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Loksabha Election 2024: कैंसर के कहर से मुक्ति ढूंढ रहा पंजाब, सबसे ज्यादा प्रभावित है मालवा बेल्ट
Thu, 28 Mar 2024 10:30 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 28 Mar 2024 10:30 AM IST
सार
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (आईसीएमआर-एनसीआरपी) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में कैंसर के मामले 2021 में 39,521 से बढ़कर 2024 में 42,288 हो गए। यह 7% की वृद्धि है। यह संख्या 2022 में 40,435 से लगातार बढ़कर 2023 में 41,337 हो गई। पंजाब में चुनाव के दौरान कई बार यह मामला उठता रहा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
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cancer
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कैंसर यूं तो पूरे देश के लिए ही बड़ी चुनौती है, लेकिन पंजाब में इसकी स्थिति पड़ोसी राज्यों के मुकाबले काफी खराब है। यहां की मालवा बेल्ट इससे बुरी तरह प्रभावित है। भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग की नवंबर 2023 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार वर्षों में पंजाब में प्रतिदिन कैंसर से 76 मौतें हो रहीं हैं। रोज कैंसर के 107 नए कैंसर के मामले सामने आते हैं।
-भारत में एक लाख में 80 कैंसर मरीजों का औसत, पंजाब में यह आंकड़ा 90 तक पहुंचा
-2023 की रिपोर्ट के अनुसार चार वर्षों में पंजाब में प्रतिदिन कैंसर से 76 मौतें हो रहीं हैं।
-107 कैंसर के नए मामले रोज सामने आते हैं पंजाब में
-23,301 लोगों की मौत हुईं पंजाब में साल 2022 में कैंसर से
-40,435 नए मामले सामने आए 2022 में भारत सरकार के अनुसार
-90 से अधिक कैंसर के रोज सामने आ रहे हैं पंजाब की मालवा बेल्ट में
पंजाब में कैंसर की स्थिति
वर्ष मौतें
2018 21,278
2019 21,763
2020 22,276
2021 22,786
2022 23,301
2023 27740
ये हैं मुख्य कारण
-इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च द्वारा चंडीगढ़, संगरूर, मानसा और मोहाली में किए गए एक सर्वेक्षण में कैंसर का सबसे आम कारण शराब और सिगरेट का सेवन, रसायनों का उपयोग और प्रदूषित पानी का इस्तेमाल है।
-पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य होने के कारण किसान अधिक उत्पादन पाने के लिए आवश्यकता से अधिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, जिसके कारण कैंसर फैल रहा है।
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-खाने पीने की चीजों में मिलावट मुख्य कारण है। इसके साथ साथ ही आरामपरस्त जीवनशैली और मोबाइल से उत्पन्न रेडिएशन के आसपास रहना भी इसका एक कारण हो सकता है।
-पंजाब में कैंसर के मामले में बढ़ोतरी की वजह पानी में यूरेनियम की मात्रा का होना भी है।
एक्सपर्ट की राय...
