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भाजपा में बगावत बढ़ी, ओबीसी मोर्चा ने किया चुनाव का बहिष्कार
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चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी में टिकट बंटवारे के बाद पैदा हुआ असंतोष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी के ओबीसी मोर्चा ने चुनाव का ही बहिष्कार कर दिया है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पार्टी ने पूरे ओबीसी समाज को अंधेरे में रखा।
ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एनआर मेहरा की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक बैठक हुई। इसमें ओबीसी मोर्चा के एक भी पदाधिकारी व कार्यकर्ता को टिकट नहीं देने पर रोष व्यक्त किया गया। प्रदेश महासचिव ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि 35 सीटों में से सिर्फ पांच सीटें ओबीसी समाज को देने के लिए पांच व्यक्तियों की ओर से आवेदन किया गया था। इसमें से किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दी गई और पूरे ओबीसी समाज को अंधेरे में रखा गया। प्रदेश सचिव संजीव वर्मा ने कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से पार्टी में विभिन्न पदों पर रहकर सक्रियता से काम कर रहे हैं। पार्टी की ओर से टिकट के दावेदारों को आखिर समय तक अंधेरे में रखा गया। इस दौरान पार्टी को अल्टीमेटम दिया गया कि यदि ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों को टिकट नहीं मिली तो वह इस चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बैठक में भरत यादव, राजेंद्र कुमार, भूलाए राय, सुभाष कश्यप, राकेश कन्नौजिया, राजेंद्र सिंह बिल्लू, कुलवंत सिंह, अवतार सिंह, सोहन, सुरजीत सैनी आदि उपस्थित रहे।
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ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एनआर मेहरा की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक बैठक हुई। इसमें ओबीसी मोर्चा के एक भी पदाधिकारी व कार्यकर्ता को टिकट नहीं देने पर रोष व्यक्त किया गया। प्रदेश महासचिव ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि 35 सीटों में से सिर्फ पांच सीटें ओबीसी समाज को देने के लिए पांच व्यक्तियों की ओर से आवेदन किया गया था। इसमें से किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दी गई और पूरे ओबीसी समाज को अंधेरे में रखा गया। प्रदेश सचिव संजीव वर्मा ने कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से पार्टी में विभिन्न पदों पर रहकर सक्रियता से काम कर रहे हैं। पार्टी की ओर से टिकट के दावेदारों को आखिर समय तक अंधेरे में रखा गया। इस दौरान पार्टी को अल्टीमेटम दिया गया कि यदि ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों को टिकट नहीं मिली तो वह इस चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बैठक में भरत यादव, राजेंद्र कुमार, भूलाए राय, सुभाष कश्यप, राकेश कन्नौजिया, राजेंद्र सिंह बिल्लू, कुलवंत सिंह, अवतार सिंह, सोहन, सुरजीत सैनी आदि उपस्थित रहे।
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