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Chandigarh News: पुलिस भर्ती धांधली में पूर्व डीएसपी जगबीर सिंह व इंस्पेक्टर नसीब सिंह को राहत
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चंडीगढ़। साल 2011 में यूटी पुलिस विभाग में पानी पिलाने वालों की भर्ती में धांधली करने वाले डीएसपी जगबीर सिंह और मौजूदा इंस्पेक्टर नसीब सिंह को जिला अदालत से जमानत मिल गई है। इन दोनों ने जमानत अर्जी में खुद को बेकसूर बताया था। विजिलेंस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में साल 2016 में पू्र्व डीएसपी जगबीर सिंह, पूर्व डीआईजी आरएस घुम्मन और इंस्पेक्टर नसीब सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पूर्व डीआईजी घुम्मन की मौत हो चुकी है।
क्या था मामला
साल 2011 में आईआरबी (भारतीय रिजर्व बटालियन) में 64 ग्रुप डी कर्मचारियों की भर्तियां हुई थी। इनमें 11 पानी पिलाने वालों की भी भर्तियां हुई थीं। जांच में कमेटी ने पाया था कि इन कर्मचारियों की मार्कशीट के साथ छेड़छाड़ हुई है। बाद में विभाग ने 2014 में ये भर्तियां रद्द भी कर दी गई थीं। साल 2015 में कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कुछ उम्मीदवारों ने टेस्ट पास नहीं किया था, जबकि उनके अंक बढ़ा दिए गए थे। दो उम्मीदवार बिना लिखित परीक्षा के चयनित हुए थे। वहीं, करीब 70 के करीब जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की थी लेकिन उनको इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। इसके साथ दस उम्मीदवारों के अंकों में छेड़छाड़ हुई ताकि उन्हें इंटरव्यू के लिए योग्य ठहराया जा सके। इसके साथ 9 उम्मीदवारों के अंक बढ़ाए गए थे। भर्ती प्रक्रिया में खामियों की शिकायत मिलने के आधार पर विभाग की तरफ से इस भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। रिपोर्ट मई 2016 में चीफ विजिलेंस ऑफिसर को सौंपी गई थी ताकि जांच हो सके। विजिलेंस ने अपनी सिफारिश में संबंधित पदों की चयन कमेटी मेंबर्स पर केस दर्ज की सिफारिश की थी, जिसके बाद तीनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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क्या था मामला
साल 2011 में आईआरबी (भारतीय रिजर्व बटालियन) में 64 ग्रुप डी कर्मचारियों की भर्तियां हुई थी। इनमें 11 पानी पिलाने वालों की भी भर्तियां हुई थीं। जांच में कमेटी ने पाया था कि इन कर्मचारियों की मार्कशीट के साथ छेड़छाड़ हुई है। बाद में विभाग ने 2014 में ये भर्तियां रद्द भी कर दी गई थीं। साल 2015 में कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कुछ उम्मीदवारों ने टेस्ट पास नहीं किया था, जबकि उनके अंक बढ़ा दिए गए थे। दो उम्मीदवार बिना लिखित परीक्षा के चयनित हुए थे। वहीं, करीब 70 के करीब जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की थी लेकिन उनको इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। इसके साथ दस उम्मीदवारों के अंकों में छेड़छाड़ हुई ताकि उन्हें इंटरव्यू के लिए योग्य ठहराया जा सके। इसके साथ 9 उम्मीदवारों के अंक बढ़ाए गए थे। भर्ती प्रक्रिया में खामियों की शिकायत मिलने के आधार पर विभाग की तरफ से इस भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। रिपोर्ट मई 2016 में चीफ विजिलेंस ऑफिसर को सौंपी गई थी ताकि जांच हो सके। विजिलेंस ने अपनी सिफारिश में संबंधित पदों की चयन कमेटी मेंबर्स पर केस दर्ज की सिफारिश की थी, जिसके बाद तीनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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