फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Reply summoned from former director of Rohtak PGI regarding delay in issue of death certificate

हरियाणा: मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी पर रोहतक पीजीआई के पूर्व निदेशक से जवाब तलब, पांच डॉक्टरों को नोटिस

Tue, 26 Oct 2021 07:43 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 26 Oct 2021 07:43 PM IST
सार

हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। मृत्यु प्रमाण पत्र न जारी करने के मामले में पीजीआई रोहतक के पूर्व निदेशक से आयोग ने जवाब तलब कर लिया है। वहीं पांच डॉक्टरों को भी नोटिस भेजा जाएगा। मामले में लापरवाह अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को भी आयोग नोटिस भेजेगा। 

विज्ञापन
Reply summoned from former director of Rohtak PGI regarding delay in issue of death certificate
पीजीआई रोहतक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने निर्धारित समय में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी न करने से जुड़े मामले में गलतबयानी पर पीजीआई रोहतक के पूर्व निदेशक डॉ. रोहतास यादव से जवाब मांगा है। साथ में पांच डॉक्टरों को स्वत: संज्ञान नोटिस भेजा है। आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने कहा कि केस में जिन-जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही पाई जाएगी, उन्हें नोटिस देंगे। 

विज्ञापन


यह जीवित व्यक्तियों की मानवीय संवेदनाओं के मृत होने का जीवंत उदाहरण है। फाइलों को लंबित रखने के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार डॉक्टर अजय, अंजलि, पेमा, साक्षी और अमरनाथ को अभी नोटिस भेजे हैं। इनकी मेल आईडी और मोबाइल नंबर मांगे हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी नोटिस जारी किए जाएंगे।
विज्ञापन


आयोग ने पूछा है, क्यों न उन पर सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के अनुसार समय पर सेवा न देने के लिए उन पर 20-20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए। इसके अलावा मृत्यु प्रमाण पत्र के 125 लंबित मामलों के बारे में जानकारी मांगी है कि वे डीसी या सिविल सर्जन कार्यालय को किस तारीख को भेजे थे। डीसी और सिविल सर्जन को इसकी पुष्टि करने के लिए कहा गया है कि क्या ये मामले उनके कार्यालयों में प्राप्त हुए और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


86 मामलों में अभी प्रमाण पत्र जारी नहीं
मीनाक्षी राज ने बताया कि गत 24 अक्तूबर को संस्थान के निदेशक ने स्वीकार किया है कि 125 मामलों में से 86 मामलों में अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं। यह पीजीआई के पूर्व निदेशक डॉ. रोहतास यादव के 11 अक्तूबर को आयोग के समक्ष दिए बयान के एकदम विपरीत है। उन्होंने कहा था कि संस्थान में प्रमाण पत्रों का कोई मामला लंबित नहीं है। तथ्यों को सत्यापित करने के लिए, पीजीआई की वर्तमान निदेशक डॉ. गीता के साथ टेलीफोन पर बात की गई। उन्होंने 24 अक्तूबर को भेजी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मृत्यु से संबंधित जिन 125 फाइलों के पंजीकरण में देरी हुई, उनमें से 107 फाइलें कोविड-19 अवधि की हैं। गैर-कोविड अवधि के 18 मामलों में से ज्यादातर 2019 के हैं, जिनमें देरी हर स्तर पर व्यवस्थित जांच की विफलता के कारण हुई।


पांच डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट धोखा देने वाली 
मीनाक्षी राज ने बताया कि 24 अक्तूबर के पत्र के साथ संलग्न पांच डॉक्टरों की हस्ताक्षरित जांच रिपोर्ट धोखा देने के अलावा और कुछ नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2019 में हुई मृत्यु के मामलों में दो साल के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए। इन 17 मामलों में से 6 में आयोग के हस्तक्षेप के बाद बीते 10 सितंबर को दो साल से भी अधिक समय के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। 11 मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र आज भी लंबित हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed