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Highcourt News: पंजाब की ग्रामीण डिस्पेंसरियों में खाली हैं डॉक्टरों के 436 पद, सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

Sun, 31 Jul 2022 01:18 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 31 Jul 2022 01:18 PM IST
सार

याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इन डिस्पेंसरियों में रिक्त पड़े डॉक्टरों के पदों को भरा जाए और दवाओं की तत्काल सप्लाई के आदेश दिए जाएं ताकि स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम न रहना पड़े।

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Punjab Haryana Highcourt ordered Punjab Government to file status report on rural dispensaries
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo

विस्तार

पंजाब की ग्रामीण डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों के 436 रिक्त पदों को भरने की मांग वाली जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को वर्तमान पदों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

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मोगा के यादविंदर सिंह ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब की ग्रामीण डिस्पेंसरियों की हालत बेहद खराब है। कई डिस्पेंसरियों में तो डॉक्टर तक नहीं हैं और कई में दवाएं नहीं हैं। याची ने इस बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो बताया गया कि पंजाब की ग्रामीण डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों के 436 पद रिक्त हैं। दवाओं की आखिरी बाद सप्लाई अक्तूबर 2018 में की गई थी। 
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याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इन डिस्पेंसरियों में रिक्त पड़े डॉक्टरों के पदों को भरा जाए और दवाओं की तत्काल सप्लाई के आदेश दिए जाएं ताकि स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम न रहना पड़े। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। कोरोना के चलते लंबे समय से याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

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हरियाणा सरकार को दिया आदेश... वन भूमि पर न हो कोई गैर वन्य कार्य

हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब भूमि परिसंरक्षण अधिनियम 1900 (पीएलपीए) में संशोधन के बिल को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने वन भूमि पर किसी भी गैर वन्य कार्य को रोकना सुनिश्चित करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया है।

पीएलपीए के अधीन क्षेत्रों में कोई निर्माण कार्य व अवैध खनन को रोकने के लिए शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल हाईकोर्ट याचिका दाखिल कर अपील की है। याची ने बताया कि उसने आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी में बताया गया कि वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व विधानसभा स्पीकर ने 20 अगस्त 2019 को बताया था कि संशोधन बिल पर राज्यपाल की सहमति आना बाकी है जबकि राज्यपाल ने रिकार्ड के अनुसार 11 जून 2019 को इस बिल को सहमति दे दी गई है। बंसल ने कहा कि पीएलपीए में संशोधन वन व वन्य प्राणियों की सुरक्षा तथा जनहित के विरुद्ध है।

अभी राज्य में केवल 3.5 फीसदी वन क्षेत्र

हरियाणा सरकार ने 2006 में वन नीति बनाई थी जिसके अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र 6 प्रतिशत है जिसे 2010 में 10 प्रतिशत तथा 2020 में 20 प्रतिशत किया जाना तय था, लेकिन अब हरियाणा में केवल 3.5 प्रतिशत वन क्षेत्र  ही बचा है। यदि पीएलपीए में संशोधन पूरी तरह से लागू हो जाता है तो वन क्षेत्र केवल 2 प्रतिशत रह जाएगा। पीएलपीए हरियाणा के 10 जिलों में मौजूद शिवालिक व अरावली पहाड़ियों पर लागू है जहां नान फॉरेस्ट एक्टिविटी पर प्रतिबंध है। 

बिल पास होने से पर्यावरण पर पड़ेगा असर

बिल पास होने से वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग, पेड़ों की कटाई, भूमिगत जल स्तर गिरना, इमारतों का निर्माण होने से पर्यावरण प्रभावित होगा। सरकार इससे भू माफिया व बिल्डर्स को फायदा पहुंचाना चाहती है। बंसल ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि जो भूमि वन विभाग के पंजाब भू-परिसंरक्षण अधिनियम 1900(पीएलपीए) के अधीन आरक्षित है, वन विभाग उस अधिसूचना को रद्द नहीं कर सकता।

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