महिलाएं ज्यादा पीड़ित, बच्चे भी जद में
राज्य कैंसर संस्थान अमृतसर के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. राजीव देवगन के अनुसार रोजाना 70-80 कैंसर रोगियों का इलाज हो रहा है, जबकि हजारों लोग निजी अस्पतालों से उपचार ले रहे हैं। कैंसर से छोटे बच्चे भी पीड़ित हैं। पंजाब में हर साल करीब 50 बच्चे ट्यूमर और ब्लड कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। आज के दौर में बनावटी जीवन शैली के बढ़ते प्रचलन को कैंसर की वजह है। अधिकतर मामले पीजीआई और निजी अस्पतालों से संबंधित हैं। मोडिफाइड लाइफ स्टाइल और प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक इस्तेमाल समेत कीटनाशक कैंसर के सहायक कारणों में हैं। हालांकि शरीर में कैंसर की कोशिकाओं के सक्रिय होने की और भी कई वजहें हैं। आधुनिक जीवन शैली में बदलाव कर प्राकृतिक जीवनचर्या को जीवन में शामिल करना जरूरी है। शरीर में हो रही किसी भी तरह के बदलाव को हल्के में न लेकर समय रहते चिकित्सकीय जांच करवाएं।
हिमाचल, हरियाणा की तुलना में बढ़ रहे कैंसर के नए मामले
राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट 2020 के अनुसार पंजाब में वर्ष 2020 में कैंसर के नए मामलों की अनुमानित संख्या 38,636 है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में 29,219 और हिमाचल प्रदेश में 8,777 जबकि चंडीगढ़ में 1,024 लोग कैंसर से पीड़ित थे।
महिलाएं कैंसर से ज्यादा पीड़ित
पंजाब में महिलाएं कैंसर से ज्यादा पीड़ित हैं। महिलाओं में सर्वाधिक ब्रेस्ट कैंसर, फूड पाइप और बच्चेदानी (सर्वाइकल) का कैंसर पाया जा रहा है। इसके अलावा पुरुषों में मुंह और गले के अलावा फेफड़ों का कैंसर सामान्य है। बच्चों में सॉलिड ट्यूमर और ब्लड कैंसर देखा गया है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाएगी एससीपीवी
-महिलाओं में बच्चेदानी यानी सर्वाइकल कैंसर से बचाव में सर्वाइकल कैंसर प्रोटेक्टिव वैक्सीन (एससीपीवी) बहुत कारगर साबित हुई है।
-9 से 16 साल आयु वर्ग की लड़कियों को इस वैक्सीन की तीन खुराक दी जाती हैं। अभी यह बाजार में 800 से 900 रुपये में उपलब्ध है।
-जल्द इसे सरकारी संस्थानों में मुहैया करवाने की तैयारी चल रही है।
पंजाब के दो कैंसर संस्थानों को 95.59 करोड़
-केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के दो कैंसर संस्थानों को 95.59 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए हैं।
-राज्य कैंसर संस्थान अमृतसर को 68.766 करोड़ और सिविल अस्पताल फाजिल्का को विशिष्ट परिचर्या कैंसर केंद्र (टीसीसीसी) के रूप में 26.826 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता अनुमोदित की है।
होमी भाभा अस्पताल-टाटा मेमोरियल सेंटर से मिलेगी राहत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में मोहाली के न्यू चंडीगढ़ स्थित मुल्लांपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर की आईपीडी का उद्घाटन करने पहुंचे। इस दौरान पंजाब सरकार ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल रिसर्च सेंटर और टाटा मेमोरियल सेंटर के साथ एमओयू साइन किया। 600 करोड़ से बने होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में 300 बेड की क्षमता है। इसमें सर्जिकल ओंकोलॉजी, मेडिकल ओंकोलॉजी, रेडिएशन ओंकोलॉजी, प्रिवेंटिव ओंकोलॉजी, एनेस्थीसिया के ओपीडी की शुरुआत की जा चुकी है। इसके अलावा एमआरआई, सीटी स्कैन, मेमोग्राफी, डिजिटल रेडियोग्राफी जैसी आधुनिक सहूलियतें भी यहां उपलब्ध हैं।
प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी की टीमें कर रहीं जागरूक
राज्य में प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के तहत कई टीमें तैनात की गई है. इन टीमों का उद्देश्य गांव-गांव जाकर शिविर लगाना भी है। टीम शिविर में लोगों को कैंसर के प्रारंभिक लक्षण एवं उसके उपचार के बारे में जागरूक करती हैं। प्रारंभिक लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच भी की जाती है। अगर उन्हें किसी प्रकार के कैंसर की पुष्टि होती है तो उन्हें इलाज से संबंधित सभी जानकारियां देती है।
जमीनी हकीकत..
