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‘मन मिट्टी’ में चार औरतों की कहानी, एक ही कलाकार की जुबानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:42 AM IST
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‘मन मिट्टी’ में चार औरतों की कहानी
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में सुचेतक रंगमंच मोहाली और पंजाब कला परिषद के सहयोग से मंगलवार को नाटक ‘मन मिट्टी’ का मंचन किया गया। नाटक ‘मन मिटटी’ में नारी की संघर्ष को बताता है। इस नाटक में एक ही कलाकार चार किरदार में है। इसमें चार औरतों की कहानी दर्शायी गई है, जिनके साथ दुष्कर्म होता है।
नाटक की शुरुआत एक राइटर की कहानी से है जो कहानी सुनाती है। इसमें दिल को झकझोर देने वाली बातें दिखाई गईं हैं। पहला किरदार एक बच्ची का है। जिससे उसके अपने ही परिवार के लोग रेप करते हैं। दूसरे किरदार में एक ऐसी आधुनिक महिला वीनस की कहानी है। वीनस अपने दोस्तों के साथ रहती है, लेकिन उसके दोस्त ही उसके साथ दुष्कर्म करते हैं। वह सोचती है कि अब जीवन बेकार है। वो आत्महत्या करने की तैयारी करती है तभी उसे पाकिस्तान की मुख्तारा माई की कहानी याद आती है।
मुख्तारा माई के साथ गैंग रेप हुआ था, लेकिन वह मरती नहीं है, वो कानूनी लड़ाई लड़ती है। जीत के बाद सरकार से उसे पांच लाख रुपये का मुआवजा मिला। मुख्तारा माई उस पैसे से एक स्कूल चलाती है। अभी उस स्कूल में सात सौ बच्चे पढ़ते हैं। इसके बाद वीनस आत्महत्या के विचार का त्याग कर देती है। वह कहती है कि ही औरत क्यों मरे। इज्जत का पल्लू औरत के सिर ही क्यों बंधे। नाटक का अंत नशा से बचने के संदेश के साथ है। नाटक में संदेश दिया गया है कि औरत का मन मिट्टी के समान है। उसे जिस तरह से मोड़ो मुड़ जाती है, लेकिन कभी-कभी बोल पड़ती है। दुष्कर्म जैसी घिनौनी हरकत के खिलाफ आवाज इस नाटक से उठाई गई है।
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शब्दीश के लिखे इस नाटक का निर्देशन अनीता शब्दीश ने किया है साथ ही उसे मंचित भी किया है। नाटक को चार दुप्पटों से खेला गया है। ऑन द स्पॉट दुपटटा चेंज कर कहानी आगे बढ़ती है। अनीता शब्दीश ने बताया कि यह सातवां शो है। इंग्लैंड में भी इस नाटक को पांच बार प्रस्तुत किया जा चुका है। जबकि चंडीगढ़ में दूसरी बार इसका मंचन किया गया है।
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नाटक की शुरुआत एक राइटर की कहानी से है जो कहानी सुनाती है। इसमें दिल को झकझोर देने वाली बातें दिखाई गईं हैं। पहला किरदार एक बच्ची का है। जिससे उसके अपने ही परिवार के लोग रेप करते हैं। दूसरे किरदार में एक ऐसी आधुनिक महिला वीनस की कहानी है। वीनस अपने दोस्तों के साथ रहती है, लेकिन उसके दोस्त ही उसके साथ दुष्कर्म करते हैं। वह सोचती है कि अब जीवन बेकार है। वो आत्महत्या करने की तैयारी करती है तभी उसे पाकिस्तान की मुख्तारा माई की कहानी याद आती है।
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मुख्तारा माई के साथ गैंग रेप हुआ था, लेकिन वह मरती नहीं है, वो कानूनी लड़ाई लड़ती है। जीत के बाद सरकार से उसे पांच लाख रुपये का मुआवजा मिला। मुख्तारा माई उस पैसे से एक स्कूल चलाती है। अभी उस स्कूल में सात सौ बच्चे पढ़ते हैं। इसके बाद वीनस आत्महत्या के विचार का त्याग कर देती है। वह कहती है कि ही औरत क्यों मरे। इज्जत का पल्लू औरत के सिर ही क्यों बंधे। नाटक का अंत नशा से बचने के संदेश के साथ है। नाटक में संदेश दिया गया है कि औरत का मन मिट्टी के समान है। उसे जिस तरह से मोड़ो मुड़ जाती है, लेकिन कभी-कभी बोल पड़ती है। दुष्कर्म जैसी घिनौनी हरकत के खिलाफ आवाज इस नाटक से उठाई गई है।
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शब्दीश के लिखे इस नाटक का निर्देशन अनीता शब्दीश ने किया है साथ ही उसे मंचित भी किया है। नाटक को चार दुप्पटों से खेला गया है। ऑन द स्पॉट दुपटटा चेंज कर कहानी आगे बढ़ती है। अनीता शब्दीश ने बताया कि यह सातवां शो है। इंग्लैंड में भी इस नाटक को पांच बार प्रस्तुत किया जा चुका है। जबकि चंडीगढ़ में दूसरी बार इसका मंचन किया गया है।