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हाईकोर्ट ने पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर और उसकी पत्नी की सजा पर रोक रखी जारी, जानिए मामला

Wed, 13 May 2020 12:24 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 13 May 2020 12:24 PM IST
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Punjab Haryana High Court Stay on Punishment of Former Assistant Engineer
सांकेतिक तस्वीर
यूटी के पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर राजेश चड्ढा और उनकी पत्नी मंजू चड्ढा की सजा पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक जारी रखा है। साथ ही दोनों की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई 9 जुलाई तक स्थगित कर गई दी है, लेकिन जुर्माने की राशि पर कोई रोक नहीं लगाई है। बता दें कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में यूटी के पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर राजेश चड्ढा और उनकी पत्नी मंजू चड्ढा को दोषी करार देकर चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट ने 85 लाख रुपये जुर्माना और 3.3 वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट ने पहले इन दोनों की सजा पर मंगलवार 12 मई तक रोक लगाई थी। मंगलवार को जस्टिस रेखा मित्तल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए पहले दी अंतरिम राहत को जारी रखते हुए सुनवाई 9 जुलाई तक स्थगित कर दी। गौरतलब है कि एक कॉन्ट्रैक्टर की शिकायत पर ही राजेश चड्डा के खिलाफ सीबीआई  ने केस दर्ज किया था। कॉन्ट्रैक्टर ने सीबीआई  को शिकायत दी थी कि राजेश चड्ढा ने उसके 1.90 लाख रुपये के लंबित बिलों को क्लीयर करने के लिए 70 हजार रुपये की रिश्वत ली।
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इसके बाद सीबीआई ने उनके घर पर छापा मारा था। छापे के दौरान कुछ दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिनके आधार पर उनकी संपत्ति आय से अधिक होने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में 6 सितंबर 2012 को दंपती के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। जिसमें बरामद दस्तावेज भी शामिल किए गए थे। आरोपी मंजू ने अपने पति को निवेश दस्तावेजों को तैयार करने के लिए अपने नाम का उपयोग करने की अनुमति दी थी। इसलिए सीबीआई ने उनको भी आरोपी बनाया था।
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उस समय उनकी संपत्ति 98 लाख से अधिक पाई गई थी। अदालत ने कहा था कि दोषी अपनी संपत्ति की जानकारी अपने विभाग को देने और बरामद दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति को गलत साबित करने में विफल रहा। सीबीआई कोर्ट ने 12 मार्च को दोनों को दोषी करार दे 3.3 वर्ष की कैद और 85 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी थी। इसी फैसले को राजेश चड्डा ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी है।
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