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बड़ा सवालः पॉलिथीन बैन, फिर भी हर साल कहां से आ रहा 22 हजार टन प्लास्टिक वेस्ट

Fri, 25 Jan 2019 10:06 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 25 Jan 2019 10:06 AM IST
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Punjab Haryana Raised Question on 22 Thousand Ton Plastic Waste Yearly in Chandigarh
पॉलिथीन
पॉलिथीन, प्लासिटक बैग, कप, प्लेट व चम्मच, पैकिंग बैन होने के बावजूद शहर में हर वर्ष 22 हजार टन प्लास्टिक वेस्ट कहां से आ रहा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर इस बारे में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा व पंजाब में भी हालात लगभग ऐसे ही है इस पर हाईकोर्ट ने दोनों को पार्टी बनाते हुए जवाब तलब कर लिया है। युवसत्ता एनजीओ ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि चंडीगढ़ नगर निगम ने एक अधिसूचना जारी कर पॉलिथीन को प्रतिबंधित कर दिया था।
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इस बैन को अधिसूचित करने के बावजूद अभी तक इसे सही प्रकार से लागू नहीं किया गया है। शहर में हर साल 450 मीट्रिक टन कचरा होता है जिसमें से 22 हजार टन कचरा प्लास्टिक व पॉलिथीन के रूप में होता है। प्लास्टिक के इतने बुरे प्रभाव पड़ते हैं कि यदि यह किसी माध्यम से शरीर में चला जाए तो न केवल हम बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पर इसका असर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए दुनिया के 50 देश और भारत के 25 राज्य व यूटी ने प्लास्टिक को बैन कर दिया है।
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इस बैन को हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और सिक्किम जैसे राज्यों में तो प्रभावी तरीके से लागू किया गया है लेकिन चंडीगढ़ में इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया। बैन के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है उसमें भी तकनीकी पक्ष रखे गए हैं न की प्लास्टिक को पूरी तरह से बैन किया गया है। याची ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार इन उत्पादों को समाप्त होने में 500 से हजार वर्ष का समय लग जाता है। ऐसे में मानव जीवन, पर्यावरण और जीवों को इसके प्रभाव से बचाने के लिए इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध बहुत जरूरी है।
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हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए यूटी प्रशासन से इस दिशा में उठाए गए कदमों और उनकी आगे की योजना के बारे में जवाब मांग लिया है। इसकेसाथ ही कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा और पंजाब में भी प्लास्टिक बैन है लेकिन हालात वहां शहर से ज्यादा खराब हैं। याचिका में हरियाणा और पंजाब को पार्टी नहीं बनाया गया था जिसके चलते हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान ले दोनों को पक्ष बना नोटिस जारी कर दोनों से जवाब मांग लिया है।
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