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उत्तरी क्षेत्रीय परिषद बैठक: पंजाब ने यमुना का पानी मांगा, एसवाईएल का किया विरोध, नए जल प्राधिकरण की वकालत

Sun, 10 Jul 2022 01:54 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 10 Jul 2022 01:54 PM IST
सार

बैठक में चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने पंजाब विश्वविद्यालय के वर्तमान स्वरूप में किसी भी बदलाव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया जाएगा।

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Punjab strongly advocated setting up new water authority in Northern Zonal Council meeting
SYL Canal

विस्तार

पंजाब सरकार ने राज्य में नदी जल की स्थिति की समीक्षा के लिए एक नया जल प्राधिकरण स्थापित करने की पुरजोर वकालत की है। शनिवार को जयपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की बैठक के दौरान पंजाब का पक्ष रखते हुए कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का विरोध करते हुए यमुना का पानी मांगा। 

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उन्होंने कहा कि पंजाब के पास अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए एक भी जल स्रोत नहीं है। ऐसे में एसवाईएल से दूसरे राज्यों को पानी देने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और बीबीएमबी से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध जताया।
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इस बैठक में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और हरजोत सिंह बैंस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से हिस्सा लिया और पंजाब का पक्ष रखा। बैंस ने कहा कि राज्य में भूजल स्तर पहले से ही गिर रहा है और अधिकांश प्रखंड डेंजर जोन (डार्क जोन) में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल का नदी जल आवंटन का हालिया आकलन पुराना हो चुका है। 
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बैंस ने पंजाब की ओर से वर्ष 1972 के सिंधू आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, हरियाणा से यमुना का पानी पंजाब को देने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि पंजाब में पानी के मौजूदा हालात को देखने के लिए एक नया ट्रिब्यूनल बनाया जाना चाहिए। इससे मौजूदा तस्वीर साफ होगी और राज्य को पानी के सही इस्तेमाल की इजाजत मिलेगी। दोनों मंत्रियों ने कहा कि यह सुनिश्चित करने का समय आ गया है कि पंजाब के पानी को सतलुज-यमुना लिंक नहर या किसी अन्य माध्यम से किसी अन्य राज्य में न भेजा जाए।

पौंग और भाखड़ा डैम भरने के प्रस्ताव का विरोध

पंजाब के दोनों कैबिनेट मंत्रियों ने पौंग डैम और भाखड़ा डैम को पूरी तरह से भरने के राजस्थान और हरियाणा सरकार के प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब में बाढ़ आती है और राज्य में जान-माल का भारी नुकसान होता रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि व्यवहारिक तौर पर में ऐसा करना संभव भी नहीं है।

पंजाब यूनिवर्सिटी के स्वरूप में बदलाव का विरोध

बैठक में चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने पंजाब विश्वविद्यालय के वर्तमान स्वरूप में किसी भी बदलाव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया जाएगा। चीमा ने कहा कि वह विश्वविद्यालय की छवि में कोई बदलाव नहीं आने देंगे, क्योंकि इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रांतीय महत्व के कारण पंजाब के लोगों का इसके साथ भावनात्मक जुड़ाव है।

बीबीएमबी से प्रतिनिधित्व हटाने का विरोध

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से पंजाब के प्रतिनिधित्व को हटाने का विरोध करते हुए दोनों मंत्रियों ने कहा कि यह राज्य को बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की मौजूदा व्यवस्था से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। दोनों मंत्रियों ने कहा कि राज्य के किसी सदस्य को हटाने का कोई भी कदम अनुचित है।

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