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पंजाब बजट सत्रः विधानसभा में बिजली-पानी के मुद्दों पर सियासत, नाराज दिखे ‘अपने’ और ‘पराए’
Tue, 25 Feb 2020 01:55 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Feb 2020 01:55 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब विधानसभा में बिजली और पानी के मसले पर भी जमकर सियासत हुई। जनहित से जुड़े दोनों मुद्दों पर सरकार से ‘अपने’ और ‘पराए’ दोनों ही थोड़े नाराज दिखाई दिए। विधायकों ने अपने-अपने अंदाज में जहां इन मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से सदन में उठाया, वहीं इन मुद्दों पर विधायकों ने तंज भी कसे। विधायक नैना चौटाला ने बाढ़डा के गांव दातौली में पीने के पानी की समस्या के चलते ग्रामीणों द्वारा विधानसभा और लोकसभा के चुनाव बहिष्कार करने की बात बताते हुए ग्रामीणों के लिए पीने का शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग की।
नैना ने कहा कि चुनाव में इन गांव के लोगों ने किसी भी राजनेताओं को अपने गांव में घुसने तक नहीं दिया था। ये बड़ी गंभीर बात है, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। विधायक आफताब अहमद ने नहरी पानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मेवात इलाका आज भी पूरी तरह से नहरी पानी पर ही आश्रित है। मगर विडंबना यह है कि इस इलाके में सरकार आज भी पर्याप्त पानी पहुंचाने में नाकामयाब साबित हुई है। सिंचाई के लिए भी किसानों के पास पर्याप्त पानी नहीं हैं। जिस वजह से किसान बहुत परेशान रहते हैं।
सरकार मेवात क्षेत्र की इस समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। विधायक मोहम्मद इलियास ने अपने खास अंदाज में मेवात में पानी किल्लत के मुद्दे पर सरकार को घेराबंदी भी की और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से समस्या को हल करने की मांग भी कर डाली। उन्होंने कहा कि मेवात इलाका अंतिम टेल में आता है, इसलिए इस इलाके को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। जहां पानी है, वहां काम चल रहा है। हम ये नहीं कहते कि पूरे प्रदेश में पर्याप्त पानी मिल रहा है, मगर ये जरूर कहना चाहेंगे कि मेवात आज भी पिछड़े इलाके में से एक है।
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मोहम्मद इलियास के अनुसार सीएम बहुत ही नरम स्वभाव के हैं और वे इस मसले को लेकर सीएम से पहले भी मिल चुके हैं। इसलिए मेवात के लोगों को पूरी उम्मीद है कि सीएम जल योजनाओं के मामले में मेवात को मायूस नहीं करेंगे, वे जरूर पानी उपलब्ध करवाने का रास्ता निकालेंगे।
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नैना ने कहा कि चुनाव में इन गांव के लोगों ने किसी भी राजनेताओं को अपने गांव में घुसने तक नहीं दिया था। ये बड़ी गंभीर बात है, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। विधायक आफताब अहमद ने नहरी पानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मेवात इलाका आज भी पूरी तरह से नहरी पानी पर ही आश्रित है। मगर विडंबना यह है कि इस इलाके में सरकार आज भी पर्याप्त पानी पहुंचाने में नाकामयाब साबित हुई है। सिंचाई के लिए भी किसानों के पास पर्याप्त पानी नहीं हैं। जिस वजह से किसान बहुत परेशान रहते हैं।
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सरकार मेवात क्षेत्र की इस समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। विधायक मोहम्मद इलियास ने अपने खास अंदाज में मेवात में पानी किल्लत के मुद्दे पर सरकार को घेराबंदी भी की और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से समस्या को हल करने की मांग भी कर डाली। उन्होंने कहा कि मेवात इलाका अंतिम टेल में आता है, इसलिए इस इलाके को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। जहां पानी है, वहां काम चल रहा है। हम ये नहीं कहते कि पूरे प्रदेश में पर्याप्त पानी मिल रहा है, मगर ये जरूर कहना चाहेंगे कि मेवात आज भी पिछड़े इलाके में से एक है।
