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दो पीड़ितों ने खोली राम रहीम की पोल, डेरा प्रेमियों को कैसे बनाता था नपुंसक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:16 AM IST
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Ram Rahim
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साध्वी रेप केस में सलाखों के पीछे पहुंचे राम रहीम की दो पीड़ितों ने पोल खोली है और उन्होंने बताया कि वह डेरा सच्चा सौदा में अनुयायियों को नपुंसक कैसे बनाता था। लायर्स फार ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (एलएफएचआई) ने उन लोगों को निशुल्क कानूनी मदद की पेशकश की है, जो डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत रामरहीम के करतूतों से पीड़ित हैं। एलएफएचआई के एडवोकेट नवकिरण सिंह ने ऐसे सभी पीड़ितों से सामने आने की अपील की है, जो डेरामुखी के भय से अब तक मुंह खोलने से डर रहे थे।
प्रेस क्लब में बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में एडवोकेट नवकिरण के साथ फतेहाबाद निवासी पूर्व डेरा अनुयायी हंसराज मौजूद थे, उन्होंने नवकिरण के जरिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरामुखी पर अनुयायियों को नपुंसक बनाने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा हुआ है। याची ने जुलाई, 2012 में हाईकोर्ट में कुल 400 अनुयायियों की सूची सौंपते हुए उनमें से 166 को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था।
याची का कहना था कि डेरामुखी ने यह कहते हुए अनुयायियों को नपुंसक बनाया कि वे अगर खुद नपुंसक बनते हैं तो भगवान को पाने में सफल होंगे। नवकिरण ने बताया कि सीबीआई मामले में आगामी अक्तूबर माह में हाईकोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इस मौके पर हंसराज ने बताया कि उसके माता-पिता डेरे के अनुयायी थे, इसलिए वह भी साल 1996 में 17 साल की उम्र में डेरे के अनुयायी बन गए थे।
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बताया कि मुझे साल 2002 में श्री गंगानगर स्थित डेरे के अस्पताल में नपुंसक बनने के लिए मजबूर किया गया, जहां मेरे अलावा कई अन्य साधू (डेरा अनुयायी) भी थे। इसके लिए डेरामुखी ने मेरी सराहना की और मुझे एक नया गिटार दिया, क्योंकि उस समय मैं डेरे के म्यूजिक ग्रुप का सदस्य था। कुछ दिन बाद में मैंने महसूस किया कि नपुंसक बनाना एक अमानवीय कृत्य था, जिसके कारण मेरे शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगे। मैंने तब डेरा छोड़ दिया।
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प्रेस क्लब में बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में एडवोकेट नवकिरण के साथ फतेहाबाद निवासी पूर्व डेरा अनुयायी हंसराज मौजूद थे, उन्होंने नवकिरण के जरिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरामुखी पर अनुयायियों को नपुंसक बनाने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा हुआ है। याची ने जुलाई, 2012 में हाईकोर्ट में कुल 400 अनुयायियों की सूची सौंपते हुए उनमें से 166 को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था।
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याची का कहना था कि डेरामुखी ने यह कहते हुए अनुयायियों को नपुंसक बनाया कि वे अगर खुद नपुंसक बनते हैं तो भगवान को पाने में सफल होंगे। नवकिरण ने बताया कि सीबीआई मामले में आगामी अक्तूबर माह में हाईकोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इस मौके पर हंसराज ने बताया कि उसके माता-पिता डेरे के अनुयायी थे, इसलिए वह भी साल 1996 में 17 साल की उम्र में डेरे के अनुयायी बन गए थे।
