पंजाबः सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और पूर्व सांसद अजनाला छह साल के लिए अकाली दल से निष्कासित
शिरोमणि अकाली दल ने आखिरकार बगावत का झंडा बुलंद करने वाले माझा के जरनैलों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी की कोर कमेटी ने रविवार को सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और पूर्व सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला के निष्कासन पर मोहर लगा दी। सभी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। साथ ही इनके बेटों रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा और अमरपाल सिंह बोनी को भी छह साल के लिए निकाल दिया गया है।
शिअद में कुछ समय पहले टकसाली नेताओं ने बगावत के सुर दिखाए थे। सबसे पहले राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींढसा पार्टी के साथ ही थे। उसके बाद ब्रह्मपुरा व अजनाला परिवार और सेवा सिंह सेखवां भी सुखबीर बादल के नेतृत्व के विरोध में आ गए थे।
ब्रह्मपुरा ने 24 अक्तूबर को पार्टी पद छोड़े, फिर चार नवंबर को कांफ्रेंस कर खुले तौर पर सुखबीर को चुनौती दे दी थी। वहीं, बाकी सारी पार्टी बादल परिवार के साथ आ गई थी। उसके बाद से ही ब्रह्मपुरा का निष्कासन तय माना जा रहा था। इस बीच बयानबाजी के चलते सेखवां को भी निकाल दिया गया था। अब ब्रह्मपुरा और अजनाला पर गाज गिर गई। इस तरह शिअद ने सभी बागी टकसाली अकालियों से किनारा कर लिया है।
दोनों ने उदारता का नाजायज फायदा उठाया : बैंस
पार्टी प्रवक्ता हरचरण बैंस ने बताया कि पार्टी ने अफसोस जताया कि दोनों नेताओं ने प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर द्वारा दिखाई उदारता का नाजायज फायदा उठाया। पार्टी और सीनियर लीडरशिप के साथ बुरा बर्ताव किया। ब्रह्मपुरा को अपने क्षेत्र में सभी नेताओं से ज्यादा सम्मान दिया गया। वह चार बार विधायक, दो बार मंत्री और बादल के बाद सबसे सीनियर पदों पर रहे।
दोनों नेता पार्टी की सरकार के समय लिए गए सभी फैसलों में शामिल रहे। ब्रह्मपुरा ने खडूर साहिब उप चुनाव में अपने बेटे को लड़ाने को जोर डाला। अपने भतीजे अलविंदर पाल सिंह पखोके को सूचना कमिश्नर बनवाया। अजनाला को भी विधानसभा की टिकट दी गई, सांसद बनवाया गया। कोर कमेटी ने कहा कि अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पंथक मोर्चे के साथ जा सकते हैं टकसाली
शिरोमणि अकाली दल द्वारा निष्कासित किए गए टकसाली अकाली नेताओं के अब बरगाड़ी में चल रहे पंथक मोर्चे के साथ जाने की उम्मीद की जा रही है। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा से लेकर सेवा सिंह सेखवां तक सभी नेताओं पार्टी पर पंथक एजेंडे से हटने का आरोप लगा कर इसके संकेत भी दिए थे। सियासी माहिरों का कहना है बरगाड़ी मोर्चे में एक तीसरे विकल्प बनने की संभावना भी बन गई है। क्योंकि अकाली दल द्वारा टकसालियों से निष्कासन से पहले आम आदमी पार्टी भी बागी सुखपाल खैरा और कंवर संधू को निकाल चुकी है। ये सारे गुट इकट्ठे हो सकते हैं।