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ओपीडी की भीड़ को ऐसे संभालेगा पीजीआई चंडीगढ़ का क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, टिकट वेंडिंग मशीन
Tue, 23 Jul 2019 02:01 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 23 Jul 2019 02:01 PM IST
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पीजीआई की ओपीडी में लाइनों में लगे मरीज
- फोटो : फाइल फोटो
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पीजीआई चंडीगढ़ में आया मरीज सबसे ज्यादा ओपीडी में परेशान होता है। कार्ड बनाने से लेकर टेस्ट जांच की फीस जमा कराने तक उसे काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। काफी धक्का-मुक्की के बाद मरीज जब डाक्टर के पास पहुंचता है तो उसे वहां भी इंतजार के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं होता। वेटिंग एरिया पर पैर रखने तक की जगह नहीं होती।
कई मरीज तो इंतजार कर लौट जाते हैं क्योंकि उनका नंबर तक नहीं आता। पीजीआई ने अब इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते दिल्ली में पीजीआई की स्टैंडिंग फाइनेंस मीटिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओपीडी के क्यू मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इस सिस्टम को लागू होने में कम से कम आठ महीने से एक साल का वक्त लग सकता है।
पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी का कहना है कि ओपीडी की भीड़ को मैनेज करना संस्थान का अगला लक्ष्य है। इसकी तैयारी में जुट चुके हैं। कोशिश रहेगी कि इस सिस्टम को कम से कम समय पर लागू किया जाए। करीब आठ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट किस तरह से ओपीडी में काम करेगा, जानते हैं इस रिपोर्ट में।
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कई मरीज तो इंतजार कर लौट जाते हैं क्योंकि उनका नंबर तक नहीं आता। पीजीआई ने अब इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते दिल्ली में पीजीआई की स्टैंडिंग फाइनेंस मीटिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओपीडी के क्यू मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इस सिस्टम को लागू होने में कम से कम आठ महीने से एक साल का वक्त लग सकता है।
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पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी का कहना है कि ओपीडी की भीड़ को मैनेज करना संस्थान का अगला लक्ष्य है। इसकी तैयारी में जुट चुके हैं। कोशिश रहेगी कि इस सिस्टम को कम से कम समय पर लागू किया जाए। करीब आठ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट किस तरह से ओपीडी में काम करेगा, जानते हैं इस रिपोर्ट में।
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अभी ओपीडी का सिस्टम क्या है
ओपीडी में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए मरीज को सबसे पहले लाइन में लगना पड़ता है। दो से तीन घंटे इंतजार के बाद उसका कार्ड बनता है। कार्ड बनने के बाद मरीज को डाक्टर के रूम के बाहर इंतजार करना पड़ता है। यदि डाक्टर ने टेस्ट लिख दिए तो फीस जमा करने वाली लाइन में लगना पड़ता है। फिर फीस जमा कराने के बाद सैंपल कलेक्शन सेंटर में जाना पड़ता है और वहां भी लाइन मिलती है।
यहां यदि साढ़े 12 बजे के बाद पहुंचे तो आपको अगले दिन सैंपल कलेक्शन सेंटर में बुलाया जाएगा। ऐसे में ओपीडी की पूरी प्रक्रिया में पूरा दिन गुजर जाता है। इस दौरान मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो मरीज का कार्ड तक गुम हो जाता है या पहला नंबर होने के बावजूद उसे ओपीडी खत्म होने तक इंतजार करना पड़ता है।
नया सिस्टम कैसे काम करेगा
पीजीआई ओपीडी की भीड़ को मैनेज करने के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम ला रहा है। ओपीडी के अंदर जगह-जगह क्योस्क (टिकट वेंडिंग मशीन) होंगे। क्योस्क के माध्यम से मरीज या तीमारदार कार्ड बनवाने के साथ अपनी फीस भी जमा कर सकेंगे। इससे भीड़ छंट जाएगी। साथ ही टोकन नंबर भी मिलेगा, जो बोर्ड में डिस्प्ले करेगा कि किस टोकन नंबर वाले मरीज को देखा जा रहा है।
