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Stubble Management: पराली प्रबंधन के लिए छोटे किसानों को मिले विशेष प्रोत्साहन, पीएयू ने की सिफारिश

Sun, 13 Nov 2022 02:08 PM IST
निवेदिता वर्मा पीटीआई, चंडीगढ़
पीटीआई, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 13 Nov 2022 02:08 PM IST
सार

पंजाब में सालाना करीब 180 लाख टन पराली पैदा होती है। अध्ययन के मुताबिक, 90 फीसदी किसान इस बात से वाकिफ थे कि धान की पराली जलाने से हवा की गुणवत्ता खराब होती है और धुंध बढ़ती है।

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Recommendation Special Incentives for small farmers to scale up stubble management in punjab
पराली जलाना

विस्तार

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने एक नए अध्ययन में छोटे किसानों के लिए पराली प्रबंधन उपायों को अपनाने के लिए विशेष प्रोत्साहन और कम अवधि की फसल किस्मों के तहत क्षेत्र में वृद्धि जैसी कुछ प्रमुख सिफारिशें की हैं। अध्ययन में पाया गया कि किसानों का मानना था कि पराली प्रबंधन को अपनाने से उनका वित्तीय बोझ बढ़ जाता है, और उनमें से कई इस बात से भी अनजान थे कि पराली प्रबंधन से उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का उपयोग कम हो जाता है।
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लुधियाना स्थित पीएयू के अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र विभाग ने पंजाब में पराली प्रबंधन के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना का प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन किया। पीएयू के प्रधान अर्थशास्त्री संजय कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साल मार्च में अध्ययन करने को कहा था। कुमार ने कहा कि राज्य के कृषि विभाग द्वारा करवाए गए इस अध्ययन में राज्य के 22 जिलों के 110 गांवों को शामिल किया गया है। अध्ययन में 2,160 किसानों का चयन किया गया, जिनमें धान की पराली प्रबंधन हस्तक्षेपों को अपनाने वाले 1,320 किसान शामिल थे। 
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हर साल अक्तूबर और नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के पीछे पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना एक कारण है। चूंकि धान की फसल के बाद रबी फसल गेहूं के लिए समय बहुत कम होता है, तो किसान फसल अवशेषों को जल्दी से साफ करने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं।
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पंजाब में सालाना करीब 180 लाख टन पराली पैदा होती है। अध्ययन के मुताबिक, 90 फीसदी किसान इस बात से वाकिफ थे कि धान की पराली जलाने से हवा की गुणवत्ता खराब होती है और धुंध बढ़ती है। ज्यादातर किसान (84-92 प्रतिशत) इस बात से सहमत हैं कि धान की पराली जलाने से सांस की समस्या और आंखों में जलन होती है और इससे बीमार लोगों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को परेशानी होती है।


अधिकांश किसानों ने पाया कि फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के उपयोग से उनके वित्तीय बोझ में वृद्धि हुई है। लगभग सभी किसानों का मानना है कि धान पराली प्रबंधन को अपनाने से वित्तीय बोझ बढ़ता है क्योंकि मशीनरी का किराया अधिक होता है।  
 
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