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हाईकोर्ट की टिप्पणी- पत्नी का अत्याचार के खिलाफ बार-बार पुलिस को शिकायत देना क्रूरता नहीं

Fri, 07 Feb 2020 11:11 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 07 Feb 2020 11:11 AM IST
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Punjab Haryana High Court Statement on Wife Complaint Regarding Domestic Violence
सांकेतिक तस्वीर
पत्नी को पति द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ बार-बार पुलिस के पास शिकायत देने का हक है और इसे पति के प्रति क्रूरता नहीं कहा जा सकता। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा इसे क्रूरता मानने के फैसले को गलत करार देते हुए तलाक के खिलाफ पत्नी की याचिका मंजूर कर ली है।
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हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पत्नी क्या तब तक अथॉरिटी के पास शिकायत न करे, जब तब पति के अत्याचार से उसके चेहरे पर नीले निशान न नजर आने लगे। गुरुग्राम निवासी एक व्यक्ति ने निचली अदालत में इस आधार पर तलाक मांगा था कि उसकी पत्नी क्रूर है और छोटी छोटी बातों पर पुलिस में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवा देती है।
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इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर भी वह उसके खिलाफ शिकायत करती रहती है। पत्नी का रवैया उसके प्रति नकारात्मक है। पत्नी न केवल घमंडी, कठोर व झगड़ालू स्वभाव की है, बल्कि वह शराब पीती है और धूम्रपान करती है। वह उसके प्रति अपने वैवाहिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से इंकार कर देती है। ऐसे में उसको तलाक दिया जाए।
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पति का पक्ष सुनकर कोर्ट ने सुना दिया था फैसला

फैमिली कोर्ट ने पति के तर्क को आधार बनाकर दोनों के बीच तलाक का फैसला सुना दिया था। लेकिन तलाक के फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। पत्नी ने हाईकोर्ट को बताया कि वह क्रूर नहीं है, बल्कि उसका पति उसके प्रति क्रूर है। पति शराबी, झगड़ालू और हिंसा वादी है। उसने याची को मजबूर किया कि वह अपनी बेटी के साथ अलग रहे।

उसने अपने वैवाहिक संबंधों को सुधारने के लिए अधिकारियों से संपर्क साधा था। पति उसके खिलाफ कई स्तर पर अत्याचार कर रहा है। उसने तंग होकर ही पुलिस में पति के खिलाफ शिकायत की थी। अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को पूरा अधिकार है कि वो अपने पति के अत्याचार के खिलाफ पुलिस स्टेशन से लेकर अधिकारियों तक शिकायत करे।

पत्नी के इस व्यवहार को क्रूरता नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पत्नी क्या पति के खिलाफ तब तक अथॉरिटी के पास शिकायत न करे, जब तब पति के अत्याचार से उसके चेहरे पर नीले निशान न नजर आने लगे।
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