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मोहम्मद इलियास के अनुसार सीएम बहुत ही नरम स्वभाव के हैं और वे इस मसले को लेकर सीएम से पहले भी मिल चुके हैं। इसलिए मेवात के लोगों को पूरी उम्मीद है कि सीएम जल योजनाओं के मामले में मेवात को मायूस नहीं करेंगे, वे जरूर पानी उपलब्ध करवाने का रास्ता निकालेंगे।
एसवाईएल पर घेराबंदी
विधायक राव दान सिंह ने एसवाईएल पर घेराबंदी करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि एसवाईएल पर जो प्रयास होने चाहिए, सरकार वो नहीं कर रही है। बस, हम यही सुनते आ रहे हैं कि ‘पानी आएगा...पानी आएगा...लेकिन मैं कहता हूं, हां पानी जरूर आएगा, मगर एसवाईएल में नहीं, किसान की आंखों में’ उधर, विधायक अभय सिंह यादव ने कहा कि जितना पानी प्रदेश को मिलना चाहिए उतना नहीं मिल रहा है।
जिससे दक्षिणी हरियाणा में सूखे की स्थिति है। असमान जल वितरण के कारण प्रदेश में कहीं जल भराव है तो कहीं सूखा। भाखड़ा से पानी लाने का दूसरा बड़ा माध्यम नरवाना ब्रांच है। जब ये शुरू हुई तो इसमें 4200 क्यूसिक पानी आता था। मगर अब ये जर्जर स्थिति है। अब इसमें 3400 क्यूसिक पानी आता है, जिसमें से 500 क्यूसिक पानी दिल्ली के हिस्से का है।
ये तो बता दो, अब तक कितने नए बिजली प्लांट लगाए
बिजली के मसले पर भी विधायक सरकार पर हमलावर हुए। विधायक राव दान सिंह व गीता भुक्कल ने कहा कि सरकार ये तो बता दे कि अब तक प्रदेश में कितने बिजली उत्पादक प्लांट लगाए गए हैं। उनके अनुसार प्लांट तो लगाना दूर, जो प्लांट कांग्रेस कार्यकाल के थे, वो भी बंद होते जा रहे हैं। खुद की बिजली पैदा करने की बजाए सरकार बाहर से महंगी बिजली खरीद रही है।
यदि सरकार ने एक यूनिट बिजली पैदा करने के लिए कोई नया प्लांट लगाया है, तो बताए। दूसरी ओर, ढाणियों में अभी तक पूरी तरह बिजली सप्लाई न होने पर विधायक अभय यादव ने कहा कि ‘21वीं सदी में भी बच्चे लालटेन में पढ़े तो ये अच्छी बात नहीं है।’ इसलिए सरकार से मांग है कि जो ढाणियां अभी बिजली कनेक्शन से वंचित हैं, वहां जल्द ये सुविधा दी जाए।
हरियाणा में बिजली की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के पास सरप्लस बिजली है। हम बहुत से गांवों को जहां 24 घंटे बिजली दे रहे हैं, वहीं कृषि कार्यों के लिए भी 10 घंटे बिजली दे रहे हैं। हमने लाइन लास भी अपेक्षाकृत बहुत कम किया है। बिजली वितरण कंपनियां भी दो साल से फायदे में हैं। जिन विधायकों की जो शिकायतें हैं, उस पर भी विचार करेंगे।
- रणजीत चौटाला, बिजली मंत्री, हरियाणा सरकार
जिससे दक्षिणी हरियाणा में सूखे की स्थिति है। असमान जल वितरण के कारण प्रदेश में कहीं जल भराव है तो कहीं सूखा। भाखड़ा से पानी लाने का दूसरा बड़ा माध्यम नरवाना ब्रांच है। जब ये शुरू हुई तो इसमें 4200 क्यूसिक पानी आता था। मगर अब ये जर्जर स्थिति है। अब इसमें 3400 क्यूसिक पानी आता है, जिसमें से 500 क्यूसिक पानी दिल्ली के हिस्से का है।
ये तो बता दो, अब तक कितने नए बिजली प्लांट लगाए
बिजली के मसले पर भी विधायक सरकार पर हमलावर हुए। विधायक राव दान सिंह व गीता भुक्कल ने कहा कि सरकार ये तो बता दे कि अब तक प्रदेश में कितने बिजली उत्पादक प्लांट लगाए गए हैं। उनके अनुसार प्लांट तो लगाना दूर, जो प्लांट कांग्रेस कार्यकाल के थे, वो भी बंद होते जा रहे हैं। खुद की बिजली पैदा करने की बजाए सरकार बाहर से महंगी बिजली खरीद रही है।
यदि सरकार ने एक यूनिट बिजली पैदा करने के लिए कोई नया प्लांट लगाया है, तो बताए। दूसरी ओर, ढाणियों में अभी तक पूरी तरह बिजली सप्लाई न होने पर विधायक अभय यादव ने कहा कि ‘21वीं सदी में भी बच्चे लालटेन में पढ़े तो ये अच्छी बात नहीं है।’ इसलिए सरकार से मांग है कि जो ढाणियां अभी बिजली कनेक्शन से वंचित हैं, वहां जल्द ये सुविधा दी जाए।
हरियाणा में बिजली की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के पास सरप्लस बिजली है। हम बहुत से गांवों को जहां 24 घंटे बिजली दे रहे हैं, वहीं कृषि कार्यों के लिए भी 10 घंटे बिजली दे रहे हैं। हमने लाइन लास भी अपेक्षाकृत बहुत कम किया है। बिजली वितरण कंपनियां भी दो साल से फायदे में हैं। जिन विधायकों की जो शिकायतें हैं, उस पर भी विचार करेंगे।
- रणजीत चौटाला, बिजली मंत्री, हरियाणा सरकार