फरीदकोट जिले में करीब 450 मकानों वाला दबड़ीखाना गांव है। इसी गांव में 13-14 छोटे छोटे घरों की एक गली है। 16 साल की लड़की ने बताया कि उसकी मां को मुंह का कैंसर था। मेरी छोटी बहन उस समय 15 साल की थी और सबसे छोटा भाई चार का। पिता जी पास के गांव के गुरुद्वारे मे ग्रंथी हैं और साथ ही दिहाड़ी का काम करते हैं। वे वहीं रहते हैं, जो कुछ हो सकता है वो भेज देते हैं। राजस्थान के बीकानेर के अस्पताल में इलाज चला और फरीदकोट में भी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहीं, नसीब कौर की लगभग 50 वर्ष की आयु में मौत हुई थी। उनके पति भी दिहाड़ी पर मजदूरी करते थे। नसीब कौर को बच्चेदानी का कैंसर था। प्रभु सिंह पेट के कैंसर से पीड़ित थे। उनकी दो साल पहले ही मौत हुई थी।
सात जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
मालवा क्षेत्र के सात जिले बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, फिरोजपुर और मानसा के किसानों को पिछले काफी समय से कैंसर और अन्य रोगों से जूझना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना के तहत साल 2019 में 6122 मरीजों पर 85 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी।
हमने बठिंडा से बीकानेर जाने वाली कैंसर ट्रेन को रोका: मान
संगरूर के केंद्र में मौजूद होमी भाभा सेंटर अब 125 बेड का हो चुका है। पहले बठिंडा से बीकानेर तक एक कैंसर ट्रेन जाती थी, लेकिन अब उस ट्रेन को न केवल रोका, बल्कि मरीजों का इलाज पंजाब में ही शुरू कर दिया गया है। होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर से पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के लोगों को लाभ मिलेगा। -भगवंत मान, मुख्यमंत्री मान, पंजाब
मोहाली में 300 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) का दौरा करने के बाद अस्तित्व में आया था। यह मुंबई के बाहर टीएमसी की ओर से अनुमोदित होने वाला पहला ऐसा संस्थान है, जिस पर 2013 में काम शुरू हुआ था। यह पंजाब के लोगों को विश्वस्तर का उपचार प्रदान करने के लिए शिअद सरकार में शुरू मेडिसिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। -सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद
कैंसर जैसी नामुराद बीमारी की मालवा इलाके सहित पंजाब भर में तेजी से जड़ें फैल रही हैं। कैंसर का इलाज करवाने के लिए मरीज बीकानेर जाते हैं। केंद्र सरकार प्रयास कर रही है कि पंजाब में ही कैंसर के मरीजों का बेहतर इलाज हो, ताकि मरीजों को बीकानेर न जाना पड़े। मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई से मांग की थी कि संगरूर में कैंसर के माहिर डॉक्टर व स्टाफ तैयार करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करे। -कैप्टन अमरिंदर सिंह, भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री, पंजाब
चंडीगढ़ के मुल्लांपुर में कैंसर अस्पताल कांग्रेस की देन है। इसमें मनमोहन सिंह का इसमें बड़ा योगदान था। अस्पताल का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 30 दिसंबर, 2013 को रखा था। उस समय प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। अस्पताल को केंद्र सरकार ने 660 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया है। इसमें 300 बिस्तरों की क्षमता है। यह कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस है। -अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस
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-भारत में एक लाख में 80 कैंसर मरीजों का औसत, पंजाब में यह आंकड़ा 90 तक पहुंचा
-2023 की रिपोर्ट के अनुसार चार वर्षों में पंजाब में प्रतिदिन कैंसर से 76 मौतें हो रहीं हैं।
-107 कैंसर के नए मामले रोज सामने आते हैं पंजाब में
-23,301 लोगों की मौत हुईं पंजाब में साल 2022 में कैंसर से
-40,435 नए मामले सामने आए 2022 में भारत सरकार के अनुसार
-90 से अधिक कैंसर के रोज सामने आ रहे हैं पंजाब की मालवा बेल्ट में
पंजाब में कैंसर की स्थिति
वर्ष मौतें
2018 21,278
2019 21,763
2020 22,276
2021 22,786
2022 23,301
2023 27740
ये हैं मुख्य कारण
-इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च द्वारा चंडीगढ़, संगरूर, मानसा और मोहाली में किए गए एक सर्वेक्षण में कैंसर का सबसे आम कारण शराब और सिगरेट का सेवन, रसायनों का उपयोग और प्रदूषित पानी का इस्तेमाल है।
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-पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य होने के कारण किसान अधिक उत्पादन पाने के लिए आवश्यकता से अधिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, जिसके कारण कैंसर फैल रहा है।
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-पंजाब में कैंसर के मामले में बढ़ोतरी की वजह पानी में यूरेनियम की मात्रा का होना भी है।
एक्सपर्ट की राय...
