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आदेश न मानने पर हाईकोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, कहा- पालन करें या दोषियों के नाम बताएं
Wed, 24 Jul 2019 10:53 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Jul 2019 10:53 AM IST
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स्वतंत्रता सेनानियों के सभी कानूनी वारिसों को स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन योजना के लिए आश्रित मानने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन किया जाए, नहीं तो पालन न होने के लिए दोषी अधिकारियों के नाम बताए जाएं।
मालविंदर सिंह बड़ैच ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों की परिभाषा का विस्तार करने के निर्देश दिए जाने की अपील की थी। याची ने हाईकोर्ट को को बताया था कि केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को पेंशन के लिए जो स्कीम तैयार की है उसमें आश्रित की परिभाषा सीमित है।
योजना में स्वतंत्रता सेनानियों के माता-पिता और उनकी अविवाहित और बेरोजगार बेटी को ही इसका लाभ लेने के लिए पात्र माना था। याची ने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद शायद ही किसी स्वतंत्रता सैनिक के माता-पिता जीवित हों और यह भी मुश्किल होगा कि स्वतंत्रता सैनिक की कोई ऐसी बेटी मिले जो अविवाहित हो। लिहाजा इस स्कीम का दायर बढ़ाया जाना चाहिए।
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मालविंदर सिंह बड़ैच ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों की परिभाषा का विस्तार करने के निर्देश दिए जाने की अपील की थी। याची ने हाईकोर्ट को को बताया था कि केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को पेंशन के लिए जो स्कीम तैयार की है उसमें आश्रित की परिभाषा सीमित है।
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योजना में स्वतंत्रता सेनानियों के माता-पिता और उनकी अविवाहित और बेरोजगार बेटी को ही इसका लाभ लेने के लिए पात्र माना था। याची ने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद शायद ही किसी स्वतंत्रता सैनिक के माता-पिता जीवित हों और यह भी मुश्किल होगा कि स्वतंत्रता सैनिक की कोई ऐसी बेटी मिले जो अविवाहित हो। लिहाजा इस स्कीम का दायर बढ़ाया जाना चाहिए।
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जनहित याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने वर्ष 2012 में केंद्र सरकार को इस योजना में कुछ संशोधन के आदेश दिए थे। आदेश के इतने साल बाद भी केंद्र सरकार ने कोई भी कार्रवाई नहीं की। इसके चलते मालविंदर सिंह बड़ैच ने अब केंद्र सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट ने आदेशों की अवमानना याचिका दायर की है।
कमेटी ने कहा, योजना में संशोधन संभव नहीं
मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने हाईकोर्ट के आदेश पर गौर कर पाया कि इस योजना में संशोधन नहीं किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि या तो हाईकोर्ट के आदेश के तहत स्कीम में संशोधन किया जाए या फिर उन अधिकारियों के नाम बताएं जिन्होंने आदेश को लागू नहीं किया। याचिका पर सुनवाई अब 29 अक्तूबर को होगी।
कमेटी ने कहा, योजना में संशोधन संभव नहीं
मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने हाईकोर्ट के आदेश पर गौर कर पाया कि इस योजना में संशोधन नहीं किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि या तो हाईकोर्ट के आदेश के तहत स्कीम में संशोधन किया जाए या फिर उन अधिकारियों के नाम बताएं जिन्होंने आदेश को लागू नहीं किया। याचिका पर सुनवाई अब 29 अक्तूबर को होगी।