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कोरोना वायरस: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, प्रदेश की जेलों से छोड़े जाएंगे 6000 कैदी

Fri, 27 Mar 2020 09:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 27 Mar 2020 09:41 AM IST
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Punjab is giving parole to 6000 prisoners from jails across the state
Punjab - फोटो : अमर उजाला

कोरोना के बढ़ते खतरे के मद्देनजर पंजाब की जेलों में कैदियों की भारी संख्या के कारण बनी स्थिति से निपटने के लिए करीब 6000 कैदियों को रिहा किया जाएगा। यह जानकारी गुरुवार को पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दी। रंधावा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा सभी मापदंडों और प्रक्रिया को अपनाने के बाद यह फैसला किया गया। इसके तहत लंबी सजा वाले कैदियों को छह सप्ताह की पैरोल और हवालातियों कुछ हफ्ते की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। जेल मंत्री ने आगे बताया कि प्रदेश की 24 जिलों में इस समय 24000 कैदी है जबकि जिलों की क्षमता 23488 है। 

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पंजाब कानूनी सेवाएं प्राधिकरण की चेयरपर्सन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, कैदियों को रिहा करने का मुख्य उद्देश्य कोरोना के प्रकोप के चलते कैदियों की सेहत का ख्याल रखना है। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार ही कैदियों को रिहा करने का उपरोक्त फैसला लिया गया है। इनमें ऐसे कैदी जिन्हें अधिकतम 7 साल की सजा और उन पर दो से अधिक मुकदमे न हो और पिछली पैरोल पर उनका आचरण अच्छा रहा हो, को रिहा किए जाने पर विचार किया गया। 
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पैरोल की अवधि और 6 माह के लिए बढ़ा दी जाएगी

जेल मंत्री ने बताया कि पहले से पैरोल पर गए कैदियों एकांतवास को ध्यान में रखते हुए उनके पैरोल की अवधि और 6 माह के लिए बढ़ा दी जाएगी। ऐसे हवालाती कैदियों को 6 महीने की अंतरिम जमानत पर छोड़ने का फैसला लिया गया है, जो एक या दो केसों का सामना कर रहे हैं और उनमें उन्हें अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती हो। इनके अलावा आईपीसी की धारा 498 ए, 420 , 406,  324, 325 , 389, आबकारी एक्ट और सीआरपीसी की धारा 107 /151 के तहत विशेष केसों के तहत जमानत पर विचार किया जाएगा। अंतरिम जमानत की मंजूरी के लिए कैंप अदालतें जेलों के अंदर ही लगाई जाएंगी।

यह कैदी नहीं छोड़े जाएंगे
जेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि पोक्सो एक्ट, आईपीसी की धारा 376, 389 बी, तेजाब हमले, यूएनपीए, विस्फोटक एक्ट और विदेशी नागरिकता के तहत सजा का सामना कर रहे कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के अधीन आने वाले केसों संबंधी कैदियों को भी रिहा नहीं किया जाएगा। हालांकि एचआईवी , शुगर की बीमारियों से पीड़ित कैदियों, गर्भवती औरतों और 65 साल की उम्र से अधिक वाले कैदियों को शर्तों में छूट दी जाएगी।  

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