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कोरोना कमांडोः सफाई कर्मी का जज्बा- लोगों की सुरक्षा के लिए जान तक कुर्बान करने को तैयार
Fri, 29 May 2020 12:06 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2020 12:06 PM IST
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कोरोना कमांडो सफाई कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना से बचाव के लिए लोग खुद को घरों में बंद कर सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन कर रहे हैं। मास्क और सैनिटाइजर से हर पल ख़ुद को संक्रमण मुक्त कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना 24 घंटे कोरोना के मरीजों के बीच रहकर ड्यूटी कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, उन मरीजों के बीच जान जोखिम में डालकर गंदगी और संक्रमित चीजों को साफ करने में जुटे हुए हैं, ताकि मरीजों के साथ ही अस्पताल के डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को संक्रमण से बचाया जा सके। ऐसे ही एक सफाई कर्मचारी हैं जीएमएसएच-16 में तैनात आशीष। आशीष अपने घर-परिवार से दूर रहकर जान की परवाह किए बिना शहर को कोरोना मुक्त बनाने के लिए ईमानदारी से फर्ज निभाने में जुटे हुए हैं।
पांच महीने के बेटे को किया खुद से दूर
आशीष के घर में उनकी पत्नी मनतरेस और 5 महीने का बेटा दिवांश है। आशीष ड्यूटी के कारण लगातार कई-कई दिन तक घर नहीं आते। संक्रमण के डर से उन्हें एक या दो दिन की छुट्टी दी जाती है। उस दौरान भी वह घर आने पर अपने बच्चे और पत्नी से दूरी बनाए रखते हैं, ताकि उन्हें संक्रमण के खतरे से मुक्त रखा जाए। आशीष ने बताया कि दिवांश को पिछले ढाई महीने से ठीक से गोद में लेकर खिलाया नहीं है। हॉस्पिटल से घर आने के बाद उसे गोद लेने में डर लगता है।
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बस उसे दूर से ही देखकर दुलार कर लेता हूं। वह मेरी गोद में आने के लिए रोता है, लेकिन मैं उसके पास जाने की गलती नहीं करता। आशीष का कहना है कि परिवार और बच्चे की जिम्मेदारी तो मेरी है ही साथ ही अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखने के अपने फर्ज से भी मैं पीछे नहीं हट सकता। इसलिए मैं अपनी सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए ईमानदारी से कोरोना वार्ड व अस्पताल के अन्य स्थानों की शत प्रतिशत साफ-सफाई करता हूं।
ये छुट्टी मनाने का समय नहीं
आशीष ने बताया कि लगातार ढाई महीने से ड्यूटी करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कई बार छुट्टी लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। आशीष का कहना है कि अगर हम काम करने में सक्षम है तो यह समय डटकर पूरी मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी पूरा करने का है न कि कमजोर की तरह घर में बैठे रहने का।
आशीष का कहना है कि एक बार कोरोना पर जीत दर्ज हो जाए फिर छुट्टी भी लेंगे और घर परिवार वालों के साथ जमकर खुशियां भी मनाएंगे, लेकिन यह वक्त अपनी खुशियों को दरकिनार कर अपने शहर और देश के लिए कुर्बान होने का है, इसलिए वह भी पीछे नहीं हट सकते।
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इतना ही नहीं, उन मरीजों के बीच जान जोखिम में डालकर गंदगी और संक्रमित चीजों को साफ करने में जुटे हुए हैं, ताकि मरीजों के साथ ही अस्पताल के डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को संक्रमण से बचाया जा सके। ऐसे ही एक सफाई कर्मचारी हैं जीएमएसएच-16 में तैनात आशीष। आशीष अपने घर-परिवार से दूर रहकर जान की परवाह किए बिना शहर को कोरोना मुक्त बनाने के लिए ईमानदारी से फर्ज निभाने में जुटे हुए हैं।
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पांच महीने के बेटे को किया खुद से दूर
आशीष के घर में उनकी पत्नी मनतरेस और 5 महीने का बेटा दिवांश है। आशीष ड्यूटी के कारण लगातार कई-कई दिन तक घर नहीं आते। संक्रमण के डर से उन्हें एक या दो दिन की छुट्टी दी जाती है। उस दौरान भी वह घर आने पर अपने बच्चे और पत्नी से दूरी बनाए रखते हैं, ताकि उन्हें संक्रमण के खतरे से मुक्त रखा जाए। आशीष ने बताया कि दिवांश को पिछले ढाई महीने से ठीक से गोद में लेकर खिलाया नहीं है। हॉस्पिटल से घर आने के बाद उसे गोद लेने में डर लगता है।
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बस उसे दूर से ही देखकर दुलार कर लेता हूं। वह मेरी गोद में आने के लिए रोता है, लेकिन मैं उसके पास जाने की गलती नहीं करता। आशीष का कहना है कि परिवार और बच्चे की जिम्मेदारी तो मेरी है ही साथ ही अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखने के अपने फर्ज से भी मैं पीछे नहीं हट सकता। इसलिए मैं अपनी सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए ईमानदारी से कोरोना वार्ड व अस्पताल के अन्य स्थानों की शत प्रतिशत साफ-सफाई करता हूं।
ये छुट्टी मनाने का समय नहीं
आशीष ने बताया कि लगातार ढाई महीने से ड्यूटी करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कई बार छुट्टी लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। आशीष का कहना है कि अगर हम काम करने में सक्षम है तो यह समय डटकर पूरी मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी पूरा करने का है न कि कमजोर की तरह घर में बैठे रहने का।
आशीष का कहना है कि एक बार कोरोना पर जीत दर्ज हो जाए फिर छुट्टी भी लेंगे और घर परिवार वालों के साथ जमकर खुशियां भी मनाएंगे, लेकिन यह वक्त अपनी खुशियों को दरकिनार कर अपने शहर और देश के लिए कुर्बान होने का है, इसलिए वह भी पीछे नहीं हट सकते।