हरियाणा: अंबाला में राफेल की तैनाती ही नहीं, कलपुर्जे और उपकरणों का हो सकता है निर्माण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 29 Jul 2020 12:16 PM IST
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राफेल लड़ाकू विमान (फाइल फोटो)
राफेल लड़ाकू विमान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

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राफेल की पहली खेप 29 जुलाई को अंबाला पहुंच जाएगी। इस खेप में शामिल पांचों राफेल लड़ाकू विमानों को फ्रांस की दासो एविएशन लिमिटेड कंपनी ने तैयार किया है। मगर इस कंपनी द्वारा भारत के साथ इस प्रोजेक्ट को लेकर किए गए ऑफसेट एग्रीमेंट के तहत काम आगे बढ़ा। आने वाले समय में राफेल के कलपुर्जे व अन्य उपकरण अंबाला में ही तैयार होंगे। अंबाला की वैशेषिका इकाई कई दशकों से डिफेंस से जुड़े विभिन्न उपकरण तैयार करती रही है।
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बताते चलें कि फ्रांस की इस एविएशन कंपनी में राफेल के प्रोजेक्ट के तहत ऑफसेट एग्रीमेंट किया हुआ। जिसके तहत करीब 30 हजार करोड़ के कलपुर्जे व उपकरण भारत की डिफेंस कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों से तैयार करवाने की बात कही गई। इसके लिए इस फ्रेंच एविएशन कंपनी ने भारत में प्राइवेट और गवर्नमेंट सेक्टर की 72 ऐसी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को चिह्नित किया है जो डिफेंस प्रोडक्शन में काम कर रही हैं।
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इन्हीं इकाइयों में से कई मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ऐसी हैं। जिसके लिए अंबाला की साइंस इंडस्ट्री खासकर वैशेषिका काफी समय से सैन्य उपकरण व कलपुर्जे उपलब्ध करवाती है। मिराज, जगुआर समेत अन्य लाइट कॉम्बैट एअरक्रॉफ्ट के साथ-साथ ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के कलपुर्जे व उपकरण अंबाला की साइंस इंडस्ट्री में तैयार होते हैं।

विशेषज्ञ डॉ. अनिल जैन बताते हैं कि अंबाला की साइंस इंडस्ट्री कई सैन्य उपकरण अमेरिका की एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के तकनीकी सहयोग से इंडियन एयरफोर्स स्टेशन सेंट्रल कॉलेब्रेशन लेबोरेटरी को भी सैन्य उपकरण सप्लाई करता है। डॉ. अनिल जैन ने बताया कि यदि फ्रेंच एविएशन कंपनी दासो और केंद्र सरकार के बीच हुआ ऑफसेट एग्रीमेंट आगे बढ़ता है। तो संभावित है कि आने वाले समय में राफेल के कलपुर्जे व उपकरण भी अंबाला में ही तैयार होंगे।

हवा में हुआ राफेल का रिफलिंग ट्रायल
अंबाला आने से पहले राफेल विमान की फ्रेंच एयरफोर्स की मदद से रिफिलिंग भी की गई। दरअसल, इस विमान में यह खासियत है कि यदि युद्ध भूमिका में इस लड़ाकू विमान को फ्यूल की जरूरत पड़ती है। तो दूसरे विमान के जरिये हवा में ही इसकी रिफिलिंग की जा सकती है। भारत पहुंचने से पहले फ्रेंच एयरफोर्स के विमानों की मदद से राफेल का यह ट्रायल भी लिया गया। सूत्र बताते हैं कि राफेल में फ्यूल खीरी फिलिंग की ट्रेनिंग भी भारतीय पायलेट को दी गई है। राफेल के भारत आने के बाद रिफिलिंग का यह ट्रायल यहां भी किया जाएगा।
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