दूत के साथ अब सारथी और ड्रोन करेंगे कोरोना मरीजों की सेवा, हर बेड तक पहुंचाएंगे दवा और खाना
- पीजीआई ने कोरोना के मरीजों के लिए रिमोट ट्रॉली और ड्रोन लांच
- पॉजिटिव मरीजों तक दवा, खाना पहुंचाने में किया जाएगा इस्तेमाल
- पीजीआई डॉक्टरों ने रोपड़ आईआईटी के विशेषज्ञों के साथ किया तैयार
विस्तार
पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने में दूत रिमोट ट्रॉली के साथ ही अब सारथी ट्रॉली और ड्रोन मददगार साबित होंगे। पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने रोपड़ आईआईटी के विशेषज्ञों के साथ मिलकर विशेष प्रकार की ट्रॉली और ड्रोन को तैयार किया है।
सारथी ट्रॉली की मदद से रिमोट कंट्रोल के जरिए मरीजों तक दवा, भोजन और अन्य जरूरी चीजें पहुंचाई जा सकेंगी। वहीं, ड्रोन के माध्यम से 3 किलो तक के वजन का सामान 3 किलोमीटर तक के दायरे में बिना किसी व्यक्ति की मदद के पहुंचाया जा सकेगा। पीजीआई डायरेक्टर डॉ. जगतराम ने रोपड़ आईआईटी के डायरेक्टर एसके दास की उपस्थिति में अपनी टीम के साथ बुधवार को इन दोनों उपकरणों को लांच किया।
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डॉ. जगतराम ने बताया कि कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। उन्हें मरीजों के इलाज के दौरान उनके पास जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ड्रोन और रिमोट कंट्रोल से चलने वाली ट्रॉली सारथी की मदद ली जाएगी। ट्राली में मरीज के वार्ड और उसके बेड नंबर की संख्या को फीड करना होगा, जिसके बाद वह सामान और अन्य चीजें मरीज तक पहुंचा देगी।
इसे कैमरे की मदद से ट्रैक किया जा सकता है। वहीं, ड्रोन की मदद से तीन किलो तक का सामान तीन किलोमीटर तक की रेंज में भेजा जा सकता है। इन दोनों उपकरणों की मदद से जहां एक तरफ संक्रमण से बचाव में मदद मिलेगी, वहीं कम मानव संसाधन के उपयोग से ज्यादा काम किया जा सकेगा।
पीजीआई डीन एकेडमी डॉ. जीडी पुरी ने बताया कि इन दोनों उपकरणों को बनाने में पीजीआई की टीम ने उनके नेतृत्व में रोपड़ आईआईटी के डॉ. रोहित शर्मा के साथ मिलकर काम किया है। पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि मरीजों के इलाज के साथ पीजीआई के डॉक्टर अपनी टीम को संक्रमण से बचाने और मजबूती देने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में दूत के बाद अब सारथी और ड्रोन बनाने में सफलता मिली है। आगे यह क्रम चलता रहेगा।