अमर उजाला से खास बातः पीयू में छात्रों को अब चाहिए खाने और फोर व्हीलर से आजादी
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देश के विश्वविद्यालयों की दौड़ में पंजाब विश्वविद्यालय का पहला स्थान है। यहां से निकली आवाज लगभग सभी विश्वविद्यालयों तक गूंजती है। चाहे वह आवाज फीस को लेकर स्टूडेंट्स उठाएं या फिर गर्ल्स हॉस्टल 24 घंटे खुलवाने की मांग रखें। हाल ही में पीयू के इतिहास में छात्राओं को ऐसी आजादी मिली है जिसने दूसरे शिक्षण संस्थाओं की छात्राओं के लिए रास्ते खोले हैं। यहां की इस आजादी को नजीर के रूप में पेश कर दूसरे विश्वविद्यालय की छात्राएं भी अपने हक की बात करेंगी।
पीयू से गर्ल्स हॉस्टल खुलवाने को लेकर जो जंग छात्र-छात्राओं ने जीती है यह संदेश पीयू से संबंद्ध कॉलेजों तक पहुंचाया जाएगा। समाज के हर तबके तक संदेश भेजा जाएगा ताकि समाज में इस आजादी की चर्चाएं हों। स्टूडेंट्स भी लोगों के द्वार तक पहुंचेंगे। अब आजादी हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को अगली आजादी खाने की चाहिए। स्टूडेंट्स अपने पसंद का हर भोजन पीयू की कैंटीन व मेस में कर सकें। आजादी चाहिए अथॉरिटी से स्टूडेंट काउंसिल को मुक्त कराने की।
आजादी चाहिए पीयू कैंपस को फोर व्हीलर फ्री कराने की। इन तीन प्रमुख मांगों को लेकर पीयू के स्टूडेंट्स ने रणनीति बनाना शुरू कर दी है। स्टूडेंट्स ने पीयू में मिली आजादी के आंदोलन से जुड़ी बातों और संघर्ष को अमर उजाला से साझा किया।
स्टूडेंट काउंसिल को अथॉरिटी से मुक्त कराएंगे :: कनुप्रिया
स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया कहती हैं कि आजादी की नींव 2015 में ही एसएफएस की ओर से रखी गई थी। उसी विचार को लेकर आगे बढ़ना था। छात्राओं की भी यह मांग लंबे समय से चली आ रही थी। जैसे ही बीते साल 6 सितंबर को छात्र संघ चुनाव परिणाम सामने आए तो इस मांग को और बल मिल गया और इस पर काम करना शुरू कर दिया। शुरुआत मेमोरेंडम से हुई, लेकिन यह ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। कई बार डिमांड रखी गई, लेकिन अथॉरिटी ने अनसुनी कर दी। आसानी से इस मांग को पूरा कराने के खूब प्रयास हुए।
जब लगा कि यह मांग पूरी होना आसान नहीं है तो आंदोलन की रणनीति बनाकर मैदान में उतरे। समय जरूर लगा, लेकिन 48 दिन में आजादी मिल गई। मेरे पापा का दिवाली पर आदेश मिला था जीत कर ही घर आना। जब मां खुद प्रोटेस्ट में शामिल होने आई तो मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया। अब अगली आजादी स्टूडेंट काउंसिल को अथॉरिटी से चाहिए।
काउंसिल को अधिकार चाहिए। स्टूडेंट् का प्रतिनिधित्व करने वाला सीनेट में शामिल होना चाहिए। कैंपस में फोर व्हीलर बैन कराने के लिए तैयारी की जा रही है। इसके अलावा यूबीएस आदि की कैंटीन खुलवाने के प्रयास होंगे। स्टूडेंट अपने पसंद का खाना खा सकें, इसके लिए पहल होगी।
पीयू में मिली आजादी की चर्चाएं समाज के बीच शुरू कीं : विजय
विश्वविद्यालय को विचारों का टापू नहीं बनाएंगे, जन-जन तक पहुंचेगी आवाज : अमनदीप कौर
पीएसयू ललकार की मेंबर अमनदीप कौर कहती हैं कि यूनिवर्सिटी में फीस लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन क्लासरूम की हालत वहीं की वहीं है। उसमें बदलाव नहीं आया है। 75 फीसदी अटेंडेंस की बात की जा रही है, लेकिन उसे पूरा करने के लिए माहौल नहीं दिया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में पांच से सात फीसदी युवक ही उच्च शिक्षा ग्रहण करने आते हैं, बाकी स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालय तक लाना होगा। पीयू में हाल ही में आजादी को लेकर आए बदलाव को समाज तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
