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बेमिसालः रक्षाबंधन पर मुंह बोले देवर ने अपनी भाभी को दिया ऐसा तोहफा, फूट-फूट कर रोई वो
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 26 Aug 2018 01:04 PM IST
महिला को मिला राखी का तोहफा
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रक्षाबंधन पर एक मुंह बोले देवर ने अपनी भाभी को ऐसा तोहफा दिया, जिसे देखकर वो फूट-फूट कर रोई। तोहफा इतना बेमिसाल है कि वो सारी जिंदगी उसका शुक्रियाअदा करती रहेगी। एक दशक पहले यूपी के आजमगढ़ से भटककर अपना घर (अनाथालय) आने वाली 27 वर्षीय मंजू को रक्षाबंधन का सबसे बड़ा तोहफा मिला है।
उसके मुंह बोले देवर एवं हरियाणवी कलाकार देव कौशिक निंदाना ने तकनीक की मदद से न केवल उसका मायका ढूंढ लिया, बल्कि माता-पिता, बहन, ताऊ से लेकर भाई तक से वीडियो कांफ्रेंसिंग से बातचीत भी करवा दी। बेटी के भरे-पूरे परिवार को पाकर मायके वाले बेहद खुश हैं। अब मंजू घरवालों से मिलने मायके जाएगी।
दस साल बाद माता-पिता से बात कर खूब रोई मंजू। मंजू ने बताया कि साल 2008 में पशु चराने गई थी, जहां जमींदार के खेत में नुकसान हो गया। इस पर परिजनों ने डांट दिया। नाराज होकर वह घर से ट्रेन में बैठकर दिल्ली आ गई। वहां पर रेलवे पुलिस ने स्टेशन पर घूमते पकड़ लिया। जब उसने घर जाने से मना कर दिया तो पूछा, कहां जाना चाहती हो।
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मंजू ने कहा कि बुआ के पास जाना है, जो दिल्ली में रहती हैं। पुलिस बुआ का पता नहीं ढूंढ सकी। इसके बाद उसे अपना घर रोहतक भेज दिया गया। मंजू ने बताया कि 18 साल की उम्र में साल 2010 में जसवंती ने कहा कि उसकी शादी कर दें। उसने हां भर दी। इसके बाद लाढ़ोत निवासी जोगेंद्र के साथ अपना घर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कराई गई।
अब उसके दो बच्चे सात वर्षीय बेटा अभय और पांच वर्षीय बेटी अदिति है। परिवार खुशी से रह रहा है, लेकिन उसे मायके वालों की याद हमेशा आती रहती थी। खासकर रक्षाबंधन पर भाई संतोष को बहुत मिस करती थी।
उसके मुंह बोले देवर एवं हरियाणवी कलाकार देव कौशिक निंदाना ने तकनीक की मदद से न केवल उसका मायका ढूंढ लिया, बल्कि माता-पिता, बहन, ताऊ से लेकर भाई तक से वीडियो कांफ्रेंसिंग से बातचीत भी करवा दी। बेटी के भरे-पूरे परिवार को पाकर मायके वाले बेहद खुश हैं। अब मंजू घरवालों से मिलने मायके जाएगी।
दस साल बाद माता-पिता से बात कर खूब रोई मंजू। मंजू ने बताया कि साल 2008 में पशु चराने गई थी, जहां जमींदार के खेत में नुकसान हो गया। इस पर परिजनों ने डांट दिया। नाराज होकर वह घर से ट्रेन में बैठकर दिल्ली आ गई। वहां पर रेलवे पुलिस ने स्टेशन पर घूमते पकड़ लिया। जब उसने घर जाने से मना कर दिया तो पूछा, कहां जाना चाहती हो।
मंजू ने कहा कि बुआ के पास जाना है, जो दिल्ली में रहती हैं। पुलिस बुआ का पता नहीं ढूंढ सकी। इसके बाद उसे अपना घर रोहतक भेज दिया गया। मंजू ने बताया कि 18 साल की उम्र में साल 2010 में जसवंती ने कहा कि उसकी शादी कर दें। उसने हां भर दी। इसके बाद लाढ़ोत निवासी जोगेंद्र के साथ अपना घर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कराई गई।
