रणदीप सुरजेवाला ने युवाओं को दी नौकरियों पर सरकार से मांगा श्वेतपत्र, भाजपा ने यूं किया पलटवार
- सुरजेवाला ने युवाओं का भविष्य अंधकारमय बनाने का लगाया आरोप
- भाजपा प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने भी किया कांग्रेस नेता पर पलटवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से युवाओं को दी नौकरियों पर श्वेत पत्र मांगा है। उन्होंने डिजिटल प्रेस वार्ता में कहा कि रोजगार के नाम पर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार ने युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। सुरजेवाला के आरोपों पर भाजपा की ओर से प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने पलटवार किया है।
सुरजेवाला ने कहा कि छह साल तक नौकरियों के परिणाम लटकाने, परिणाम आने के बावजूद युवाओं को ज्वाइनिंग न देने और पेपर लीक के सभी मामलों को रफा-दफा करने में ही सरकार लगी रही। कोरोना के समय युवाओं पर चौतरफा मार पड़ी है। नई नौकरी निकालने पर प्रतिबंध लग गया है। छह वर्षों से जो परिणाम लंबित पड़े हैं, उन्हें सिरे से खारिज किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें- निजी डॉक्टरों को एन-95 मास्क, पीपीई किट सरकारी दर पर मिलेंगी, कोरोनाग्रस्त होने पर सरकार
कच्चे कर्मचारियों को सरकारी महकमों से निकालने की मुहिम चला रखी है तथा निजी क्षेत्र में व्यापार व सब कंपनियां ठप होने के कारण हजारों युवा नौकरी से हाथ धो बैठे हैं। साढ़े 5 साल बीतने, लिखित परीक्षा होने व इंटरव्यू के बावजूद 10 लाख के करीब हरियाणा के युवाओं को अधर में लटका कर रखा हुआ है। पिछले ढाई वर्षों से पीजीटी संस्कृत अध्यापक दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। चयन के बावजूद इन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
रणदीप सुरजेवाला का एक और झूठ बेनकाब: आत्रेय
भाजपा प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता व पूर्व मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने एक बार फिर झूठे आंकड़ों को पेश कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया। सुरजेवाला ने हरियाणा में बेरोजगारी के आंकड़ा देते समय सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई ई) नाम की जिस कंपनी का हवाला दिया, वह एक निजी कंपनी है।
उसके प्रबंध निदेशक 2019 के चुनाव में कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र के लिए पी. चिदंबरम के नेतृत्व में बनी समिति के सलाहकार थे। आत्रेय ने आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि कोरोना काल में पूरे देश में बंद था। सभी नागरिक अपने घरों में थे। कोई भी कहीं आ जा नहीं सकता था। इस कंपनी ने बेरोजगारी पर सर्वे कैसे कर लिया। इसके सर्वे का सैंपल आकार क्या था। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल सरकार की रोजगार क्षेत्र में की गई पारदर्शी कोशिश ने विपक्षियों को बेचैन कर रखा है।