विवादों से रहा राम रहीम का नाता, यहां पढ़े कैसे गुमनाम चिट्ठियों से उठा था बवाल
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का शुरू से ही विवादों से गहरा नाता रहा है। डेरा मुखी के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर हत्या, रेप और साधुओं को नपुंसक बनाने संबंधी सहित पांच केस सीबीआई अदालत में चले हैं। इनमें से साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को 10-10 साल की सजा हो चुकी है। अब पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या में राम रहीम सहित चार को दोषी करार दिया गया है। इसके बाद डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या और फकीरचंद हत्याकांड व 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का केस अदालत में चल रहा है।
राजस्थान के श्रीगंगानगर के गांव श्रीगुरुसर मोडिया में जन्मा था गुरमीत
जानकारी के अनुसार, गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर के गांव श्रीगुरुसर मोडिया नामक गांव में हुआ था। उसके पिता का नाम मग्घर सिंह और मां का नाम नसीब कौर है। उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है। एक बेटी को डेरा मुखी ने गोद लिया है। वर्ष 1990 में गुरमीत राम रहीम ने सिरसा डेरा सच्चा सौदा की गद्दी संभाली थी।
23 साल की उम्र में डेरा प्रमुख बना गुरमीत
अप्रैल, 1948 में परमसंत शाह मस्ताना जी बिलोचिस्तानी ने सच्चा सौदा की स्थापना की थी। मस्ताना जी फक्कड़ तबीयत के फकीर थे। उन्होंने लोगों को अध्यात्म और भाईचारे का संदेश दिया। लोगों की उनमें अति आस्था थी। मस्ताना जी ने ही डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं को ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा दिया। शाह सतनाम सिंह 1990 तक डेरा प्रमुख के रूप में कार्य करते रहे और उसके बाद 1990 में चोला छोड़ने से पूर्व उन्होंने डेरा की गद्दी गुरमीत राम रहीम सिंह को सौंप दी। गुरमीत मात्र 23 वर्ष की आयु में डेरा प्रमुख बन गया।
साध्वी से दुष्कर्म मामला
साल 2000 में डेरा सच्चा सौदा की एक साध्वी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, राष्ट्रपति व मीडिया को एक गुमनाम पत्र भेजा था। पत्र में साध्वी ने गुरमीत राम रहीम पर उसके व कई अन्य साध्वियों से यौन शोषण के आरोप लगाए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पत्र पर संज्ञान लेते हुए सितंबर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
सीबीआई ने जांच में उक्त तथ्यों को सही पाया और गुरमीत के खिलाफ विशेष अदालत के समक्ष 31 जुलाई, 2007 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई अदालत इस केस में डेरा मुखी को दोषी करार दिया। 28 अगस्त 2017 को कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई। इसके बाद से राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या
सिरसा से प्रकाशित सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक रामचंद्र छत्रपति ने साध्वी के गुमनाम पत्र को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो डेरा सच्चा सौदा के सेवकों ने दिनदहाड़े 24 अक्तूबर 2002 को रामचंद्र को गोलियों से भून दिया। उपचार के दौरान 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की मौत हो गई। हत्या में शामिल दो डेरा सेवक मौके पर पकड़े गए।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच करवाने की गुहार लगाई। सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ छत्रपति की हत्या का केस दर्ज किया। जांच के बाद सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। अब कोर्ट ने इस हत्याकांड के साजिश कर्ता गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया है। इसी प्रकार डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह को मौत के घाट उतारने का आरोप लगा।
400 साधुओं को नपुंसक बनाने का मामला
डेरा सच्चा सौदा के पूर्व अनुयायी हंसराज चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि डेरा मुखी के आदेश पर उसे और 400 अन्य संतों को डेरा के अंदर जबरन नपुंसक बनाया था। सीबीआई जांच की मांग करते हुए चौहान ने आरोप लगाया था कि डेरा मुखी अनुयायियों को अपने अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों की मदद से नपुंसक बनाता है।
मामले में जज ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने चौहान के मेडिकल परीक्षण के आदेश दिए थे, जिसमें नपुंसकता की पुष्टि हुई थी। इसमें राज्य सरकार ने भी एक रिपोर्ट दायर की थी, जिसमें डेरा प्रमुख से जुड़े सात लोगों के बयान हुए थे। उन्होंने उन्हें नपुंसक बनाने की पुष्टि की थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ अंग-भंग करने का केस दर्ज कर लिया।
गुमनाम चिट्ठियों से उठा बवाल
वर्ष 2002 के मई माह में एक साध्वी ने पत्र के माध्यम से डेरा प्रमुख पर यौन शोषण के आरोप लगाए। एक अन्य गुमनाम पत्र में डेरा द्वारा कुरुक्षेत्र के एक श्रद्धालु रणजीत सिंह की हत्या कराने का भी जिक्र किया गया। इन पत्रों में लगे आरोपों को आधार बनाते हुए सिरसा के सांध्य दैनिक पूरा सच ने डेरा प्रमुख के खिलाफ समाचार प्रकाशित किए। आरोप है कि इन समाचारों से बौखलाकर डेरे से जुड़े कुछ लोगों ने समाचार पत्र के संपादक रामचंद्र छत्रपति को 24 अक्तूबर 2002 को कई गोलियां मार दीं। घायल छत्रपति की 21 नवंबर 2002 को मौत हो गई।