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धान की मार: किसान फिर परेशान, फसल में नमी के नाम खुलेआम हो रही लूट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 15 Oct 2016 01:35 AM IST
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Punjab farmer
- फोटो : File Photo
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पंजाब में किसान एक बार फिर परेशान हैं। इस बार कारण है- धान के दाम। किसानों की शिकायत है कि उन्हें धान के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। नमी का बहाना कर उन्हें लूटा जा रहा है। धान का समर्थन मूल्य ए ग्रेड के लिए 1510 रुपये प्रति क्विंटल और अन्य के लिए 1470 रुपये है लेकिन किसानों का कहना है कि नमी का बहाना कर उन्हें 1300 रुपये प्रति क्विंटल का दाम ही दिया जा रहा है।
पंजाब में धान की खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई है। इस बार उत्पादन अच्छा है और रिकॉर्ड 160 लाख टन खरीद होने की उम्मीद की जा रही है। दो सप्ताह में 30 लाख टन की खरीद हो चुकी है। जिस तरह से खरीद हो रही है, उससे अन्नदाता किसान खफा है। नमी का बहाना कर रेट में कटौती की जाती है। किसान मजबूरी में औने-पौने दाम में फसल बेच रहे हैं। पंजाब में 17 फीसदी नमी तक की फसल की खरीद के आदेश हैं, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में यह मात्रा 22 फीसदी तक निर्धारित है।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां के अनुसार नमी का बहाना बना कर किसानों का शोषण किया जा रहा है। वे एमएसपी से कम मूल्य पर धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कई जगह शेलर वाले धान ही वापस कर देते हैं। मंडी बोर्ड मुलाजिम, व्यापारियों और एजेंसियों का गठजोड़ है। धान की लिफ्टिंग भी नहीं हो रही है, अदायगी भी रुकी हुई है।
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पंजाब में धान की खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई है। इस बार उत्पादन अच्छा है और रिकॉर्ड 160 लाख टन खरीद होने की उम्मीद की जा रही है। दो सप्ताह में 30 लाख टन की खरीद हो चुकी है। जिस तरह से खरीद हो रही है, उससे अन्नदाता किसान खफा है। नमी का बहाना कर रेट में कटौती की जाती है। किसान मजबूरी में औने-पौने दाम में फसल बेच रहे हैं। पंजाब में 17 फीसदी नमी तक की फसल की खरीद के आदेश हैं, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में यह मात्रा 22 फीसदी तक निर्धारित है।
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भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां के अनुसार नमी का बहाना बना कर किसानों का शोषण किया जा रहा है। वे एमएसपी से कम मूल्य पर धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कई जगह शेलर वाले धान ही वापस कर देते हैं। मंडी बोर्ड मुलाजिम, व्यापारियों और एजेंसियों का गठजोड़ है। धान की लिफ्टिंग भी नहीं हो रही है, अदायगी भी रुकी हुई है।
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एमएसपी है 1510 रुपये प्रति क्विंटल मगर मिल रहा 1300 तक का भाव
Punjab farmer
- फोटो : File Photo
‘किसानों को नहीं दिखाते मीटर’
डेरा बाबा नानक के विधायक सुखजिंदर रंधावा के अनुसार किसानों को सिर्फ 1300 रुपये प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं। किसान नमी मापने वाला मीटर दिखाने को कहते हैं तो वह भी नहीं दिखाया जाता। कई जगह ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि नमी की मात्रा 16.7 प्रतिशत होने पर भी साठ रुपये काट लिए गए। धान की अदायगी भी समय पर नहीं हो रही है।
नमी पर कटौती के आदेश नहीं: चीमा
पंजाब मंडीकरण बोर्ड के सीनियर वाइस चेयरमैन रविंदर चीमा ने नमी के चलते एमएसपी में कटौती के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में नमी के चलते कटौती करने के आदेश ही नहीं हैं। सभी मार्केट कमेटियों के बाहर मॉयश्चर मीटर लगाए गए हैं।
नमी ज्यादा मिलने पर किसानों को बाहर से ही वापस कर दिया जाता है कि वे धान सुखा कर लाएं। उन्होंने कहा कि खरीद में किसी तरह की समस्या नहीं है। बारदाना है और लिफ्टिंग साथ-साथ हो रही है। धान की अदायगी भी नियमित की जा रही है।
नमी तकनीकी रूप से 17 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर इससे ज्यादा नमी होगी तो धान की स्टोरेज नहीं हो पाएगी, वह खराब हो जाएगा। केंद्र सरकार के माहिरों ने यह सीमा तय की है। इसी लिए किसानों को कहा जा रहा है कि वे धान सुखा कर लाएं। -तरसेम सैनी, पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान
डेरा बाबा नानक के विधायक सुखजिंदर रंधावा के अनुसार किसानों को सिर्फ 1300 रुपये प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं। किसान नमी मापने वाला मीटर दिखाने को कहते हैं तो वह भी नहीं दिखाया जाता। कई जगह ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि नमी की मात्रा 16.7 प्रतिशत होने पर भी साठ रुपये काट लिए गए। धान की अदायगी भी समय पर नहीं हो रही है।
नमी पर कटौती के आदेश नहीं: चीमा
पंजाब मंडीकरण बोर्ड के सीनियर वाइस चेयरमैन रविंदर चीमा ने नमी के चलते एमएसपी में कटौती के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में नमी के चलते कटौती करने के आदेश ही नहीं हैं। सभी मार्केट कमेटियों के बाहर मॉयश्चर मीटर लगाए गए हैं।
नमी ज्यादा मिलने पर किसानों को बाहर से ही वापस कर दिया जाता है कि वे धान सुखा कर लाएं। उन्होंने कहा कि खरीद में किसी तरह की समस्या नहीं है। बारदाना है और लिफ्टिंग साथ-साथ हो रही है। धान की अदायगी भी नियमित की जा रही है।
नमी तकनीकी रूप से 17 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर इससे ज्यादा नमी होगी तो धान की स्टोरेज नहीं हो पाएगी, वह खराब हो जाएगा। केंद्र सरकार के माहिरों ने यह सीमा तय की है। इसी लिए किसानों को कहा जा रहा है कि वे धान सुखा कर लाएं। -तरसेम सैनी, पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान