{"_id":"5bd012e5bdec2269ae773059","slug":"punjab-haryana-highcourt-statement-on-housing-scheme-proposal-for-employees","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों के लिए हाउसिंग प्रस्ताव लटकने पर केंद्र सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों के लिए हाउसिंग प्रस्ताव लटकने पर केंद्र सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:06 PM IST
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दस साल से अशियाने का सपना देख रहे कर्मचारियों की हाउसिंग स्कीम के लिए भूमि देने पर फैसला न लेने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि लेट लतीफी अधिकारियों की रूटीन का हिस्सा बन गई है। कोर्ट ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि सुधर जाओ वरना मुश्किल में पड़ जाओगे। इससे पहले कोर्ट ने केंद्र को तीन सप्ताह के भीतर भूमि अलॉट करने पर फैसला लेने के आदेश दिए थे।
मंगलवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से वर्ष 2008 में बनाई गई इस हाउसिंग स्कीम के तहत 3930 फ्लैट के निर्माण के लिए 61.5 एकड़ जमीन सौंपने पर जवाब मांगा। इस पर केंद्र सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि यह फाइल अभी गृह मंत्रालय के पास लंबित है और कोई फैसला नहीं हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों दस साल बीत जाने और पैसा भरने के बावजूद अपने हक से वंचित हैं।
पिछली सुनवाई पर तीन सप्ताह की मोहलत लेने के बावजूद अधिकारियों ने भूमि पर फैसला नहीं लिया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने भूमि हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का प्रस्ताव भेजा था। अधिकारी आखिर क्यों फाइल दबाए बैठे हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी खुद सुधरेंगे या हाईकोर्ट से अपने लिए मुसीबत पैदा करने वाले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आखिरी मौका देते हुए अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
चेयरमैन कोर्ट में हाजिर होकर डिटेल में दें कार्य का ब्योरा
इसी बीच हाईकोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड से पूछा कि आखिर जो जमीन अभी मिल चुकी है उस पर फ्लैट बनाने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। इस पर योजनाएं व अन्य दलीलों से नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर हकीकत के घर बनाने हैं। अभी तक केवल योजनाएं ही मौजूद हैं, असल में काम नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारियों ने पैसा दिया है तो आखिर क्यों उनको काम करके नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने अब हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन को अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में हाजिर रह कर इस बारे में जवाब देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने चेयरमैन को निर्देश दिए कि वे बताएं कि कितने समय में क्या-क्या काम पूरा होगा और कब तक यह हाउसिंग प्रोजेक्ट बन कर तैयार हो जाएगा। अगली सुनवाई पर चेयरमैन को इसका जवाब देना होगा।
पिछले साल ये कहा था यूटी प्रशासन ने
गत वर्ष प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ प्रशासन के 3930 सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2008 बनाई गई हाउसिंग स्कीम के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए फिलहाल 20.77 एकड़ जमीन चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपी जा चुकी है। जिसमे से 11.795 एकड़ जमीन इस स्कीम के अलावा वर्ष 2008 की एक अन्य जनरल हाउसिंग स्किम के लिए बोर्ड को सौंपी गई है। बाकी बची 61.5 एकड़ जमीन के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव बना केंद्र सरकार को कैबिनेट नोट भेज दिया था। इस लिहाज से इस स्कीम के लिए 71 एकड़ से अधिक जमीन जारी करने का खाका बना लिया गया है।
विज्ञापन
मंगलवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से वर्ष 2008 में बनाई गई इस हाउसिंग स्कीम के तहत 3930 फ्लैट के निर्माण के लिए 61.5 एकड़ जमीन सौंपने पर जवाब मांगा। इस पर केंद्र सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि यह फाइल अभी गृह मंत्रालय के पास लंबित है और कोई फैसला नहीं हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों दस साल बीत जाने और पैसा भरने के बावजूद अपने हक से वंचित हैं।
विज्ञापन
पिछली सुनवाई पर तीन सप्ताह की मोहलत लेने के बावजूद अधिकारियों ने भूमि पर फैसला नहीं लिया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने भूमि हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का प्रस्ताव भेजा था। अधिकारी आखिर क्यों फाइल दबाए बैठे हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी खुद सुधरेंगे या हाईकोर्ट से अपने लिए मुसीबत पैदा करने वाले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आखिरी मौका देते हुए अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
चेयरमैन कोर्ट में हाजिर होकर डिटेल में दें कार्य का ब्योरा
इसी बीच हाईकोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड से पूछा कि आखिर जो जमीन अभी मिल चुकी है उस पर फ्लैट बनाने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। इस पर योजनाएं व अन्य दलीलों से नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर हकीकत के घर बनाने हैं। अभी तक केवल योजनाएं ही मौजूद हैं, असल में काम नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारियों ने पैसा दिया है तो आखिर क्यों उनको काम करके नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने अब हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन को अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में हाजिर रह कर इस बारे में जवाब देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने चेयरमैन को निर्देश दिए कि वे बताएं कि कितने समय में क्या-क्या काम पूरा होगा और कब तक यह हाउसिंग प्रोजेक्ट बन कर तैयार हो जाएगा। अगली सुनवाई पर चेयरमैन को इसका जवाब देना होगा।
पिछले साल ये कहा था यूटी प्रशासन ने
गत वर्ष प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ प्रशासन के 3930 सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2008 बनाई गई हाउसिंग स्कीम के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए फिलहाल 20.77 एकड़ जमीन चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपी जा चुकी है। जिसमे से 11.795 एकड़ जमीन इस स्कीम के अलावा वर्ष 2008 की एक अन्य जनरल हाउसिंग स्किम के लिए बोर्ड को सौंपी गई है। बाकी बची 61.5 एकड़ जमीन के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव बना केंद्र सरकार को कैबिनेट नोट भेज दिया था। इस लिहाज से इस स्कीम के लिए 71 एकड़ से अधिक जमीन जारी करने का खाका बना लिया गया है।