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प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत...महिला की मौत, अंतिम संस्कार के बाद चिता की राख में मिली कैंची
Wed, 11 Nov 2020 12:42 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 11 Nov 2020 12:42 PM IST
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मृतक महिला का फाइल फोटो और चिता से कैंची निकालता ग्रामीण।
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के मोगा जिले के गांव बुध सिंह वाला निवासी एक महिला की डिलीवरी के दो दिन बाद अचानक तबीयत खराब हो गई। नौ नवंबर को उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। जब महिला का अंतिम संस्कार किया गया तो उसकी अस्थियों में एक कैंची और तीन स्टिकरनुमा चीजें मिलीं। मौके पर पहुंची पुलिस ने कैंची को कब्जे में ले लिया है।
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महिला के परिवार ने सिविल अस्पताल मोगा की महिला रोग विशेषज्ञ पर आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने उनकी बेटी के पेट में कैंची छोड़ दी। इसके कारण उनकी बेटी की मौत हो गई। गौरतलब है कि 10 अक्तूबर को भी मोगा के सिविल अस्पताल में पार्किंग में एक महिला की डिलीवरी हो गई थी। उस मामले में भी उसी डॉक्टर की लापरवाही पाई गई थी, जिसने गीता का ऑपरेशन किया था। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री किसी भी समय डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भेज सकते हैं। इसकी पुष्टि हेल्थ डायरेक्टर कर चुके हैं।
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दर्शन सिंह निवासी गांव बुध सिंह वाला ने बताया कि उनकी बेटी गीता की छह नवंबर को मोगा के सिविल अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के दो दिन बाद तक उनकी बेटी ठीक थी। उसके बाद अचानक उनकी बेटी के पूरे शरीर पर सूजन होने लगी। महिला डॉक्टर ने उनकी बेटी का चेकअप करने के बाद उसे फरीदकोट रेफर कर दिया।
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नौ नवंबर को उनकी बेटी की उपचार के दौरान मौत हो गई। उसी दिन उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। 10 नवंबर को जब परिवार अस्थियां लेने गया तो उन्हें अस्थियों में एक कैंची और तीन स्टिकरनुमा चीजें मिली। सूचना पर थाना चड़िक के एएसआई दविंदरजीत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ढुडीके ब्लॉक से स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने कैंची को कब्जे में लिया गया। दर्शन सिंह और उसके परिवार ने मांग की है कि मोगा सिविल अस्पताल की उक्त डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सहायक सिविल सर्जन डॉक्टर जसवंत सिंह ने बताया कि मामला उनके ध्यान में आ गया है। जांच कमेटी का गठन किया जाएगा। डॉक्टर जसवंत के अनुसार फरीदकोट में भी महिला का ऑपरेशन हुआ था। हो सकता है कि फरीदकोट स्टाफ की ओर से लापरवाही की गई हो। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।