मरीज इससे यह भी अंदाजा लगा सकेगा कि उसका नंबर कितनी देर में आएगा। इससे वह वेंटिंग एरिया में बैठकर इंतजार कर सकेगा। यदि उसे कहीं जाना होगा तो वह जा भी सकेगा।
यहां यदि साढ़े 12 बजे के बाद पहुंचे तो आपको अगले दिन सैंपल कलेक्शन सेंटर में बुलाया जाएगा। ऐसे में ओपीडी की पूरी प्रक्रिया में पूरा दिन गुजर जाता है। इस दौरान मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो मरीज का कार्ड तक गुम हो जाता है या पहला नंबर होने के बावजूद उसे ओपीडी खत्म होने तक इंतजार करना पड़ता है।
नया सिस्टम कैसे काम करेगा
पीजीआई ओपीडी की भीड़ को मैनेज करने के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम ला रहा है। ओपीडी के अंदर जगह-जगह क्योस्क (टिकट वेंडिंग मशीन) होंगे। क्योस्क के माध्यम से मरीज या तीमारदार कार्ड बनवाने के साथ अपनी फीस भी जमा कर सकेंगे। इससे भीड़ छंट जाएगी। साथ ही टोकन नंबर भी मिलेगा, जो बोर्ड में डिस्प्ले करेगा कि किस टोकन नंबर वाले मरीज को देखा जा रहा है।
मरीज इससे यह भी अंदाजा लगा सकेगा कि उसका नंबर कितनी देर में आएगा। इससे वह वेंटिंग एरिया में बैठकर इंतजार कर सकेगा। यदि उसे कहीं जाना होगा तो वह जा भी सकेगा।
कुछ इस तरह से काम करेगी टिकट वेंडिंग मशीन
जब पेशेंट ओपीडी के अंदर दाखिल होगा तो वहां टिकट वेंडिंग मशीन लगी होगी। मशीन में वह अपना नाम, उम्र, मोबाइल नंबर व ईमेल आदि जरूरी जानकारी फीड करेगा। इसके बाद कियोस्क एक यूआईडी नंबर जेनरेट करेगा। फिर किस ओपीडी में दिखाना है, उसे चुनना होगा। इसके बाद मरीज या तीमारदार को पेमेंट का ऑप्शन चुनकर कार्ड की पेमेंट करनी होगी। इसके साथ ही मरीज का टोकन नंबर व कार्ड जेनरेट हो जाएगा। इसके बाद मरीज को मुख्य वेटिंग एया में जाना होगा। जहां डिस्प्ले बोर्ड पर टोकन नंबर शो हो रहे होंगे।
यहां मरीज को यह पता लग जाएगा कि उसका नंबर कब आएगा और उसे किस फ्लोर पर जाना है। इसके बाद उसे डाक्टर के बुलावे का इंतजार करना होगा। डाक्टर के बुलाने पर वह रूम में जाएगा और डाक्टर से परामर्श लेगा। यदि डाक्टर ने टेस्ट लिखे हैं तो वही टोकन नंबर टेस्ट काउंटर पर देना होगा। टेस्ट काउंटर पर भी इसी तरह से प्रक्रिया जारी रहेगी। मरीज मोाबाइल एप के जरिए भी टोकन नंबर जेनरेट कर सकेंगे। इसके लिए मोबाइल एप भी लांच किया जाएगा। बता दें कि ओपीडी एरिया में 20 टिकट वेंडिंग मशीन इंस्टाल होंगी।
ओपीडी में कब तक लागू होगा नया सिस्टम
पीजीआई के मुताबिक इस सिस्टम को लागू होने में कम से कम सात से आठ महीने का वक्त लग सकता है। एसएफसी की मीटिंग में इसमें खर्च होने वाली राशि को पास किया जा चुका है। यदि सब कुछ पीजीआई के मुताबिक चलता रहा तो अगले साल फरवरी तक यह सिस्टम पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज में काफी सहूलियत मिल सकेगी।
यहां मरीज को यह पता लग जाएगा कि उसका नंबर कब आएगा और उसे किस फ्लोर पर जाना है। इसके बाद उसे डाक्टर के बुलावे का इंतजार करना होगा। डाक्टर के बुलाने पर वह रूम में जाएगा और डाक्टर से परामर्श लेगा। यदि डाक्टर ने टेस्ट लिखे हैं तो वही टोकन नंबर टेस्ट काउंटर पर देना होगा। टेस्ट काउंटर पर भी इसी तरह से प्रक्रिया जारी रहेगी। मरीज मोाबाइल एप के जरिए भी टोकन नंबर जेनरेट कर सकेंगे। इसके लिए मोबाइल एप भी लांच किया जाएगा। बता दें कि ओपीडी एरिया में 20 टिकट वेंडिंग मशीन इंस्टाल होंगी।
ओपीडी में कब तक लागू होगा नया सिस्टम
पीजीआई के मुताबिक इस सिस्टम को लागू होने में कम से कम सात से आठ महीने का वक्त लग सकता है। एसएफसी की मीटिंग में इसमें खर्च होने वाली राशि को पास किया जा चुका है। यदि सब कुछ पीजीआई के मुताबिक चलता रहा तो अगले साल फरवरी तक यह सिस्टम पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज में काफी सहूलियत मिल सकेगी।