महिलाएं ज्यादा पीड़ित, बच्चे भी जद में
राज्य कैंसर संस्थान अमृतसर के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. राजीव देवगन के अनुसार रोजाना 70-80 कैंसर रोगियों का इलाज हो रहा है, जबकि हजारों लोग निजी अस्पतालों से उपचार ले रहे हैं। कैंसर से छोटे बच्चे भी पीड़ित हैं। पंजाब में हर साल करीब 50 बच्चे ट्यूमर और ब्लड कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। आज के दौर में बनावटी जीवन शैली के बढ़ते प्रचलन को कैंसर की वजह है। अधिकतर मामले पीजीआई और निजी अस्पतालों से संबंधित हैं। मोडिफाइड लाइफ स्टाइल और प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक इस्तेमाल समेत कीटनाशक कैंसर के सहायक कारणों में हैं। हालांकि शरीर में कैंसर की कोशिकाओं के सक्रिय होने की और भी कई वजहें हैं। आधुनिक जीवन शैली में बदलाव कर प्राकृतिक जीवनचर्या को जीवन में शामिल करना जरूरी है। शरीर में हो रही किसी भी तरह के बदलाव को हल्के में न लेकर समय रहते चिकित्सकीय जांच करवाएं।
हिमाचल, हरियाणा की तुलना में बढ़ रहे कैंसर के नए मामले
राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट 2020 के अनुसार पंजाब में वर्ष 2020 में कैंसर के नए मामलों की अनुमानित संख्या 38,636 है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में 29,219 और हिमाचल प्रदेश में 8,777 जबकि चंडीगढ़ में 1,024 लोग कैंसर से पीड़ित थे।
महिलाएं कैंसर से ज्यादा पीड़ित
पंजाब में महिलाएं कैंसर से ज्यादा पीड़ित हैं। महिलाओं में सर्वाधिक ब्रेस्ट कैंसर, फूड पाइप और बच्चेदानी (सर्वाइकल) का कैंसर पाया जा रहा है। इसके अलावा पुरुषों में मुंह और गले के अलावा फेफड़ों का कैंसर सामान्य है। बच्चों में सॉलिड ट्यूमर और ब्लड कैंसर देखा गया है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाएगी एससीपीवी
-महिलाओं में बच्चेदानी यानी सर्वाइकल कैंसर से बचाव में सर्वाइकल कैंसर प्रोटेक्टिव वैक्सीन (एससीपीवी) बहुत कारगर साबित हुई है।
-9 से 16 साल आयु वर्ग की लड़कियों को इस वैक्सीन की तीन खुराक दी जाती हैं। अभी यह बाजार में 800 से 900 रुपये में उपलब्ध है।
-जल्द इसे सरकारी संस्थानों में मुहैया करवाने की तैयारी चल रही है।
पंजाब के दो कैंसर संस्थानों को 95.59 करोड़
-केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के दो कैंसर संस्थानों को 95.59 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए हैं।
-राज्य कैंसर संस्थान अमृतसर को 68.766 करोड़ और सिविल अस्पताल फाजिल्का को विशिष्ट परिचर्या कैंसर केंद्र (टीसीसीसी) के रूप में 26.826 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता अनुमोदित की है।
होमी भाभा अस्पताल-टाटा मेमोरियल सेंटर से मिलेगी राहत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में मोहाली के न्यू चंडीगढ़ स्थित मुल्लांपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर की आईपीडी का उद्घाटन करने पहुंचे। इस दौरान पंजाब सरकार ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल रिसर्च सेंटर और टाटा मेमोरियल सेंटर के साथ एमओयू साइन किया। 600 करोड़ से बने होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में 300 बेड की क्षमता है। इसमें सर्जिकल ओंकोलॉजी, मेडिकल ओंकोलॉजी, रेडिएशन ओंकोलॉजी, प्रिवेंटिव ओंकोलॉजी, एनेस्थीसिया के ओपीडी की शुरुआत की जा चुकी है। इसके अलावा एमआरआई, सीटी स्कैन, मेमोग्राफी, डिजिटल रेडियोग्राफी जैसी आधुनिक सहूलियतें भी यहां उपलब्ध हैं।
प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी की टीमें कर रहीं जागरूक
राज्य में प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के तहत कई टीमें तैनात की गई है. इन टीमों का उद्देश्य गांव-गांव जाकर शिविर लगाना भी है। टीम शिविर में लोगों को कैंसर के प्रारंभिक लक्षण एवं उसके उपचार के बारे में जागरूक करती हैं। प्रारंभिक लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच भी की जाती है। अगर उन्हें किसी प्रकार के कैंसर की पुष्टि होती है तो उन्हें इलाज से संबंधित सभी जानकारियां देती है।
जमीनी हकीकत..
