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राम रहीम ने किसी भी नेता को अपने साथ नहीं बिठाया, जो आया नीचे बैठा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
Updated Sun, 03 Sep 2017 09:13 AM IST
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Ram Rahim
- फोटो : File Photo
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वोट की खातिर नेता किसी भी हद तक कुछ भी करने से गुरेज नहीं करता। डेरा सच्चा सौदा में जो भी नेता वोट मांगने आया उसे कभी बराबर बैठने का मौका नहीं मिला, चाहे वो मंत्री हो या सांसद। जो जितना झुककर डेरा मुखी के पैर छू गया उसकी झोली में उतनी ही ज्यादा वोटें चली गई। भाजपा की लाटरी खोलने में डेरा की अहम भूमिका रही। भाजपा नेता आखिर तक शुक्रिया अदा करने आते जाते रहे।
वर्ष 1990 के बाद गुरमीत राम रहीम सिंह ने जब गद्दी संभाली तो डेरा आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गया। डेरा ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र तक अपनी दौड़ जारी रखी। धर्म और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करके श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई और इसी भीड़ को देखकर नेताओं की लार टपकने लगी। डेरा ने इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए राजनीतिक आशीर्वाद देना शुरू किया।
डेरा ने कई बार कई राजनीतिक दलों को धूल चटाई। डेरा में मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद कद्दावरों का आना-जाना लगा। जैसे ही कोई चुनाव आता नेताओं की दौड़ डेरा तक लगी रहती थी। डेरा मुखी ने हर नेता को उसकी हद में रखा। नेता की भूख वोट से मिटती थी और वोट डेरा के पास थी। ऐसे में किसी भी कीमत पर वोट तो चाहिए थी।
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वर्ष 1990 के बाद गुरमीत राम रहीम सिंह ने जब गद्दी संभाली तो डेरा आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गया। डेरा ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र तक अपनी दौड़ जारी रखी। धर्म और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करके श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई और इसी भीड़ को देखकर नेताओं की लार टपकने लगी। डेरा ने इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए राजनीतिक आशीर्वाद देना शुरू किया।
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डेरा ने कई बार कई राजनीतिक दलों को धूल चटाई। डेरा में मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद कद्दावरों का आना-जाना लगा। जैसे ही कोई चुनाव आता नेताओं की दौड़ डेरा तक लगी रहती थी। डेरा मुखी ने हर नेता को उसकी हद में रखा। नेता की भूख वोट से मिटती थी और वोट डेरा के पास थी। ऐसे में किसी भी कीमत पर वोट तो चाहिए थी।
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Ram Rahim
डेरा का उसूल रहा कि डेरा में चाहे कितना बड़ा अतिथि क्यों न आया तो उसकी कुर्सी डेरा प्रमुख से सदा नीचे ही रखी जाती थी। अधिकतर नेता और मंत्री डेरा में आते ही मुलाकात के वक्त डेरामुखी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया करते थे।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा ने पिछले दिनों ही आशीर्वाद लिया था। रूमाल छू प्रतियोगिता में प्रदेश और केंद्र के मंत्री आए, उनकी कुर्सी कई सीढी नीचे लगाई गई। सत्संग में विधायक, सांसद या मंत्रियों को मंच के सामने बैठाया जाता था लेकिन इस बार दायी ओर और सामने कुर्सियों पर बैठा गया। ऐसा पहली बार हुआ कि डेरा प्रमुख किसी मंत्री को आशीर्वाद देने के लिए अपने सिंहासन से उतर कर मंच तक आए थे।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा ने पिछले दिनों ही आशीर्वाद लिया था। रूमाल छू प्रतियोगिता में प्रदेश और केंद्र के मंत्री आए, उनकी कुर्सी कई सीढी नीचे लगाई गई। सत्संग में विधायक, सांसद या मंत्रियों को मंच के सामने बैठाया जाता था लेकिन इस बार दायी ओर और सामने कुर्सियों पर बैठा गया। ऐसा पहली बार हुआ कि डेरा प्रमुख किसी मंत्री को आशीर्वाद देने के लिए अपने सिंहासन से उतर कर मंच तक आए थे।