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जेल में रामपाल कैदी नंबर 1005 करेगा मजदूरी, तय हो गया काम और रोज का मेहनताना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:08 PM IST
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6 लोगों की हत्या करने के मामले में सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, वहीं जेल में अब वह क्या काम करेगा, ये भी तय हो गया है।
जानकारी के अनुसार, जेल में रामपाल कैदी नंबर 1005 कहलाएगा। उसे माली का काम यानी गार्डनिंग करनी होगी। इस काम की एवज में रामपाल को प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से मेहनताना मिलेगा। रामपाल को माली का यह काम वीरवार से ही दे दिया गया है।
जज ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
एडीएसजे देशराज चालिया ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मोहिंदर सिंह वर्सेज स्टेट ऑफ पंजाब केस का हवाला देते हुए कहा कि आजीवन कारावास का मतलब 14 साल, 20 साल या 30 साल कतई नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि इसका मतलब दोषी की पूरी जिंदगी से है, इसलिए सभी अभियुक्तों को उनकी प्राकृतिक मृत्यु अर्थात अंतिम सांस तक के लिए कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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जानकारी के अनुसार, जेल में रामपाल कैदी नंबर 1005 कहलाएगा। उसे माली का काम यानी गार्डनिंग करनी होगी। इस काम की एवज में रामपाल को प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से मेहनताना मिलेगा। रामपाल को माली का यह काम वीरवार से ही दे दिया गया है।
जज ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
एडीएसजे देशराज चालिया ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मोहिंदर सिंह वर्सेज स्टेट ऑफ पंजाब केस का हवाला देते हुए कहा कि आजीवन कारावास का मतलब 14 साल, 20 साल या 30 साल कतई नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि इसका मतलब दोषी की पूरी जिंदगी से है, इसलिए सभी अभियुक्तों को उनकी प्राकृतिक मृत्यु अर्थात अंतिम सांस तक के लिए कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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केस 429, एक बच्चे और चार महिलाओं की मौत मामले में ये सजा
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इनकी हुई थी मौत
सतलोक आश्रम प्रकरण हिंसा में 16 नवंबर को पांच महिलाओं और एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई थी। मृतकों में रोहतक के भगवतीपुर निवासी संतोष (45), दिल्ली की कविता (31), यूपी के बिजनौर की राजबाला (70), पंजाब के संगरूर की मलकीत कौर (50 ) और डेढ़ साल के बच्चे आदर्श की मौत हो गई थी। इनकी हत्या में दोषी आश्रम संचालक रामपाल और उसके बेटे विजेंद्र उर्फ विरेंद्र सहित सभी 15 दोषियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने सभी दोषियों पर तीन धाराओं में 2.5-2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। सजा पाने वालों में तीन महिलाएं हैं। आईपीसी की धारा-302, 120-बी और धारा-343 में अलग-अलग मिली सजाएं एक साथ चलेंगी। रामपाल के वकील का कहना है कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
किस धारा में कितनी सजा
केस नंबर-429 में अदालत ने आईपीसी की धारा-302 में सभी दोषियों को आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। धारा-120 बी में भी सभी को उम्रकैद और 1-1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा-343 में दो साल का कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
15 आरोपियों में आश्रम संचालक सोनीपत के गांव धनाना का रामपाल, उसका बेटा विरेंद्र उर्फ विजेंद्र, हिसार के गांव उगालन निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा गांव निवासी राजकपूर उर्फ प्रीतम, सोनीपत के गांव बढ़गांव निवासी राजेंद्र और बरवाला की बबीता के अलावा गुरुग्राम निवासी देवेंद्र, सिरसा निवासी जगदीश, पानीपत निवासी खुशहाल सिंह, जींद निवासी सतबीर व सोनू दास, सिरसा निवासी सुखबीर, भिवानी की पूनम, जींद निवासी सावित्री, गुरुग्राम के सूरत नगर के अनिल शामिल हैं।
