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जाट आरक्षण आंदोलन मामला, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 25 Sep 2016 09:31 AM IST
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- फोटो : File Photo
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा मामले में शनिवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में यह लिखे जाने पर कि कोर्ट इस मामले में हस्तेक्षप कर रहा है, हाईकोर्ट ने सरकार को जमकर लताड़ा।
इन दंगों की तुलना 1947 में हुए दंगों से करते हुए कहा की आजादी के बाद से ऐसे दंगे कही नहीं हुए थे और पंजाब में आतंकवाद के दौरान भी इतना नुकसान नहीं हुआ। बावजूद इसके सरकार कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इन मामलों से कोर्ट पीछे नहीं हटेगी और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे ला सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।
आरक्षण आंदोलन के दौरान पूरे प्रदेश में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के भाई की अर्जी पर हुई सुनवाई में कहा गया है कि पांच आरोपी जांच में शामिल हो चुके हैं जबकि तीन को भगौड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच और कुछ बड़े राजनेताओं के नाम की आशंका के चलते इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।
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इन दंगों की तुलना 1947 में हुए दंगों से करते हुए कहा की आजादी के बाद से ऐसे दंगे कही नहीं हुए थे और पंजाब में आतंकवाद के दौरान भी इतना नुकसान नहीं हुआ। बावजूद इसके सरकार कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इन मामलों से कोर्ट पीछे नहीं हटेगी और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे ला सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।
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आरक्षण आंदोलन के दौरान पूरे प्रदेश में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के भाई की अर्जी पर हुई सुनवाई में कहा गया है कि पांच आरोपी जांच में शामिल हो चुके हैं जबकि तीन को भगौड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच और कुछ बड़े राजनेताओं के नाम की आशंका के चलते इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।
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आंदोलन के दौरान 2000 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए
कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई ने भी अपने जवाब में कहा है कि आंदोलन के दौरान 2000 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिन्हें सीबीआई नहीं ले सकती है। इस प्रकरण से जुड़े तीन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, जिसमें कैप्टन अभिमन्यु के प्रतिष्ठानों में आगजनी का मामला भी शामिल है।
एडिशनल एडवोकेट जनरल लोकेश सिंघल ने बताया की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि इस दौरान दर्ज मामलों की जांच सीबीआई को क्यों न दे दिए जाए। उन्होंने बताया कि इस मामले में सरकार ने शपथ पत्र दिया है जिसमें बताया कि सभी मामलो में सीआरपीसी के मुताबिक कार्यवाही की जा रही है। करीब 500 मामलो में चालान भी दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोर्ट चाहता है की सभी मामलो की जांच ठीक तरीके से हो।
करीब दो घंटे तक चली बहस के बाद तुषार मेहता ने इन सभी मामले की प्रभावी और निष्पक्ष जांच के लिए सरकार को एक कमेटी के घटना का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया जा सकता है, जिसमें गृह सचिव, डीजीपी और एडवोकट जनरल भी शामिल किए जा सकते हैं।
एडिशनल एडवोकेट जनरल लोकेश सिंघल ने बताया की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि इस दौरान दर्ज मामलों की जांच सीबीआई को क्यों न दे दिए जाए। उन्होंने बताया कि इस मामले में सरकार ने शपथ पत्र दिया है जिसमें बताया कि सभी मामलो में सीआरपीसी के मुताबिक कार्यवाही की जा रही है। करीब 500 मामलो में चालान भी दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोर्ट चाहता है की सभी मामलो की जांच ठीक तरीके से हो।
करीब दो घंटे तक चली बहस के बाद तुषार मेहता ने इन सभी मामले की प्रभावी और निष्पक्ष जांच के लिए सरकार को एक कमेटी के घटना का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया जा सकता है, जिसमें गृह सचिव, डीजीपी और एडवोकट जनरल भी शामिल किए जा सकते हैं।