बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी
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केंद्र शासित प्रदेशों के लिए गठित ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) ने शहर के लोगों को दोहरी राहत दे दी है। इससे अब बिजली का अगला बिल कम आएगा।
यूटी प्रशासन के बिजली विभाग की ओर से जेईआरसी के समक्ष शहर के उपभोक्ताओं से एफएफपीसीए चार्जेस लेने से संबंधित पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी, जिसे जेईआरसी ने नामंजूर कर दिया। इससे पहले जेईआरसी ने बिजली के रेट बढ़ाने संबंधी प्रशासन की पुनर्विचार याचिका को भी नामंजूर कर दिया था।
चार बार लिए जाते थे एफएफपीसीए चार्जेस
पिछले वित्तीय वर्ष तक 500 से 800 रुपये एफएफपीसीए चार्जेस देने पड़ते थे। बिजली विभाग लोगों से साल में चार बार एफएफपीसीए चार्जेस लेता था। इससे बिजली का बिल बढ़ जाता था, लेकिन जेईआरसी प्रशासन के तर्क से सहमत नहीं हुआ और पुनर्विचार याचिका में प्रशासन के आग्रह को मानने से मना कर दिया।
जेईआरसी ने ही दो साल पहले आदेश जारी कर फ्यूल एंड पावर प्राक्योरमेंट कॉस्ट वेरिएशन निर्धारित करने के लिए चंडीगढ़ के बिजली विभाग को अधिकृत कर दिया था। इसके बाद बिजली विभाग की ओर से फ्यूल एंड पावर प्राक्योरमेंट कॉस्ट एडजस्टमेंट फार्मूला तैयार कर उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली राशि हर तीन माह बाद निकाली जाती थी।
पहली तिमाही (अप्रैल से जून) की तुलना में असकर दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) तक बिजली विभाग को ज्यादा महंगी बिजली खरीदनी पड़ती थी जिससे दूसरी तिमाही में एफएफपीसीए चार्जेस ज्यादा होते थे।
बिजली के रेट में बढ़ोतरी भी नामंजूर की थी
बिजली विभाग ने जेईआरसी के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी जिसके तहत जेईआरसी ने न सिर्फ बिजली विभाग द्वारा बिजली के रेट में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था, बल्कि एफएफपीसीए चार्जेस उपभोक्ताओं से न वसूलने को कहा था।
जेईआरसी के आदेश पर अब प्रशासन को उपभोक्ताओं को उनकी सिक्योरिटी राशि पर ब्याज भी देना होगा। जेईआरसी ने ब्याज न देने के प्रशासन के आग्रह को भी अस्वीकार कर दिया है।