सतलोक आश्रम प्रकरण हिंसा में 16 नवंबर को पांच महिलाओं और एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई थी। मृतकों में रोहतक के भगवतीपुर निवासी संतोष (45), दिल्ली की कविता (31), यूपी के बिजनौर की राजबाला (70), पंजाब के संगरूर की मलकीत कौर (50 ) और डेढ़ साल के बच्चे आदर्श की मौत हो गई थी। इनकी हत्या में दोषी आश्रम संचालक रामपाल और उसके बेटे विजेंद्र उर्फ विरेंद्र सहित सभी 15 दोषियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने सभी दोषियों पर तीन धाराओं में 2.5-2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। सजा पाने वालों में तीन महिलाएं हैं। आईपीसी की धारा-302, 120-बी और धारा-343 में अलग-अलग मिली सजाएं एक साथ चलेंगी। रामपाल के वकील का कहना है कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
किस धारा में कितनी सजा
केस नंबर-429 में अदालत ने आईपीसी की धारा-302 में सभी दोषियों को आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। धारा-120 बी में भी सभी को उम्रकैद और 1-1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा-343 में दो साल का कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
15 आरोपियों में आश्रम संचालक सोनीपत के गांव धनाना का रामपाल, उसका बेटा विरेंद्र उर्फ विजेंद्र, हिसार के गांव उगालन निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा गांव निवासी राजकपूर उर्फ प्रीतम, सोनीपत के गांव बढ़गांव निवासी राजेंद्र और बरवाला की बबीता के अलावा गुरुग्राम निवासी देवेंद्र, सिरसा निवासी जगदीश, पानीपत निवासी खुशहाल सिंह, जींद निवासी सतबीर व सोनू दास, सिरसा निवासी सुखबीर, भिवानी की पूनम, जींद निवासी सावित्री, गुरुग्राम के सूरत नगर के अनिल शामिल हैं।
केस 430, एक महिला की मौत मामले में ये सजा सुनाई गई
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साल 2014 में हुई यूपी के ललितपुर निवासी महिला रजनी की हत्या में बुधवार को अदालत ने इंजीनियर से संत बने रामपाल और उसके बेटे सहित 14 समर्थकों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक इनकी सांसें चलेंगी तब तक सभी जेल में रहेंगे।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) देशराज चालिया की अदालत ने केस नंबर 430 के प्रत्येक दोषियों पर आईपीसी की धारा 302, 120 बी व 343 के तहत 2.05-2.05 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति जब्त करके वसूली की जाएगी। सजा सुनाते हुए इस बात को भी मेंशन किया कि यह बिना किसी छूट के रहेगी। अदालत के शब्दों में रिगॉरॉस इमप्रिजनमेंट फॉर लाइफ, विदाउट रेमिशन को मेंशन किया गया। सरल शब्दों में अंतिम सांस तक कठोर कारावास की सजा, जिसमें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जा सकती।
मुख्य अभियुक्तों में रामपाल और उसका बेटा बिजेंद्र उर्फ विरेंद्र, हिसार के उगालन गांव निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा का प्रीतम उर्फ राजकपूर, सोनीपत के बड़गांव का राजेंद्र, झज्जर के बीरहाना का कृष्ण कुमार, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रिब्बा गांव का बलवान, टकसाल का पवन, हिमाचल के सोलन के गांव डेरग का राजीव शर्मा, राजस्थान के पाली के पोमावास का राजेश उर्फ रमेश, उदयपुर के नरसिंहपुरा का नटवर लाल उर्फ लक्ष्मण, राजस्थान के संवाईमाधोपुर के सूर्य नगर का राजेश, कुरुक्षेत्र के बारना का रामचंद्र, हिसार के बरवाला की लक्ष्मी विहार कॉलोनी की बबीता शामिल हैं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) देशराज चालिया की अदालत ने केस नंबर 430 के प्रत्येक दोषियों पर आईपीसी की धारा 302, 120 बी व 343 के तहत 2.05-2.05 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति जब्त करके वसूली की जाएगी। सजा सुनाते हुए इस बात को भी मेंशन किया कि यह बिना किसी छूट के रहेगी। अदालत के शब्दों में रिगॉरॉस इमप्रिजनमेंट फॉर लाइफ, विदाउट रेमिशन को मेंशन किया गया। सरल शब्दों में अंतिम सांस तक कठोर कारावास की सजा, जिसमें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जा सकती।
मुख्य अभियुक्तों में रामपाल और उसका बेटा बिजेंद्र उर्फ विरेंद्र, हिसार के उगालन गांव निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा का प्रीतम उर्फ राजकपूर, सोनीपत के बड़गांव का राजेंद्र, झज्जर के बीरहाना का कृष्ण कुमार, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रिब्बा गांव का बलवान, टकसाल का पवन, हिमाचल के सोलन के गांव डेरग का राजीव शर्मा, राजस्थान के पाली के पोमावास का राजेश उर्फ रमेश, उदयपुर के नरसिंहपुरा का नटवर लाल उर्फ लक्ष्मण, राजस्थान के संवाईमाधोपुर के सूर्य नगर का राजेश, कुरुक्षेत्र के बारना का रामचंद्र, हिसार के बरवाला की लक्ष्मी विहार कॉलोनी की बबीता शामिल हैं।