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इन्होंने सुखना को बचाने का ऐसा आईडिया दिया, सभी ने सराहा
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 27 Nov 2016 10:26 AM IST
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डिप्टी मैनेजर के पद से रिटायर पूरण चंद
- फोटो : अमर उजाला
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सुखना झील के गिरते जलस्तर की समस्या से परेशान यूटी प्रशासन के सामने एचएमटी से डिप्टी मैनेजर के पद से रिटायर हुए पूरण चंद ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत कम लागत में ही हमेशा के लिए सुखना के गिरते जलस्तर की समस्या दूर हो सकती है।
पूरण के इस प्रोजेक्ट पर काम पूरा होने से पहले ही इसके लिए उन्हें हर ओर से सराहना मिल रही है। यहां तक कि हरियाणा, पंजाब और यूटी के इंजीनियरों के बाद अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी उनकी काबिलियत का लोहा माना है। दिलचस्प है कि आज वाहवाही लूटने वाले यह वही पूरण चंद हैं, जिन्हें कभी गणित विषय में जीरो नंबर पाने के कारण फेल होना पड़ा था। इसके विपरीत उन्होंने घग्गर की सहायक बरसाती नदी को सुखना की ओर मोड़ने का प्रोजेक्ट तैयार कर यह साबित कर दिया कि जीवन में असफलताओं से भी सीख लेकर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
पूरण के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है कि हाईकोर्ट ने भी उनके प्रोजेक्ट पर अमल की संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए हैं। प्रोजेक्ट में दो चेक डैम दिखाया गया है। पूरण का यह भी दावा है कि उनके प्रस्ताव पर अमल हुआ तो पानी के साथ ढील में जरा सी भी सिल्ट नहीं जाएगी। वहीं वन्य जीवों को भी इसका फायदा होगा।
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पूरण के इस प्रोजेक्ट पर काम पूरा होने से पहले ही इसके लिए उन्हें हर ओर से सराहना मिल रही है। यहां तक कि हरियाणा, पंजाब और यूटी के इंजीनियरों के बाद अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी उनकी काबिलियत का लोहा माना है। दिलचस्प है कि आज वाहवाही लूटने वाले यह वही पूरण चंद हैं, जिन्हें कभी गणित विषय में जीरो नंबर पाने के कारण फेल होना पड़ा था। इसके विपरीत उन्होंने घग्गर की सहायक बरसाती नदी को सुखना की ओर मोड़ने का प्रोजेक्ट तैयार कर यह साबित कर दिया कि जीवन में असफलताओं से भी सीख लेकर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
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पूरण के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है कि हाईकोर्ट ने भी उनके प्रोजेक्ट पर अमल की संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए हैं। प्रोजेक्ट में दो चेक डैम दिखाया गया है। पूरण का यह भी दावा है कि उनके प्रस्ताव पर अमल हुआ तो पानी के साथ ढील में जरा सी भी सिल्ट नहीं जाएगी। वहीं वन्य जीवों को भी इसका फायदा होगा।
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प्रोजेक्ट में दो चेक डैम दिखाया, नहीं जाएगी पानी के साथ जरा सी भी सिल्ट
Sukhna Lake
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सुखना के गिरते जल स्तर को लेकर स्वयं संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। मामले में खंडपीठ के दोनों जज और वकीलों की टीम कई बार सुखना का दौरा कर चुकेहैं। इन्हीं दौरों के बारे में जानकारी पाने के बाद समस्या के समाधान का विकल्प कागज पर उतार कर पूरण चंद हाईकोर्ट पहुंच गए। उनका प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की कोर्ट में पेश किया गया।
हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी तनु बेदी को प्रोजेक्ट सौंपते हुए इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिए थे कि वह आम लोगों से सुखना को बचाने के लिए अपने सुझाव सौंपने को कहें। तमाम सुझाव आए, फिर भी अंतिम दौर में कोर्ट की ओर से गठित टीम ने पूरण चंद के प्रोजेक्ट के आधार पर निरीक्षण करने के लिए मौके पर पहुंची। लौटकर कोर्ट मित्र तनु बेदी और पंजाब के चीफ इंजीनियर ने प्रोजेक्ट को खूब सराहा।
प्रोजेक्ट का खाका
पूरण चंद के प्रोजेक्ट में इस बात का जिक्र है कि कसौली की ओर से आने वाली बरसाती नदी को चैक डैम बनाकर सूरजपुर के पास रोका जाए। इसके बाद सूरजपुर से इसे सकेतड़ी की ओर मोड़ा जाए। इस बीच एक छोटा पहाड़ पड़ता है, जिसे या तो पाटकर या सुरंग बना पाइप डाला जा सकता है। इसके जरिये पानी को उस पार ले जाने का सुझाव है। मात्र 150 गज की इस दूरी के बाद सकेतड़ी से पूर्व दो डैम बनाने की योजना दी गई है। इसके तहत पहले डैम से ही पानी फिल्टर हो जाएगा और दूसरे डैम को पानी रिजर्व रखने के उद्देश्य से बताया गया है।
हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी तनु बेदी को प्रोजेक्ट सौंपते हुए इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिए थे कि वह आम लोगों से सुखना को बचाने के लिए अपने सुझाव सौंपने को कहें। तमाम सुझाव आए, फिर भी अंतिम दौर में कोर्ट की ओर से गठित टीम ने पूरण चंद के प्रोजेक्ट के आधार पर निरीक्षण करने के लिए मौके पर पहुंची। लौटकर कोर्ट मित्र तनु बेदी और पंजाब के चीफ इंजीनियर ने प्रोजेक्ट को खूब सराहा।
प्रोजेक्ट का खाका
पूरण चंद के प्रोजेक्ट में इस बात का जिक्र है कि कसौली की ओर से आने वाली बरसाती नदी को चैक डैम बनाकर सूरजपुर के पास रोका जाए। इसके बाद सूरजपुर से इसे सकेतड़ी की ओर मोड़ा जाए। इस बीच एक छोटा पहाड़ पड़ता है, जिसे या तो पाटकर या सुरंग बना पाइप डाला जा सकता है। इसके जरिये पानी को उस पार ले जाने का सुझाव है। मात्र 150 गज की इस दूरी के बाद सकेतड़ी से पूर्व दो डैम बनाने की योजना दी गई है। इसके तहत पहले डैम से ही पानी फिल्टर हो जाएगा और दूसरे डैम को पानी रिजर्व रखने के उद्देश्य से बताया गया है।
घग्गर की सहायक बरसाती नदी को सुखना की ओर मोड़ने का है प्रोजेक्ट
पूरण चंद का प्रोजेक्ट
ऐसे फिल्टर होगा सुखना में जाने वाला पानी
सुखना के लिए पानी को सूरजपुर के पास चैक डैम बनाकर रोकने की योजना है। योजना के तहत बरसाती नदी में आने वाला पानी सूरजपुर से घग्गर की ओर जाने दिया जाए, क्योंकि इसमें गंदगी होती है। दूसरा पानी आते ही चैक डैम को बंद कर दिया जाए, जिससे पानी खुद ही सकेतड़ी की ओर बहने लगेगा। वहां पानी पहले डैम में एकत्रित होगा और इसकी सिल्ट तली पर बैठने लगेगी।
इसके बाद आगे की फिल्ट्रेशन इस पानी को दूसरे डैम की ओर छोड़ते समय होगा, जब वर्टिकल चैक डैम से पानी छोड़ा जाएगा। इससे सिल्ट दूसरे डैम की ओर नहीं जाएगी। दोनों डैम में एकत्रित पानी को सुखना का जल स्तर गिरते ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुझाव है कि डैम के आसपास के क्षेत्र को ईको टूरिज्म के उद्देश्य से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। जिससे न केवल इस प्रोजेक्ट की लागत निकल जाएगी, बल्कि प्रशासन राजस्व भी कमा सकेगा।
प्रोजेक्ट जितना बेहतर, इसे तैयार करने वाले का जीवन उतना ही रोचक
