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अंबाला के एयरबेस में तैनात होगा राफेल लड़ाकू विमान, ये होंगी खासियतें
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा)
Updated Tue, 03 Oct 2017 09:08 AM IST
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- फोटो : File Photo
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चौथी प्लस पीढ़ी के मीडियम मल्टी रोल का बेक्ट एयरक्रॉफ्ट राफेल जेट फाइटर की तैनाती एयरफोर्स के 78 साल पुराने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में की जाएगी। एयरफोर्स ने राफेल विमानों के लिए ढांचा तैयार करना शुरू कर दिया है। एयरफोर्स की बठिंडा में तैनात गोल्डन एरो स्क्वाड्रन अंबाला में शिफ्ट की जाएगी। इसके पायलट इस समय राफेल विमानों के संचालन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। अंबाला के अलावा पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस राफेल विमानों का दूसरा अड्डा होगा।
पाकिस्तान की सीमा से 250 किलोमीटर की दूरी पर अंबाला एयरबेस में राफेल विमानों की तैनाती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस एयरबेस पर आधुनिक विमान होने से वायुसेना की मारक क्षमता पाकिस्तान के अंदरूनी क्षेत्रों में पहले से ज्यादा हो जाएगी। बता दें कि बीते वर्ष सितंबर माह में एयरफोर्स ने 36 राफेल विमानों की खरीद का सौदा 59 हजार करोड़ में फ्रांस से तय किया है। वायुसेना के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि सितंबर 2019 तक राफेल विमानों की तैनाती हो सकती है।
राफेल की खूबी
- राडार वानंग रिसीवर, लो बैंड जैमर, इन्फरा रेड सर्च, दस घंटे तक लाइट डाटा रिकार्डिंग, बीवीआर (बियांड वियुजवल रेंज) एयर टू एयर मिसाइल।
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पाकिस्तान की सीमा से 250 किलोमीटर की दूरी पर अंबाला एयरबेस में राफेल विमानों की तैनाती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस एयरबेस पर आधुनिक विमान होने से वायुसेना की मारक क्षमता पाकिस्तान के अंदरूनी क्षेत्रों में पहले से ज्यादा हो जाएगी। बता दें कि बीते वर्ष सितंबर माह में एयरफोर्स ने 36 राफेल विमानों की खरीद का सौदा 59 हजार करोड़ में फ्रांस से तय किया है। वायुसेना के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि सितंबर 2019 तक राफेल विमानों की तैनाती हो सकती है।
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राफेल की खूबी
- राडार वानंग रिसीवर, लो बैंड जैमर, इन्फरा रेड सर्च, दस घंटे तक लाइट डाटा रिकार्डिंग, बीवीआर (बियांड वियुजवल रेंज) एयर टू एयर मिसाइल।
तो दोहराया जाएगा इतिहास
परमाणु मिसाइल दागने में सक्षम है राफेल
फ्रांस निर्मित राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन में मार करने में कारगर है। साथ ही टोही मिशन में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है। राफेल विभिन्न किस्म की मिसाइलों के अलावा परमाणु मिसाइल दागने में भी सक्षम है। राफेल की तैनाती से अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में विमान के हैंगर, रखरखाव, जांच और अन्य तरह का ढांचा तैयार किया जा रहा है। फ्रांस एयरफोर्स के अलावा राफेल निर्माता कंपनी डसाल्ट की टीमें निरीक्षण कर चुकी हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा राफेल के करीब 14 शेल्टर, हैंगर और रखरखाव सुविधा के लिए 220 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं।
तो दोहराया जाएगा इतिहास
अंबाला एयरबेस में इस समय जगुआर विमानों की दो स्क्वाड्रन है, जबकि एक मिग-21 (बाइसन) की स्क्वाड्रन है। ब्रिटेन निर्मित जगुआर विमानों की पहली स्क्वाड्रन साल 1979 में पहली बार अंबाला एयरबेस में आई थी। तैनाती से पहले एयरफोर्स के पायलटों को ब्रिटेन में प्रशिक्षित किया गया था। जगुआर हवा से जमीन में मार करने की क्षमता रखता है, जबकि मिग-21 हवा से हवा में मार करने के लिए बना है।
दोनों विमान अपनी निर्धारित समय अवधि पूरी कर चुके हैं। अब अपग्रेड करके एयरफोर्स इन विमानों का प्रयोग कर रही है। अब जरूरत एक आधुनिक विमान की है जो हवा से हवा में मार करने और हवा से जमीन पर हमला करने में कारगर हो। इसीलिए आधुनिक राफेल विमान की तैनाती अंबाला में की जा रही है। अगले करीब 40 वर्षों तक इस विमान का प्रयोग करने की योजना है।
फ्रांस निर्मित राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन में मार करने में कारगर है। साथ ही टोही मिशन में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है। राफेल विभिन्न किस्म की मिसाइलों के अलावा परमाणु मिसाइल दागने में भी सक्षम है। राफेल की तैनाती से अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में विमान के हैंगर, रखरखाव, जांच और अन्य तरह का ढांचा तैयार किया जा रहा है। फ्रांस एयरफोर्स के अलावा राफेल निर्माता कंपनी डसाल्ट की टीमें निरीक्षण कर चुकी हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा राफेल के करीब 14 शेल्टर, हैंगर और रखरखाव सुविधा के लिए 220 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं।
तो दोहराया जाएगा इतिहास
अंबाला एयरबेस में इस समय जगुआर विमानों की दो स्क्वाड्रन है, जबकि एक मिग-21 (बाइसन) की स्क्वाड्रन है। ब्रिटेन निर्मित जगुआर विमानों की पहली स्क्वाड्रन साल 1979 में पहली बार अंबाला एयरबेस में आई थी। तैनाती से पहले एयरफोर्स के पायलटों को ब्रिटेन में प्रशिक्षित किया गया था। जगुआर हवा से जमीन में मार करने की क्षमता रखता है, जबकि मिग-21 हवा से हवा में मार करने के लिए बना है।
दोनों विमान अपनी निर्धारित समय अवधि पूरी कर चुके हैं। अब अपग्रेड करके एयरफोर्स इन विमानों का प्रयोग कर रही है। अब जरूरत एक आधुनिक विमान की है जो हवा से हवा में मार करने और हवा से जमीन पर हमला करने में कारगर हो। इसीलिए आधुनिक राफेल विमान की तैनाती अंबाला में की जा रही है। अगले करीब 40 वर्षों तक इस विमान का प्रयोग करने की योजना है।