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हाईकोर्ट ने रोडवेज यूनियन से कहा- सरकार को अपना काम करने दीजिए, कोई अड़ंगा न अड़ाइए
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:27 AM IST
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हाईकोर्ट
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हरियाणा सरकार प्राइवेट बस चलाए या हवाई जहाज आपके हित प्रभावित नहीं होंगे, हम यह सुनिश्चित करेंगे। आज प्राइवेट बसों का विरोध कर रहे हैं, कल कह देंगे एयरपोर्ट बंद कर दो। सवारियों की कमी हो रही है तो क्या हम एयरपोर्ट बंद करवा देंगे। सरकार को सरकार का काम करने दो आपके हित प्रभावित नहीं होंगे। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका पर सुनवाई जनवरी तक स्थगित कर दी है।
वीरवार को हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की तरफ से एक एप्लीकेशन देकर हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार की किलोमीटर स्कीम न तो राज्य सरकार के हित में है और न ही रोडवेज के हित में। एप्लीकेशन में बताया गया कि राज्य सरकार के पास करीब 4000 बसें हैं, जिनमें से 1000 बसें खराब पड़ी हैं। अगर सरकार इन बसों को ठीक करके चलाए तो प्राइवेट बसों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम के लिए 300 बसें खरीदी गई थीं जो फरीदाबाद डिपो में खड़ी हैं। न चलने के कारण उन बसों के टायर खराब हो गए हैं। अगर सरकार इन बसों को ठीक कराकर चलाये तो 300 बसें और मिल सकती हैं।
किलोमीटर स्कीम की गिनाईं खामियां
रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने अपना जवाब दायर कर सरकार के किलोमीटर स्कीम के विरोध में कुछ खामियां कोर्ट के सामने रखीं। यूनियन ने बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा सरकार प्राइवेट बस ऑपरेटर को किलोमीटर स्कीम के तहत ज्यादा राशि दे रही है जो राज्य के लिए ठीक नहीं है। यूनियन ने हाईकोर्ट से यह भी आग्रह किया कि वह सरकार के किलोमीटर स्कीम पर तुरंत रोक लगा दे।
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प्राइवेट बस आपरेटर्स की अपील से कोर्ट नाराज
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हम आपके हितों की रक्षा करने के लिए सुनवाई कर रहे हैं सरकार चाहे प्राइवेट बस चलाए या जहाज अगर इससे आपका हित प्रभावित होगा तो ही आगे कोई आदेश जारी किए जाएंगे। इसी बीच प्राइवेट बस ऑपरेटर्स की ओर से अपील की गई कि हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार का रवैया अपनाया जाएगा तो किलोमीटर स्कीम पर रोक लगा देंगे। हाईकोर्ट ने कर्मचारी नेताओं द्वारा सौंपी गई अर्जी पर हरियाणा सरकार और प्राइवेट ऑपरेटर्स से जवाब तलब कर लिया है।
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वीरवार को हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की तरफ से एक एप्लीकेशन देकर हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार की किलोमीटर स्कीम न तो राज्य सरकार के हित में है और न ही रोडवेज के हित में। एप्लीकेशन में बताया गया कि राज्य सरकार के पास करीब 4000 बसें हैं, जिनमें से 1000 बसें खराब पड़ी हैं। अगर सरकार इन बसों को ठीक करके चलाए तो प्राइवेट बसों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम के लिए 300 बसें खरीदी गई थीं जो फरीदाबाद डिपो में खड़ी हैं। न चलने के कारण उन बसों के टायर खराब हो गए हैं। अगर सरकार इन बसों को ठीक कराकर चलाये तो 300 बसें और मिल सकती हैं।
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किलोमीटर स्कीम की गिनाईं खामियां
रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने अपना जवाब दायर कर सरकार के किलोमीटर स्कीम के विरोध में कुछ खामियां कोर्ट के सामने रखीं। यूनियन ने बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा सरकार प्राइवेट बस ऑपरेटर को किलोमीटर स्कीम के तहत ज्यादा राशि दे रही है जो राज्य के लिए ठीक नहीं है। यूनियन ने हाईकोर्ट से यह भी आग्रह किया कि वह सरकार के किलोमीटर स्कीम पर तुरंत रोक लगा दे।
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प्राइवेट बस आपरेटर्स की अपील से कोर्ट नाराज
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हम आपके हितों की रक्षा करने के लिए सुनवाई कर रहे हैं सरकार चाहे प्राइवेट बस चलाए या जहाज अगर इससे आपका हित प्रभावित होगा तो ही आगे कोई आदेश जारी किए जाएंगे। इसी बीच प्राइवेट बस ऑपरेटर्स की ओर से अपील की गई कि हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार का रवैया अपनाया जाएगा तो किलोमीटर स्कीम पर रोक लगा देंगे। हाईकोर्ट ने कर्मचारी नेताओं द्वारा सौंपी गई अर्जी पर हरियाणा सरकार और प्राइवेट ऑपरेटर्स से जवाब तलब कर लिया है।