प्रोजेक्ट तैयार करने वाले पूरण चंद की कहानी भी कम रोचक नहीं है। पूरण चंद एचएमटी में सहायक भर्ती हुए थे। उन्होंने अब तक देश-विदेश के कई बड़े प्रोजेक्ट को अंजाम दिया है। वे जब एसीसी कंपनी के स्कूल में एडमीशन लेने पहुंचे तो एक अंग्रेज ने दाखिला देने से मनाकर दिया। इसके बाद स्थानीय स्कूल से अपनी पढ़ाई जारी रखी और दो साल बाद फिर एडमिशन के लिए जा पहुंचे। उनकी लगन को देखकर, उन्हें कंपनी के स्कूल में प्रवेश मिला।
इसके बाद आठवीं कक्षा की बोर्ड से पूर्व परीक्षा में गणित विषय में 0 अंक पाने के बाद शिक्षक से गुरुमंत्र लिया। जब बोर्ड की परीक्षा में इसी विषय में उन्होंने 98 अंक प्राप्त किए। जब चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में प्रोजेक्ट के बारे में पूरण चंद से पूछा गया तो उन्होंने खुद की बनाई हुई बीन शिक्षक को दिखा दी।
शिक्षक ने इस पर सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा कि क्या यह बीन तुमने बनाई है और क्या यह बजती है? पूरण चंद ने दोनों सवालों के जवाब हां में दिए और इसे बजाना शुरू कर दिया। सभी ने इसकी प्रशंसा की, लेकिन शिक्षक ने कहा अंक तभी मिलेंगे, जब यह बताओगे की यह बजती क्यों है। इस पर पूरण चंद ने हवा और वाईब्रेशन के बारे में जानकारी दी और सबसे अधिक अंक लेकर पास हुए।
सुखना के लिए पानी को सूरजपुर के पास चैक डैम बनाकर रोकने की योजना है। योजना के तहत बरसाती नदी में आने वाला पानी सूरजपुर से घग्गर की ओर जाने दिया जाए, क्योंकि इसमें गंदगी होती है। दूसरा पानी आते ही चैक डैम को बंद कर दिया जाए, जिससे पानी खुद ही सकेतड़ी की ओर बहने लगेगा। वहां पानी पहले डैम में एकत्रित होगा और इसकी सिल्ट तली पर बैठने लगेगी।
इसके बाद आगे की फिल्ट्रेशन इस पानी को दूसरे डैम की ओर छोड़ते समय होगा, जब वर्टिकल चैक डैम से पानी छोड़ा जाएगा। इससे सिल्ट दूसरे डैम की ओर नहीं जाएगी। दोनों डैम में एकत्रित पानी को सुखना का जल स्तर गिरते ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुझाव है कि डैम के आसपास के क्षेत्र को ईको टूरिज्म के उद्देश्य से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। जिससे न केवल इस प्रोजेक्ट की लागत निकल जाएगी, बल्कि प्रशासन राजस्व भी कमा सकेगा।
प्रोजेक्ट जितना बेहतर, इसे तैयार करने वाले का जीवन उतना ही रोचक
प्रोजेक्ट तैयार करने वाले पूरण चंद की कहानी भी कम रोचक नहीं है। पूरण चंद एचएमटी में सहायक भर्ती हुए थे। उन्होंने अब तक देश-विदेश के कई बड़े प्रोजेक्ट को अंजाम दिया है। वे जब एसीसी कंपनी के स्कूल में एडमीशन लेने पहुंचे तो एक अंग्रेज ने दाखिला देने से मनाकर दिया। इसके बाद स्थानीय स्कूल से अपनी पढ़ाई जारी रखी और दो साल बाद फिर एडमिशन के लिए जा पहुंचे। उनकी लगन को देखकर, उन्हें कंपनी के स्कूल में प्रवेश मिला।
इसके बाद आठवीं कक्षा की बोर्ड से पूर्व परीक्षा में गणित विषय में 0 अंक पाने के बाद शिक्षक से गुरुमंत्र लिया। जब बोर्ड की परीक्षा में इसी विषय में उन्होंने 98 अंक प्राप्त किए। जब चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में प्रोजेक्ट के बारे में पूरण चंद से पूछा गया तो उन्होंने खुद की बनाई हुई बीन शिक्षक को दिखा दी।
शिक्षक ने इस पर सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा कि क्या यह बीन तुमने बनाई है और क्या यह बजती है? पूरण चंद ने दोनों सवालों के जवाब हां में दिए और इसे बजाना शुरू कर दिया। सभी ने इसकी प्रशंसा की, लेकिन शिक्षक ने कहा अंक तभी मिलेंगे, जब यह बताओगे की यह बजती क्यों है। इस पर पूरण चंद ने हवा और वाईब्रेशन के बारे में जानकारी दी और सबसे अधिक अंक लेकर पास हुए।