{"_id":"5a8d51bc4f1c1b514a8ba80e","slug":"punjab-haryana-highcourt-big-decision-about-reservation-for-promotion-in-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में प्रमोशन को लेकर बदल गया एक नियम, हाईकोर्ट का सरकार को झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में प्रमोशन को लेकर बदल गया एक नियम, हाईकोर्ट का सरकार को झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 21 Feb 2018 04:32 PM IST
विज्ञापन
ऑफिशियल कर्मचारी
- फोटो : डेमो फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को प्रमोशन देने को लेकर एक नियम बदल दिया है। दरअसल, मामले में हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत अब प्रमोशन में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। इस संबंध में याचिकाएं मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण के प्रावधान को रद्द कर दिया है।
जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस बीएस वालिया की खंडपीठ ने अमन कुमार व अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किए हैं। याचिका में पंजाब में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग को सरकारी सेवा में रिजर्वेशन एक्ट-2006 के उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसमें कर्मियों को प्रमोशन में भी आरक्षण देने का फैसला लिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ऐसा प्रावधान बनाने से पहले कमेटी का गठित करना जरूरी है। यह कमेटी प्रदेश में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के पिछड़ेपन और उनके प्रतिनिधित्व के बारे में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने का निर्णय ले सकती है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद पंजाब सरकार ने ऐसी किसी भी कमेटी का गठन किया ही नहीं और ना ही सर्वे करवाया गया। बिना कमेटी का गठन किए ही प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है जिस कारण सामान्य वर्ग के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि वर्ष 2014 में हरियाणा सरकार की ऐसी ही एक नीति को हाईकोर्ट रद्द कर चुका है।
विज्ञापन
जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस बीएस वालिया की खंडपीठ ने अमन कुमार व अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किए हैं। याचिका में पंजाब में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग को सरकारी सेवा में रिजर्वेशन एक्ट-2006 के उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसमें कर्मियों को प्रमोशन में भी आरक्षण देने का फैसला लिया गया था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ऐसा प्रावधान बनाने से पहले कमेटी का गठित करना जरूरी है। यह कमेटी प्रदेश में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के पिछड़ेपन और उनके प्रतिनिधित्व के बारे में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने का निर्णय ले सकती है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद पंजाब सरकार ने ऐसी किसी भी कमेटी का गठन किया ही नहीं और ना ही सर्वे करवाया गया। बिना कमेटी का गठन किए ही प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है जिस कारण सामान्य वर्ग के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि वर्ष 2014 में हरियाणा सरकार की ऐसी ही एक नीति को हाईकोर्ट रद्द कर चुका है।