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पंजाब का धान चीका मंडी में बिकने पर भड़के किसान
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल
Updated Fri, 26 Sep 2014 12:19 AM IST
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गुहला-चीका। अनाज मंडी में पंजाब से आई धान की बिक्री के विरोध में किसान भड़क उठे। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष पाला राम गौड़ की अगुवाई में किसानों ने कैथल-पटियाला मार्ग पर जाम लगा दिया तथा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
तीन घंटे तक लगे जाम के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करन पड़ा तथा वाहनों को दूसरे रास्तों से निकालना पड़ा। एसएचओ के समझाए जाने के बाद किसानों ने जाम खोला।
जाम के दौरान किसान नेता पाला राम गौड़ ने कहा कि चीका मंडी में पंजाब से लाए जा रहे धान की बिक्री हो रही है। इस कारण गुहला क्षेत्र किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और सरकार तथा प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे है। गौड़ ने कहा कि पंजाब से आने वाले धान को रोकने के बारे में उन्होंने पहले ही प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था, लेकिन प्रशासन ने जान-बुझकर गुहला के किसानों की पीड़ा को नजरअंदाज कर दिया।
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कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर : किसान
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के किसानों द्वारा धान लेकर आने से जहां हरियाणा के किसानों को भारी नुकसान सहन करना पड़ ही रहा है। साथ ही साथ उन्हें अपना धान बेचने के लिए कई दिन इंतजार भी करना पड़ रहा है। अपना धान जल्दी न बिकने की सुरत में किसान अपने धान को कम कीमत में बेचने को भी तैयार हो जाता है, जिससे किसान को तो नुकसान होता ही है।
साथ ही साथ सरकार को भी मार्केट फीस का नुकसान उठाना पड़ता है। गौड़ ने आरोप लगाया कि पंजाब के किसानों द्वारा चीका मंडी में बड़ी भारी मात्रा में धान लेकर आने से धान के भावों में काफी कमी आ चुकी है, जिससे किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। करीब तीन घंटों तक लगे इस जाम में वाहनों की लंबी कतारें लग गई, जिससे राहगीरों को काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ा। जाम की सूचना मिलने पर एसएचओ ओमप्रकाश और मार्केट कमेटी सचिव ने उचित आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
एसडीएम ने पंजाब के धान की बिक्री पर लगाई रोक
विरोध के बाद एसडीएम राजेश कुमार प्रजापति ने व्यापारियों, किसानों व मजदूरों की एक संयुक्त बैठक बुलाई। जिसमें सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि पंजाब के धान को कोई भी आढ़ती मंडी में नहीं गिरवाएगा। एसडीएम गुहला ने आदेश दिए कि मार्केट कमेटी पुलिस की सहायता से पंजाब सीमा पर बैरियर लगाकर पंजाब की तरफ से आने वाले धान पर रोक लगाए।
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तीन घंटे तक लगे जाम के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करन पड़ा तथा वाहनों को दूसरे रास्तों से निकालना पड़ा। एसएचओ के समझाए जाने के बाद किसानों ने जाम खोला।
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जाम के दौरान किसान नेता पाला राम गौड़ ने कहा कि चीका मंडी में पंजाब से लाए जा रहे धान की बिक्री हो रही है। इस कारण गुहला क्षेत्र किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और सरकार तथा प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे है। गौड़ ने कहा कि पंजाब से आने वाले धान को रोकने के बारे में उन्होंने पहले ही प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था, लेकिन प्रशासन ने जान-बुझकर गुहला के किसानों की पीड़ा को नजरअंदाज कर दिया।
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कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर : किसान
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के किसानों द्वारा धान लेकर आने से जहां हरियाणा के किसानों को भारी नुकसान सहन करना पड़ ही रहा है। साथ ही साथ उन्हें अपना धान बेचने के लिए कई दिन इंतजार भी करना पड़ रहा है। अपना धान जल्दी न बिकने की सुरत में किसान अपने धान को कम कीमत में बेचने को भी तैयार हो जाता है, जिससे किसान को तो नुकसान होता ही है।
साथ ही साथ सरकार को भी मार्केट फीस का नुकसान उठाना पड़ता है। गौड़ ने आरोप लगाया कि पंजाब के किसानों द्वारा चीका मंडी में बड़ी भारी मात्रा में धान लेकर आने से धान के भावों में काफी कमी आ चुकी है, जिससे किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। करीब तीन घंटों तक लगे इस जाम में वाहनों की लंबी कतारें लग गई, जिससे राहगीरों को काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ा। जाम की सूचना मिलने पर एसएचओ ओमप्रकाश और मार्केट कमेटी सचिव ने उचित आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
एसडीएम ने पंजाब के धान की बिक्री पर लगाई रोक
विरोध के बाद एसडीएम राजेश कुमार प्रजापति ने व्यापारियों, किसानों व मजदूरों की एक संयुक्त बैठक बुलाई। जिसमें सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि पंजाब के धान को कोई भी आढ़ती मंडी में नहीं गिरवाएगा। एसडीएम गुहला ने आदेश दिए कि मार्केट कमेटी पुलिस की सहायता से पंजाब सीमा पर बैरियर लगाकर पंजाब की तरफ से आने वाले धान पर रोक लगाए।