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Highcourt News: पीजीआई इंप्लाइज एसोसिएशन पर दर्ज एफआईआर मामले में हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से मांगा जवाब

Sun, 28 Aug 2022 01:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 28 Aug 2022 01:06 PM IST
सार

याची ने कहा कि एसोसिएशन आरक्षण का विरोध करती है, लेकिन यह कोई अपराध नहीं है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर यूटी प्रशासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 

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Punjab-Haryana HighCourt issued notice to UT administration on petition by PGI Employees Association
court new - फोटो : istock

विस्तार

पीजीआई जरनल एंड ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन व अन्य को नोटिस जारी किया है। इसमें कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न एससी/एसटी एक्ट में दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी जाए।

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याचिका दाखिल करते हुए यूनियन के पदाधिकारी सुशील कुमार बत्तान ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश पर याची एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने 6 जुलाई 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। आयोग को पीजीआई की मिनिस्ट्रियल एंड सेक्रिटेरियल इंप्लाइज यूनियन के कथित अध्यक्ष हरभजन सिंह भट्टी ने शिकायत भेजी थी। याची ने बताया कि भट्टी ने यूनियन के लेटरपैड का गलत इस्तेमाल कर इसे भेजा था, जबकि याची इस यूनियन का अगस्त 2020 से सदस्य तक नहीं है। याची ने कहा कि एफआईआर के अनुसार याची एसोसिएशन अशांति फैला रही है और पदोन्नति में आरक्षण का विरोध कर संविधान के प्रावधानों के खिलाफ जा रही है। 
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याची ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ और कैच अप रूल को लागू करने के लिए याचिकाकर्ता ने विरोध किया था तो यह कोई अपराध नहीं है। देश में हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। साथ ही ऐसी कोई घटना तक नहीं बताई गई, जिसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला बनता हो। याची ने कहा कि एसोसिएशन आरक्षण का विरोध करती है, लेकिन यह कोई अपराध नहीं है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर यूटी प्रशासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 

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