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नहीं मिल रहे रेडियोलॉजिस्ट, दो साल से अल्ट्रासाउंड ठप
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़/मनीमाजरा
Updated Tue, 10 May 2016 11:09 AM IST
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शहर के सिविल अस्पतालों में पिछले दो वर्षों से अल्ट्रासाउंड ठप हैं। पेशेंट को प्राइवेट सेंटरों में जाकर अल्ट्रासाउंड करना पड़ रहा है। जहां उन्हें दोगुने दाम पर जांच करानी पड़ रही है। मनीमाजरा और सेक्टर 22 हास्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि वह पेशेंट को जीएमएसएच-16 रेफर करते हैं, लेकिन वहां भीड़ होने के कारण उन्हें लंबी वेटिंग दे दी जाती है। मजबूरी में मरीज प्राइवेट सेंटरों में जांच कराना मुनासिब समझते हैं।
जीएमएसएच-16 में अल्ट्रासाउंड होते हैं, लेकिन वहां मरीजों का बोझ अधिक है। बताया जा रहा है कि मनीमाजरा में मशीन ठीक है, लेकिन उसमें ताला लगा रखा है। सबसे अधिक परेशानी प्रेग्नेंट महिलाओं को होती है। इस हालत में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना उनके लिए मुश्किल भरा होता है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट न मिलने से ये हालात बने हैं। तीन पोस्टों के लिए कई बार इंटरव्यू निकाले, लेकिन डॉक्टर नहीं आते।
इसलिए नहीं आते रेडियोलॉजिस्ट
अल्ट्रासाउंड न होने के पीछे प्रमुख वजह यह है कि सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्टों की कमी है। बताया जा रहा है कि दो वर्षों में कई बार रेडियोलॉजिस्ट के इंटरव्यू के लिए कॉल की गई। लेकिन कोई नहीं आया। रेडियोलॉजिस्ट के लिए जो सैलरी ऑफर की जाती है, वह बहुत कम है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग एनएचएम के तहत उन्हें 75 हजार प्रति माह के हिसाब से सैलरी ऑफर करता है। जबकि प्राइवेट हास्पिटल रेडियोलॉजिस्ट को डेढ़ लाख रुपये तक सैलरी ऑफर करते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में कौन आना चाहेगा।
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टेंडर भी निकाले, लेकिन बात नहीं बनी
कुछ महीने पहले पीपीपी मॉडल के तहत अल्ट्रासाउंड चलाने के लिए टेंडर निकाले गए थे। दो कंपनियां भी आईं, लेकिन तकनीकी कारणों से सक्सेसफुल नहीं हो पाया। इसके बाद से स्थिति जस की तस बनी है। न तो रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए कुछ किया और न ही दोबारा से टेंडर निकालने पर विचार किया गया।
कोट
रेडियोलॉजिस्टों की सैलरी दूसरे विशेषज्ञों से अधिक है। दरअसल रेडियोलॉजिस्ट की संख्या कम है, इसलिए दिक्कत आ रही थी। कुछ पोस्टें मंजूर हो गईं हैं। प्लानिंग है कि कुछ रेडियोलॉजिस्ट कुछ समय के लिए मनीमाजरा या सेक्टर 22 में लगाएं। इससे यह समस्या जल्द हल होगी।
-डॉ. वनीता गुप्ता, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस चंडीगढ़ प्रशासन।
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जीएमएसएच-16 में अल्ट्रासाउंड होते हैं, लेकिन वहां मरीजों का बोझ अधिक है। बताया जा रहा है कि मनीमाजरा में मशीन ठीक है, लेकिन उसमें ताला लगा रखा है। सबसे अधिक परेशानी प्रेग्नेंट महिलाओं को होती है। इस हालत में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना उनके लिए मुश्किल भरा होता है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट न मिलने से ये हालात बने हैं। तीन पोस्टों के लिए कई बार इंटरव्यू निकाले, लेकिन डॉक्टर नहीं आते।
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इसलिए नहीं आते रेडियोलॉजिस्ट
अल्ट्रासाउंड न होने के पीछे प्रमुख वजह यह है कि सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्टों की कमी है। बताया जा रहा है कि दो वर्षों में कई बार रेडियोलॉजिस्ट के इंटरव्यू के लिए कॉल की गई। लेकिन कोई नहीं आया। रेडियोलॉजिस्ट के लिए जो सैलरी ऑफर की जाती है, वह बहुत कम है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग एनएचएम के तहत उन्हें 75 हजार प्रति माह के हिसाब से सैलरी ऑफर करता है। जबकि प्राइवेट हास्पिटल रेडियोलॉजिस्ट को डेढ़ लाख रुपये तक सैलरी ऑफर करते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में कौन आना चाहेगा।
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टेंडर भी निकाले, लेकिन बात नहीं बनी
कुछ महीने पहले पीपीपी मॉडल के तहत अल्ट्रासाउंड चलाने के लिए टेंडर निकाले गए थे। दो कंपनियां भी आईं, लेकिन तकनीकी कारणों से सक्सेसफुल नहीं हो पाया। इसके बाद से स्थिति जस की तस बनी है। न तो रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए कुछ किया और न ही दोबारा से टेंडर निकालने पर विचार किया गया।
कोट
रेडियोलॉजिस्टों की सैलरी दूसरे विशेषज्ञों से अधिक है। दरअसल रेडियोलॉजिस्ट की संख्या कम है, इसलिए दिक्कत आ रही थी। कुछ पोस्टें मंजूर हो गईं हैं। प्लानिंग है कि कुछ रेडियोलॉजिस्ट कुछ समय के लिए मनीमाजरा या सेक्टर 22 में लगाएं। इससे यह समस्या जल्द हल होगी।
-डॉ. वनीता गुप्ता, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस चंडीगढ़ प्रशासन।