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एक भाई की मजबूरी, प्यार और फिर सुसाइड, पढ़िए 'आदित्य' की कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 12 Dec 2016 11:31 PM IST
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पंजाब कला भवन में तहरीर और मुराद का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में सोमवार को तहरीर और मुराद नामक दो नाटकों का मंचन थिएटर ऑफ पीपल की ओर से किया गया। इन नाटकों का लेखन और निर्देशन सुषमा ने किया। दोनों नाटक ओपन एयर थिएटर में प्रस्तुत किए गए।
पहला नाटक तहरीर एक रोमांटिक, सस्पेंस भरा रहा। इसमें आदित्य नामक किरदार को दिखाया गया है जिसके माता पिता नहीं है। उसकी एक बहन है जिसका विवाह करना ही उसकी प्राथमिकता है। आदित्य को आशना नामक लड़की से प्यार हो जाता है। अपनी बहन की शादी कर देने के बाद एक दिन वह वह आत्महत्या कर लेता है। जब बात पुलिस तक पहुंचती है और इंस्पेक्टर आदित्य के घर पहुंचकर छानबीन करने लगता है उन्हें कुछ खत मिलते हैं। छानबीन के बाद पता चलता है जिस आशना नाम की लड़की से आदित्य प्यार करता था वह मुस्लिम थी और उसके माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे। इस कारण आशना का भाई ही आशना को मार देता है।
आदित्य यह बात अपनी बहन से छुपाता है और जानबूझ कर उसके सामने आशना को कई बार पत्र लिखता है और वह दिल्ली जाकर खुद आशना की ओर अपने नाम की चिट्ठी भी अपने घर पहुंचाता है ताकि उसकी बहन को शक न हो। यह सिलसिला दो साल तक चलता रहता है। बहन की शादी के बाद आदित्य कहता है कि ‘मेरा फर्ज पूरा हुआ, आशना अब मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं’। इसके बाद वह आत्महत्या कर लेता है और नाटक यहीं खत्म हो जाता है। वहीं दूसरा नाटक ‘मुराद’ बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं पर आधारित रहा।
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पहला नाटक तहरीर एक रोमांटिक, सस्पेंस भरा रहा। इसमें आदित्य नामक किरदार को दिखाया गया है जिसके माता पिता नहीं है। उसकी एक बहन है जिसका विवाह करना ही उसकी प्राथमिकता है। आदित्य को आशना नामक लड़की से प्यार हो जाता है। अपनी बहन की शादी कर देने के बाद एक दिन वह वह आत्महत्या कर लेता है। जब बात पुलिस तक पहुंचती है और इंस्पेक्टर आदित्य के घर पहुंचकर छानबीन करने लगता है उन्हें कुछ खत मिलते हैं। छानबीन के बाद पता चलता है जिस आशना नाम की लड़की से आदित्य प्यार करता था वह मुस्लिम थी और उसके माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे। इस कारण आशना का भाई ही आशना को मार देता है।
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आदित्य यह बात अपनी बहन से छुपाता है और जानबूझ कर उसके सामने आशना को कई बार पत्र लिखता है और वह दिल्ली जाकर खुद आशना की ओर अपने नाम की चिट्ठी भी अपने घर पहुंचाता है ताकि उसकी बहन को शक न हो। यह सिलसिला दो साल तक चलता रहता है। बहन की शादी के बाद आदित्य कहता है कि ‘मेरा फर्ज पूरा हुआ, आशना अब मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं’। इसके बाद वह आत्महत्या कर लेता है और नाटक यहीं खत्म हो जाता है। वहीं दूसरा नाटक ‘मुराद’ बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं पर आधारित रहा।
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