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पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में सजायाफ्ता राम रहीम के सहयोगी की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा...
Sat, 09 May 2020 10:44 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 09 May 2020 10:44 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार छत्रपति रामचंद्र हत्याकांड में सजायाफ्ता डेरा प्रमुख के सहयोगी कृष्ण लाल को पैरोल देने की मांग खारिज कर दी है। कृष्ण लाल इस समय अंबाला जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है। कृष्ण लाल के भाई भीम सेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कृष्ण लाल को पैरोल देने की मांग की थी। याचिका में अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट के 2 मई के उस आदेश को भी रद्द करने की मांग की गई जिसमें उनकी पैरोल की मांग को खारिज कर दिया गया था।
हाईकोर्ट को बताया गया कि याची कृष्ण लाल का भाई है। उसकी माता का 1 मई को देहांत हो गया और 13 मई को उसकी माता की तेरहवीं है। इसलिए उन्होंने अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट को एक मांगपत्र देकर दो सप्ताह की पैरोल देने की मांग की थी। लेकिन अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट ने सिरसा के एसएचओ की उस रिपोर्ट जिसमें कहा गया था कि कृष्ण लाल को पैरोल देने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, का हवाला देकर उनकी मांग खारिज कर दी।
कोर्ट को बताया गया कि ट्रायल के दौरान याची कई साल तक जमानत पर बाहर रहा व उसने कभी कानून के खिलाफ काम नहीं किया। उसकी माता के अंतिम कार्यक्रम में भाग लेना उसका अधिकार भी है। ऐसे में उसे पैरोल दी जाए। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की याचिका सजायाफ्ता कृष्ण लाल खुद क्यों नही दायर कर रहा। याची किस अधिकार से उसके पैरोल के लिए याचिका दायर कर रहा है।
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कोर्ट ने कहा कि कानूनन याची इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकारी नहीं है। हाईकोर्ट मानता है कि याची याचिका दायर करने का लोकस स्टेंडी नहीं है ऐसे में याचिका सुनने का अधिकार नहीं रखती। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि याची कृष्ण लाल का भाई है। उसकी माता का 1 मई को देहांत हो गया और 13 मई को उसकी माता की तेरहवीं है। इसलिए उन्होंने अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट को एक मांगपत्र देकर दो सप्ताह की पैरोल देने की मांग की थी। लेकिन अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट ने सिरसा के एसएचओ की उस रिपोर्ट जिसमें कहा गया था कि कृष्ण लाल को पैरोल देने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, का हवाला देकर उनकी मांग खारिज कर दी।
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कोर्ट को बताया गया कि ट्रायल के दौरान याची कई साल तक जमानत पर बाहर रहा व उसने कभी कानून के खिलाफ काम नहीं किया। उसकी माता के अंतिम कार्यक्रम में भाग लेना उसका अधिकार भी है। ऐसे में उसे पैरोल दी जाए। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की याचिका सजायाफ्ता कृष्ण लाल खुद क्यों नही दायर कर रहा। याची किस अधिकार से उसके पैरोल के लिए याचिका दायर कर रहा है।
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कोर्ट ने कहा कि कानूनन याची इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकारी नहीं है। हाईकोर्ट मानता है कि याची याचिका दायर करने का लोकस स्टेंडी नहीं है ऐसे में याचिका सुनने का अधिकार नहीं रखती। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
पैरोल की मांग वाली याचिका वापस लेने की छूट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार छत्रपति रामचंद्र हत्याकांड में डेरा प्रमुख के सहयोगी कृष्ण लाल को पैरोल देने की मांग खारिज करते हुए याचिका वापस लेने की छूट दे दी है। कृष्ण लाल इस समय अंबाला जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। कृष्ण लाल ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया था कि उसकी माता का 1 मई को देहांत हो गया और 13 मई को उनकी तेरहवीं है। मां की तेरहवीं रस्म में शामिल होने के लिए उसने अंबाला जेल सुपरिंटेंडेंट को एक मांगपत्र देकर दो सप्ताह का पैरोल देने की मांग की थी।
इस संबंध में अंबाला जेल के सुपरिंटेंडेंट को सिरसा के एसएचओ से रिपोर्ट मिली थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कृष्ण लाल को पैरोल देने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने रिपोर्ट का हवाला देकर उसकी मांग खारिज कर दी। कोर्ट को बताया गया कि ट्रायल के दौरान याची कई साल तक जमानत पर बाहर रहा व उसने कभी कानून के खिलाफ काम नहीं किया। माता के अंतिम कार्यक्रम में भाग लेना उसका अधिकार भी है। ऐसे में उसे पैरोल दी जाए।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कृष्ण लाल की मांग का विरोध करते हुए कहा कि याची को पैरोल देने से राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। याची रणजीत सिंह मर्डर केस में भी आरोपी है और वह मामला अपने अंतिम चरण में ऐसे में याची को अगर पैरोल दी जाती है तो वह वापस नहीं आएगा। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि याची के दो भाई हैं जो उसकी माता की अंतिम रस्म पूरी कर सकते हैं। इसलिए याची को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पैरोल याचिका वापस लेने की छूट देते हुए उसे खारिज कर दिया। ज्ञात रहे कि पिछले सप्ताह भी कृष्ण लाल के भाई ने उसे पैरोल देने की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने उसकी मांग खारिज करते हुए कहा था कि कृष्ण लाल खुद याचिका दायर क्यों नही कर रहा।
इस संबंध में अंबाला जेल के सुपरिंटेंडेंट को सिरसा के एसएचओ से रिपोर्ट मिली थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कृष्ण लाल को पैरोल देने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने रिपोर्ट का हवाला देकर उसकी मांग खारिज कर दी। कोर्ट को बताया गया कि ट्रायल के दौरान याची कई साल तक जमानत पर बाहर रहा व उसने कभी कानून के खिलाफ काम नहीं किया। माता के अंतिम कार्यक्रम में भाग लेना उसका अधिकार भी है। ऐसे में उसे पैरोल दी जाए।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कृष्ण लाल की मांग का विरोध करते हुए कहा कि याची को पैरोल देने से राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। याची रणजीत सिंह मर्डर केस में भी आरोपी है और वह मामला अपने अंतिम चरण में ऐसे में याची को अगर पैरोल दी जाती है तो वह वापस नहीं आएगा। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि याची के दो भाई हैं जो उसकी माता की अंतिम रस्म पूरी कर सकते हैं। इसलिए याची को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पैरोल याचिका वापस लेने की छूट देते हुए उसे खारिज कर दिया। ज्ञात रहे कि पिछले सप्ताह भी कृष्ण लाल के भाई ने उसे पैरोल देने की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने उसकी मांग खारिज करते हुए कहा था कि कृष्ण लाल खुद याचिका दायर क्यों नही कर रहा।