फरीदकोट जिले में करीब 450 मकानों वाला दबड़ीखाना गांव है। इसी गांव में 13-14 छोटे छोटे घरों की एक गली है। 16 साल की लड़की ने बताया कि उसकी मां को मुंह का कैंसर था। मेरी छोटी बहन उस समय 15 साल की थी और सबसे छोटा भाई चार का। पिता जी पास के गांव के गुरुद्वारे मे ग्रंथी हैं और साथ ही दिहाड़ी का काम करते हैं। वे वहीं रहते हैं, जो कुछ हो सकता है वो भेज देते हैं। राजस्थान के बीकानेर के अस्पताल में इलाज चला और फरीदकोट में भी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहीं, नसीब कौर की लगभग 50 वर्ष की आयु में मौत हुई थी। उनके पति भी दिहाड़ी पर मजदूरी करते थे। नसीब कौर को बच्चेदानी का कैंसर था। प्रभु सिंह पेट के कैंसर से पीड़ित थे। उनकी दो साल पहले ही मौत हुई थी।
सात जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
मालवा क्षेत्र के सात जिले बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, फिरोजपुर और मानसा के किसानों को पिछले काफी समय से कैंसर और अन्य रोगों से जूझना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना के तहत साल 2019 में 6122 मरीजों पर 85 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी।
हमने बठिंडा से बीकानेर जाने वाली कैंसर ट्रेन को रोका: मान
संगरूर के केंद्र में मौजूद होमी भाभा सेंटर अब 125 बेड का हो चुका है। पहले बठिंडा से बीकानेर तक एक कैंसर ट्रेन जाती थी, लेकिन अब उस ट्रेन को न केवल रोका, बल्कि मरीजों का इलाज पंजाब में ही शुरू कर दिया गया है। होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर से पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के लोगों को लाभ मिलेगा। -भगवंत मान, मुख्यमंत्री मान, पंजाब
मोहाली में 300 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) का दौरा करने के बाद अस्तित्व में आया था। यह मुंबई के बाहर टीएमसी की ओर से अनुमोदित होने वाला पहला ऐसा संस्थान है, जिस पर 2013 में काम शुरू हुआ था। यह पंजाब के लोगों को विश्वस्तर का उपचार प्रदान करने के लिए शिअद सरकार में शुरू मेडिसिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। -सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद
कैंसर जैसी नामुराद बीमारी की मालवा इलाके सहित पंजाब भर में तेजी से जड़ें फैल रही हैं। कैंसर का इलाज करवाने के लिए मरीज बीकानेर जाते हैं। केंद्र सरकार प्रयास कर रही है कि पंजाब में ही कैंसर के मरीजों का बेहतर इलाज हो, ताकि मरीजों को बीकानेर न जाना पड़े। मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई से मांग की थी कि संगरूर में कैंसर के माहिर डॉक्टर व स्टाफ तैयार करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करे। -कैप्टन अमरिंदर सिंह, भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री, पंजाब
चंडीगढ़ के मुल्लांपुर में कैंसर अस्पताल कांग्रेस की देन है। इसमें मनमोहन सिंह का इसमें बड़ा योगदान था। अस्पताल का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 30 दिसंबर, 2013 को रखा था। उस समय प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। अस्पताल को केंद्र सरकार ने 660 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया है। इसमें 300 बिस्तरों की क्षमता है। यह कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस है। -अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस