनकाब करने के लिए राष्ट्र से 10 सवाल पूछते हुए कहा कि इन कानूनों को किसान और राज्य किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं करते। उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की है कि सुखद हल के लिए आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले और नोटिस वापस लिए जाएं। उन्होंने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) आधारित अनाज की सरकारी खरीद की मौजूदा प्रणाली को जारी रखी जाए।
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कैप्टन ने प्रस्ताव को विधानसभा में पेश करते हुए कहा कि शायद इन कानूनों का उद्देश्य किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा करना था लेकिन ऐसा नहीं लगता। किसान इन को अपनी रोजी रोटी के लिए खतरा मानते हैं और इसके चलते उन्होंने इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष शुरू कर दिया और इनको वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा में पास बिलों को अभी तक राष्ट्रपति ने सहमति नहीं दी जोकि भारतीय संविधान के आर्टिकल 254 (2) लागू करने के लिए जरूरी है।

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कैप्टन ने पूछे ये 10 सवाल

  • पूरी तरह अनियमित प्राइवेट मंडियों का लाभ किसे होगा?
  • प्राइवेट मंडियों में मंडी फीस, सेस और टैक्सों की 100 प्रतिशत माफी का लाभ किसे होगा?
  • सरकारी अधिकारियों को प्राइवेट मंडी में किसानों को एमएसपी की पेशकश से रोकने का लाभ किसे होगा?
  • जब हम आढ़ती सिस्टम को खत्म कर रहे हैं तो इसका लाभ किसे होगा क्योंकि कानून के मुताबिक आढ़ती सरकार द्वारा तय कीमतों के अनुसार फसल की सफाई, फसल को उतारने, भराई करने और थैलों की सिलाई समेत मंडियों में सेवा प्रदान करने के लिए पाबंद हैं।
  • इस समय पर मंडी फीस की अदायगी खरीददार द्वारा किया जाना लाजिमी है तो जब किसानों से यह वसूलियां करने की आजादी से मंडियों को अनियमित कर दिया गया है। अब इसका लाभ किसे होगा?
  • जब प्राइवेट मंडियों को मंडी में किसी भी गतिविधि के लिए सर्विस चार्ज तय करने की आजादी दे दी गई तो इसका लाभ किसे होगा?
  • जब किसानों को कॉरपोरेटों से समझौता कर लेने से संबंधित किसी भी विवाद के लिए सिविल अदालत तक जाने से रोक दिया गया तो इसका लाभ किसे होगा?
  • जब किसान और कॉरपोरेट के बीच किसी भी विवाद में दखल देने के लिए सरकार को अयोग्य ठहरा दिया गया है तो इसका लाभ किसे होगा?
  • जब प्राइवेट व्यक्तियों/कॉरपोरेटों की तरफ से अनाज भंडार करने की सीमा खत्म कर दी गई है तो इसका लाभ किसे होगा?
  • जब बीज और खादों की तय शर्तों को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया गया है और सरकार को इसके किसी भी पैमाने को तय करने से अयोग्य ठहरा दिया गया है तो इस का लाभ किसे होगा?

यह प्रस्ताव किया गया पारित

सदन अफसोस जाहिर करता है कि भारत सरकार ने नए कृषि कानूनों ‘किसानी फसल व्यापार और वाणिज्य (उत्साहित करने और आसान बनाने) एक्ट’ 2020, ‘जरूरी वस्तुएं (संशोधन) एक्ट’ 2020 और ‘किसानों के (सशक्तीकरण और सुरक्षा) कीमतों के भरोसे और खेती सेवाओं संबंधी करार एक्ट’ 2020 के विरुद्ध किसान आंदोलन से पैदा हुए मौजूदा संकट को न तो हल किया है और न ही भारत के राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान की धारा 254 (2) के अंतर्गत 20 अक्तूबर, 2020 को पास संशोधन बिलों, किसान फसल, व्यापार और वाणिज्य (उत्साहित करने और आसान बनाने) (विशेष उपबंध और पंजाब संशोधन) बिल -2020, ‘किसानों के (सशक्तीकरण और सुरक्षा) कीमत के भरोसो संबंधी करार और खेती सेवाओं (विशेष उपबंध और पंजाब संशोधन) बिल-2020 और जरूरी वस्तुएं (विशेष व्यवस्थाएं और पंजाब संशोधन) बिल-2020 और ‘दा कोड आफ सिविल प्रोसीजर (पंजाब संशोधन) बिल-2020 को सहमति दी है।

इस निष्पक्ष और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है और किसानों में बेचैनी और गुस्सा बढ़ा है जो नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में न सिर्फ बड़ी संख्या में किसानों और खेत कामगारों का जीवनयापन बुरी तरह प्रभावित हुआ है बल्कि राज्य में कारोबार, व्यापार और उद्योग को भी बड़े घाटे का सामना करना पड़ा है। 

यहां तक कि अब तक 125 किसानों और खेत कामगारों की जानें भी चलीं गई। भारत सरकार के इस पक्षपाती और अनुचित रवैये के नतीजे के तौर पर किसान इन नए कानूनों को रद्द करने की मांग पर डटे हैं। सदन यह प्रस्ताव करता हुआ, एक बार फिर भारत सरकार को किसानों और राज्य के बड़े हितों के मद्देनजर बिना शर्त यह कानून वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आधारित अनाज की खरीद की मौजूदा प्रणाली को जारी रखने की अपील करता है।

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