आर्थिक व राजनीतिक नीतियों में बदलाव जरूरी : हरमन
एसएफएस के पदाधिकारी हरमनदीप सिंह कहते हैं कि संगठन की ओर से चलाई गई आजादी की मुहिम आगे भी विभिन्न मांगों को लेकर जारी रहेगी। इस आजादी की मुहिम में छात्र-छात्राओं का पूरा साथ मिला। उनकी एकता की बदौलत ही जीत हासिल हुई है। यह संदेश अन्य विश्वविद्यालय व कॉलेजों तक भी गया है। समाज में भी इसका संदेश गया है।
देश की आर्थिक व राजनीतिक नीतियों का संचालन ऊपर से होता है इस कारण विश्वविद्यालयों में भी बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है। उन्हीं के नुमाइंदे बैठे हैं। यदि स्टूडेंट्स के हितों को देखकर नीतियां बनें तो उससे लाभ होगा और स्टूडेंट्स फिर आजादी के लिए नहीं लड़ेंगे।
स्टूडेंट्स को फेलोशिप व स्कॉलरशिप के नाम पर 200 रुपये दिए जा रहे हैं। यह रकम काफी कम है। समय से स्कॉलरशिप भी नहीं मिल रही है। इस व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।- रजत
पीयू के हॉस्टल नंबर दस में 3500 से लेकर 5000 तक शुल्क लिया जाता है। यह काफी ज्यादा है। पीयू प्रशासन को इसे कम करना चाहिए ताकि अन्य हॉस्टल की तरह यहां भी समानता बनी रहे।-ईशा
पीयू के हॉस्टल का खाना अच्छा नहीं है। गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। आटे में मिलावट की जा रही है। इस कारण रोटियां ठीक नहीं बन रही हैं। इसमें सुधार की आवश्यकता है।- तंजीत
यूनिवर्सिटी के रिजल्ट लेट आने का दंश विद्यार्थियों को झेलना पड़ता है। यदि छात्र दूसरी जगह पढ़ने जाएं तो बिना रिजल्ट के दिक्कत आती है। शिक्षकों की कमी है, इससे लॉ डिपार्टमेंट भी जूझ रहा है। -अंजली
विश्वविद्यालय में खाने की आजादी नहीं है। नॉनवेज नहीं है जबकि यह हेल्दी फूड है। विद्यार्थियों को इससे एनर्जी भी मिलती है। इसके लिए कैंटीन खोली जानी चाहिए। यूजीसी के निर्देश दिखाकर अथॉरिटी स्टूडेंट्स को डराए नहीं। - बूटा
गरीब बच्चों से दाखिले के समय फीस ली जाती है, लेकिन समय पर वापस नहीं की जाती। यदि यह फीस वापस करने का प्रावधान है तो फिर स्टूडेंट्स से फीस क्यों ली जाती है। स्टूडेंट्स यह फीस जुटाने के लिए कर्ज तक लेते हैं। -पुनीत
पीयू का प्रशासनिक कार्य ठीक नहीं है। दो साल से मिजोरम में रहने वाली मेरी दोस्त की डिग्री नहीं मिली है। वह कई बार चक्कर लगा चुकी हैं। छोटे-छोटे काम करवाने के लिए चप्पलें घिसनी पड़ रही हैं। स्टूडेंट परेशान हैं।- अंजली
संस्थानों में लगातार फीस बढ़ रही है। पढ़कर स्टूडेंट्स बाहर जा रहे हैं तो नौकरी नहीं है। वह बेरोजगार हो रहे हैं। पंजाब का यूथ कनाडा, ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख कर रहे हैं। इस यूथ को रोजगार देकर रोका जाना चाहिए। - जगतेश्वर
सेमेस्टर सिस्टम में एक सेमेस्टर के एग्जाम पीयू दूसरे सेमेस्टर में कराता है, इससे छात्रों को दिक्कतें होती हैं। वह अगले सेमेस्टर की परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पाते हैं। इसमें बदलाव की जरूरत है।- गुलवीर
कोई भी काम असंभव नहीं है। यदि दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा जाए तो जीत निश्चित है। इसी कारण पीयू में छात्राओं को आजादी मिली। आगे भी छात्र-छात्राओं के हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।- हसनप्रीत कौर