इंजीनियरिंग का ग्राफ गिरा, बीटेक को कनाडा-आस्ट्रेलिया बने पसंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब में इंजीनियरिंग का ग्राफ गिर चुका है। पढ़ाई के लिए अब कनाडा व ऑस्ट्रेलिया देश स्टूडेंट्स की पहली पसंद बन गए हैं।
अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में जहां पंजाब के तमाम इंजीनियरिंग कालेजों में 33.6 फीसदी सीट खाली गई वहीं करीब 12 हजार पंजाबी विद्यार्थियों ने अकेले कनाडा में जाकर इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल करने के लिए दाखिला लिया।
पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के ग्राफ के मुताबिक 2014 में 26 फीसदी इंजीनियरिंग की सीट सूबे के कालेजों में खाली गई थी। 2015-16 में यह करीब सात फीसदी बढ़ गया और 33.6 फीसदी सीटें खाली चली गई।
दूसरी तरफ कनाडा सरकार ने तकनीकी इंजीनियरिंग शिक्षा में भारत के युवाओं के लिए पूरी तरह से दरवाजे खोल दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया में इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों की संख्या हालांकि काफी कम रही, यहां पर करीब 3700 विद्यार्थी ही बीटेक करने के लिए गए।
क्वालिटी एजूकेशन और प्लेसमेंट आसान
त्रिवेदी ओवरसीज एजूकेशन के एमडी सुकांत त्रिवेदी का कहना है कि कनाडा में बेहतर तकनीकी शिक्षा का दौर शुरू हो चुका है, कनाडा से शिक्षा लेने के बाद प्लेसमेंट मे भी आसानी होती है। वहां छात्र को शिक्षा के साथ 20 घंटे प्रति सप्ताह अधिकारिक रूप से काम करने की भी इजाजत है।
जबकि पंजाब में आईटी या टेक्नोलॉजी की इंडस्ट्री भी नहीं है, इसलिए विद्यार्थी कनाडा में इंजीनियरिंग को तवज्जो देने लगे हैं। साइमनफ्रेजन यूनिवर्सिटी में बीटेक करने वाले गगनदीप सिंह का भी कहना है कि पंजाब में क्वालिटी ऑफ एजूकेशन काफी कमजोर हो रही है, इसलिए उसने कनाडा में आकर तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने का निश्चय किया।
कनाडा की मुख्य यूनिवर्सिटी जहां पंजाबी युवाओं ने दाखिला लिया
मेकमास्टर यूनिवर्सिटी टोरंटो
कोलंबिया वैन्कुवर
साइमनफ्रेजन यूनिवर्सिटी वैन्कुवर
यूनिवर्सिटी ऑफ मैनीटोबा
ओंटारियो यूनिवर्सिटी
ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटी
टेक्नोलॉजी ब्रिसबेन