अब उसके दो बच्चे सात वर्षीय बेटा अभय और पांच वर्षीय बेटी अदिति है। परिवार खुशी से रह रहा है, लेकिन उसे मायके वालों की याद हमेशा आती रहती थी। खासकर रक्षाबंधन पर भाई संतोष को बहुत मिस करती थी।
पांच घंटे में ढूंढ दिया मायका, सुबह हुई पिता से बात
rakhi
मंजू ने बताया कि उसके देवर सतपाल के दोस्त देव कौशिक शुक्रवार शाम चार बजे घर आए। पूछने लगे कि भाभी, रक्षाबंधन पर मायके नहीं जाती या भाई आता है। मंजू ने लाचारी जाहिर करते हुए कहा कि पिता व गांव का नाम याद है, लेकिन रास्ता पता नहीं, कैसे जाऊं। देव ने इंटरनेट की मदद से सबसे पहले मंजू के गांव समसाबाद को तलाश किया, जो आजमगढ़ जिले में मिला।
इसके बाद संबंधित थाना प्रभारी का नंबर मिला। थाना प्रभारी ने गांव के प्रधान का नंबर दिया। शनिवार सुबह नौ बजे मोबाइल नंबर पर प्रधान से बात हुई। प्रधान ने मंजू के पिता राजमल और मां ईश कुमारी से बात की। पिता ने कहा कि कैसे विश्वास कर लूं कि मंजू है। उन्होंने 10 सवाल पूछे। सभी सवालों का जवाब मिलने के बाद पिता संतुष्ट हुए। 10 मिनट तक मंजू माता-पिता और भाई से बात करके रोती रही।
वीडियो कॉल से नाती और नातिन को देख खुश हुए
मंजू ने बताया कि उसने वीडियो कॉल से अपने दोनों बच्चों की माता-पिता से बात करवाई। वे बेहद खुश थे। मायके वालों से 10 साल बाद बात हुई है। जैसे पुनर्जन्म हो गया। जल्द मायके वालों से मिलने आजमगढ़ जाऊंगी। मंजू के पति जोगेंद्र देशवाल भी बेहद खुश हैं।
सबसे पहले पूर्व सीएम की बेटी से पढ़ते थे सतपाल और देव
देव ने बताया कि उसने म्यूजिक में एमए किया है। वे प्रदेश के पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा की बेटी प्रोफेसर भारती शर्मा के पास बैठते थे। उसी दोस्ती के चलते वह सतपाल से मिलने उसके घर लाढौत गया था, जहां उसकी भाभी को मायके वालों से मिलाने का माध्यम बनकर खुश हूं।
इसके बाद संबंधित थाना प्रभारी का नंबर मिला। थाना प्रभारी ने गांव के प्रधान का नंबर दिया। शनिवार सुबह नौ बजे मोबाइल नंबर पर प्रधान से बात हुई। प्रधान ने मंजू के पिता राजमल और मां ईश कुमारी से बात की। पिता ने कहा कि कैसे विश्वास कर लूं कि मंजू है। उन्होंने 10 सवाल पूछे। सभी सवालों का जवाब मिलने के बाद पिता संतुष्ट हुए। 10 मिनट तक मंजू माता-पिता और भाई से बात करके रोती रही।
वीडियो कॉल से नाती और नातिन को देख खुश हुए
मंजू ने बताया कि उसने वीडियो कॉल से अपने दोनों बच्चों की माता-पिता से बात करवाई। वे बेहद खुश थे। मायके वालों से 10 साल बाद बात हुई है। जैसे पुनर्जन्म हो गया। जल्द मायके वालों से मिलने आजमगढ़ जाऊंगी। मंजू के पति जोगेंद्र देशवाल भी बेहद खुश हैं।
सबसे पहले पूर्व सीएम की बेटी से पढ़ते थे सतपाल और देव
देव ने बताया कि उसने म्यूजिक में एमए किया है। वे प्रदेश के पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा की बेटी प्रोफेसर भारती शर्मा के पास बैठते थे। उसी दोस्ती के चलते वह सतपाल से मिलने उसके घर लाढौत गया था, जहां उसकी भाभी को मायके वालों से मिलाने का माध्यम बनकर खुश हूं।