पीजीआई की प्लेजरिजम की गाइडलाइंस पर उठे सवाल
पीजीआई में प्लेजरिजम (शोधपत्र में डाटा कापी करना) पर बनाई गई नई गाइडलाइंस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गाइडलाइंस में यह कहीं भी प्रावधान नहीं किया गया कि आखिर प्लेजरिजम के आरोपी पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
जांच कितने समय में पूरी होनी है, इसके बारे में भी कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। सिर्फ इतना उल्लेख किया गया कि जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। उसका समय तय होगा, लेकिन कितना होगा इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पीजीआई मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह गाइडलाइंस को बचाने के लिए बनाई गई हैं। अहम सवाल यह है कि आखिर इतने दिनों बाद गाइडलाइंस क्यों बनाई गई। जो पहले पकड़े गए हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी या की जा रही है?
पकड़े जाने पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इसका उल्लेख नहीं
यदि डॉक्टर के बजाय कोई कर्मचारी पकड़ा जाए तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, जबकि आज तक डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीजीआई ने बीते महीने ही प्लेजरिज्म पर नई गाइडलाइंस बनाई है। इसके तहत किसी भी शोध पत्र में नकल के दस शब्द भी प्लेजरिजम के आरोप में गिना जाएगा।
सभी फैकल्टी मेंबरों को निर्देश दिया गया है कि वह प्लेजरिजम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें। जब भी कोई शोध जमा कराया जाए तो उसके साथ प्लेजरिजम वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जरूर होना चाहिए।
पीजीआई में पिछले दिनों प्लेजरिजम के कई मामले सामने आए थे। उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पहले हवाला दिया गया था प्लेजरिजम को लेकर कोई गाइडलाइंस नहीं है, अब जब गाइडलाइंस बनी है तो आरोपी पर क्या कार्रवाई की जाएगी, उसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है।