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बताया कि मुझे साल 2002 में श्री गंगानगर स्थित डेरे के अस्पताल में नपुंसक बनने के लिए मजबूर किया गया, जहां मेरे अलावा कई अन्य साधू (डेरा अनुयायी) भी थे। इसके लिए डेरामुखी ने मेरी सराहना की और मुझे एक नया गिटार दिया, क्योंकि उस समय मैं डेरे के म्यूजिक ग्रुप का सदस्य था। कुछ दिन बाद में मैंने महसूस किया कि नपुंसक बनाना एक अमानवीय कृत्य था, जिसके कारण मेरे शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगे। मैंने तब डेरा छोड़ दिया।
नपुंसक बनाए गए अनुयायियों के नाम की दान में मिलीं जमीनें
राम रहीम
- फोटो : SELF
हंसराज ने बताया कि कुछ वर्षों बाद वह एक अन्य डेरा अनुयायी गुरदास सिंह तूर के संपर्क में आया। उन्होंने नपुंसक बनाए गए डेरा प्रेमियों की सूची तैयार की। हंसराज ने बताया कि डेरामुखी का मानना था कि नपुंसक बनने के बाद अनुयायी डेरा छोड़कर नहीं जा सकेंगे। डेरामुखी ऐसे अनुयायियों से खाली कागज पर दस्तखत भी करवा लेता था।
उसके बाद उनके नामों पर डेरामुखी दान की गई जमीन ट्रांसफर करवाता और कुछ समय बाद उस जमीन को डेरा ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर करवा लिया जाता। तूर ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से पत्रकार छत्रपति ही हत्या के मामले में फंसे कुलदीप सिंह और निर्मल सिंह को राम रहीम की ओर से पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग देते देखा था। ट्रेनिंग देने के लिए मिट्टी की बोरियों के आगे कागज का टारगेट बनाया गया था।
डेरामुखी का बर्थडे भी झूठा
गुरदास सिंह ने बताया कि उन्होंने डेरामुखी की असलियत जानने के लिए कई तरह से छानबीन की। इस दौरान वह डेरामुखी के राजस्थान वाले गांव भी गया, जहां पता चला कि डेरामुखी का जन्म और ननिहाल फिरोजपुर जिले का गांव कीकरखेड़ा है। गुरदास सिंह ने कहा कि जब उन्होंने डेरामुखी का जन्म सर्टिफिकेट निकलवाया तो पता चला कि डेरामुखी की असली जन्म तिथि 10 जुलाई, 1967 है। वह आज तक सबसे झूठ बोलकर अपना जन्मदिन 15 अगस्त को मनाता रहा। गुरदास सिंह ने यह भी बताया कि डेरामुखी के जन्मदिन की असली कहानी बताने वाले शिवजंट सिंह का डेराप्रेमियों ने कत्ल करवा दिया था, जिसे लेकर 25 डेराप्रेमियों पर कत्ल का केस चल रहा है।
उसके बाद उनके नामों पर डेरामुखी दान की गई जमीन ट्रांसफर करवाता और कुछ समय बाद उस जमीन को डेरा ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर करवा लिया जाता। तूर ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से पत्रकार छत्रपति ही हत्या के मामले में फंसे कुलदीप सिंह और निर्मल सिंह को राम रहीम की ओर से पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग देते देखा था। ट्रेनिंग देने के लिए मिट्टी की बोरियों के आगे कागज का टारगेट बनाया गया था।
डेरामुखी का बर्थडे भी झूठा
गुरदास सिंह ने बताया कि उन्होंने डेरामुखी की असलियत जानने के लिए कई तरह से छानबीन की। इस दौरान वह डेरामुखी के राजस्थान वाले गांव भी गया, जहां पता चला कि डेरामुखी का जन्म और ननिहाल फिरोजपुर जिले का गांव कीकरखेड़ा है। गुरदास सिंह ने कहा कि जब उन्होंने डेरामुखी का जन्म सर्टिफिकेट निकलवाया तो पता चला कि डेरामुखी की असली जन्म तिथि 10 जुलाई, 1967 है। वह आज तक सबसे झूठ बोलकर अपना जन्मदिन 15 अगस्त को मनाता रहा। गुरदास सिंह ने यह भी बताया कि डेरामुखी के जन्मदिन की असली कहानी बताने वाले शिवजंट सिंह का डेराप्रेमियों ने कत्ल करवा दिया था, जिसे लेकर 25 डेराप्रेमियों पर कत्ल का केस चल रहा है।